हरियाणा और यूपी में मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच राजस्थान में भी मजदूरों ने बताई अपनी पीड़ा

Written by sabrang india | Published on: April 17, 2026
भिवाड़ी में मजदूरों ने LPG की बढ़ती कीमतों, काम के अधिक घंटों और कथित तौर पर खराब कार्य-स्थितियों को लेकर इन्हें बेहतर करने की मांग की है।


फोटो साभार : इंडियन एक्सप्रेस

सुनीता देवी, 11,500 रुपये वेतन पाने वाली महिला, पिछले महीने तक अपनी सैलरी से ही गुज़ारा करती थीं। तीन बच्चों की मां सुनीता उस पैसे का इस्तेमाल किराया देने और घर का राशन खरीदने में करती थीं, और जो कुछ बचता था, उससे अपने बच्चों की परवरिश करती थीं। यह सब तब बदल गया, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस की कीमतें बढ़ने लगीं, जिससे घर का बजट बिगड़ गया।

भिवाड़ी की एक फैक्ट्री में काम करने वाली 35 वर्षीय महिला ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पहले मैं 200 रुपये में 3 किलो का सिलेंडर खरीद लेती थी। अब इसकी कीमत बढ़कर 1,500 रुपये हो गई है,” वह कहती हैं। “मैं आठ घंटे काम करती हूं, जिसके लिए मुझे ओवरटाइम के तौर पर 60 रुपये मिलते हैं। मेरी सैलरी इन बढ़ती कीमतों का मुकाबला कैसे कर पाएगी?”

वह अकेली नहीं हैं। जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण LPG की कीमतें बढ़ रही हैं, राजस्थान के औद्योगिक शहर भिवाड़ी में पिछले एक हफ्ते से सैकड़ों मजदूर अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि यह आंदोलन पहले से चल रहा था, लेकिन हरियाणा सरकार के न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी के फैसले के बाद यह और तेज हो गया, जिससे यहां भी इसी तरह के कदम उठाने की मांग उठने लगी।

मजदूरों के आरोप काम करने की खराब स्थितियों से लेकर फैक्ट्री मालिकों द्वारा कथित दुर्व्यवहार और डराने-धमकाने तक हैं। जहां कुछ फैक्ट्री प्रबंधन ने सैलरी बढ़ाने पर सहमति जताई है, वहीं अन्य के साथ बातचीत अभी भी जारी है।

रिपोर्ट के अनुसार, भिवाड़ी में चार साल से काम कर रहे एक मजदूर ने कहा, “हमने कई बार सैलरी बढ़ाने की मांग की है, लेकिन कोई हमारी सुनता ही नहीं। मुझे 14,000 रुपये मिलते हैं, और मेरी शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक होती है, लेकिन हमें बिना ओवरटाइम के ज्यादा देर तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। गाली-गलौज तो रोज की बात है। अगर हम अपना और अपने परिवार का पेट ही नहीं भर सकते, तो काम करने का क्या फायदा?”

अपनी तरफ से प्रशासन ने नोएडा जैसी हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुलिस की कई टुकड़ियां तैनात कर दी हैं। हालांकि, भिवाड़ी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अतुल साहू ने कहा कि इलाके में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा, “कोई हिंसा नहीं हुई है, और पुलिस ने मजदूरों की समस्याओं को सुलझाने के लिए विभिन्न फैक्ट्री एसोसिएशनों के साथ बैठकें की हैं।”

विरोध प्रदर्शनों की वजह क्या थी?

भिवाड़ी एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां 6,500 इकाइयां हैं, जो मुख्य रूप से ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग, दवा और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती हैं। नतीजतन, यह 4 लाख से ज्यादा अकुशल मजदूरों का कार्यस्थल है, जिनमें से 60 प्रतिशत राजस्थान के बाहर से हैं।

फैक्टरी मालिकों का कहना है कि इन मजदूरों में से 40 से 50 प्रतिशत को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखा जाता है। राजस्थान के कानूनों के मुताबिक, अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी 7,410 रुपये प्रति माह, अर्द्धकुशल मजदूरों के लिए 7,722 रुपये, कुशल मजदूरों के लिए 8,034 रुपये और अत्यधिक कुशल मजदूरों के लिए 9,334 रुपये प्रति माह निर्धारित है।

8 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। मजदूरों के विरोध प्रदर्शनों के चलते उठाए गए इस कदम का मतलब है कि राज्य में अकुशल मजदूरों को हर महीने 15,220.71 रुपये, अर्द्धकुशल मजदूरों को 16,780 रुपये और कुशल मजदूरों को 18,500 रुपये मिलेंगे।

इस कदम से भिवाड़ी में भी इसी तरह की मांगें उठने लगीं। न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के अलावा मजदूरों की मांगों में काम के बेहतर घंटे और कथित तौर पर होने वाली बदसलूकी को खत्म करना भी शामिल है। ये विरोध प्रदर्शन नोएडा में हाल ही में हुई अशांति की पृष्ठभूमि में हो रहे हैं, जहां इसी तरह के आंदोलन हिंसक हो गए थे, जिससे यहां के अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

मजदूरों का आरोप है कि काम करने की स्थितियां बेहद खराब हैं, जिनमें गाली-गलौज, आराम के लिए ब्रेक न मिलना और धमकियां शामिल हैं। हालांकि फैक्ट्री मालिक इन आरोपों से इनकार करते हैं और दावा करते हैं कि उन्होंने “काम के घंटे तय कर रखे हैं और ओवरटाइम का भुगतान भी करते हैं।”

फैक्टरी मालिकों के संगठन भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जसबीर सिंह राणा ने कहा, “कई फैक्टरियां खाना भी उपलब्ध कराती हैं।”

वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग बढ़ी हुई मजदूरी की मांग का विरोध कर रहे हैं। वे कई तरह की कठिनाइयों का हवाला देते हुए कहते हैं कि वे “चारों तरफ से घिरे हुए” महसूस कर रहे हैं। भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष गिरधारी लाल स्वामी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ लगाए, फिर ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण ईंधन की कमी हुई और अब हरियाणा सरकार ने मजदूरी बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “राजस्थान में अकुशल मजदूर की न्यूनतम सैलरी 7,450 रुपये है। पर्याप्त वेतन मिलने के बावजूद ये मजदूर मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।”

जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं, फैक्टरी मालिकों ने सुलह के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उदाहरण के तौर पर, भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन का दावा है कि उसने मजदूरों के बीच 600 गैस सिलेंडर बांटे हैं। राणा ने कहा, “हमने जिला आपूर्ति अधिकारी को 500 और सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए एक पत्र भी लिखा है। इनमें से ज्यादातर मजदूरों के पास गैस कनेक्शन नहीं है, इसलिए वे इसे ब्लैक मार्केट से खरीदते हैं।”

विरोध प्रदर्शनों के बीच राज्य सरकार का कहना है कि वह “मजदूरों और फैक्टरी मालिकों के साथ लगातार बातचीत” कर रही है और “हालात काबू में हैं।” जब पूछा गया कि क्या राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, तो उप श्रम आयुक्त प्रज्ञा शर्मा ने कहा कि यह बढ़ोतरी “काफी समय से लंबित” थी और उनके विभाग ने इसकी सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है।

Related

नए कानून के इंतजार में मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी अटकी, नई योजना लागू होने के बाद ही मजदूरी में बढ़ोतरी संभव

जयपुर के वीकेआई क्षेत्र में गैस संकट से मजदूरों पर बढ़ा आर्थिक बोझ, पलायन के संकेत

बाकी ख़बरें