नए कानून के इंतजार में मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी अटकी, नई योजना लागू होने के बाद ही मजदूरी में बढ़ोतरी संभव

Written by sabrang india | Published on: April 16, 2026
मनरेगा की जगह लेने वाले नए ‘वीबी-जी राम जी’ (VB-G RAM G) कानून के लागू होने तक 7 करोड़ मजदूरों की मजदूरी में बढ़ोतरी फिलहाल टली हुई है। अभी उन्हें पुरानी दरों के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा।


Photo Credit :UN Women/Gaganjit Singh 

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत काम करने वाले सात करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को अपनी मजदूरी बढ़ने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। जब तक केंद्र सरकार यूपीए दौर की इस योजना की जगह लाने वाले नए ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 को लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक दिहाड़ी दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक से भी अधिक समय में यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार ने फरवरी-मार्च के महीने में मनरेगा मजदूरी में संशोधन की अधिसूचना जारी नहीं की है।

रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा का संचालन करने और नई वीबी-जी राम जी योजना को लागू करने वाले नोडल मंत्रालय—केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD)—ने राज्यों को एक अहम सूचना दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई मजदूरी दरें तभी घोषित की जाएंगी, जब नया कानून लागू हो जाएगा। तब तक वित्तीय वर्ष 2025-26 की पुरानी दरें ही लागू रहेंगी।

हाल ही में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारियों को इस फैसले से अवगत कराया।

सूत्रों के अनुसार, सरकार नए कानून के लागू होने के बाद ही मजदूरी की संशोधित दरों का ऐलान करेगी। तब तक पिछले वित्तीय वर्ष की दरें ही देशभर में लागू रहेंगी।

केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की धारा 6 की उप-धारा (1) के तहत मजदूरी दरें तय करती है।

आम तौर पर नई मजदूरी दरें वित्तीय वर्ष के पहले दिन, यानी 1 अप्रैल से लागू हो जाती हैं। केंद्र सरकार भी प्रायः नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले ही मनरेगा की मजदूरी दरें अधिसूचित कर देती है, लेकिन इस साल पंद्रह दिन गुजर जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ है। बीते 13 वर्षों से यह परंपरा रही है कि अगले वित्तीय वर्ष की मजदूरी दरों की घोषणा फरवरी या मार्च में ही कर दी जाती थी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, परंपरागत रूप से मजदूरी दरों में हर साल नए वित्तीय वर्ष से ठीक पहले संशोधन किया जाता है। लेकिन फिलहाल मनरेगा से नए कानून वीबी-जी राम जी में बदलाव की प्रक्रिया जारी है, इसलिए इसके लागू होने तक वर्तमान दरें ही लागू रहेंगी। अभी योजना से जुड़े सभी श्रमिकों को बिना किसी बाधा के पुरानी दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है।

मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस संक्रमण काल में मजदूरों के कानूनी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पहले की तरह जारी है और मजदूरी भी पुरानी अधिसूचनाओं के मुताबिक दी जा रही है। नया ढांचा लागू होते ही संशोधित मजदूरी दरों को विधिवत अधिसूचित कर लागू कर दिया जाएगा।

मनरेगा की मजदूरी दरें सीपीआई-एएल (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक—कृषि श्रम) में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। यह सूचकांक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई के स्तर को दर्शाता है।

योजना के डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 14 अप्रैल 2026 तक इस ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 11.03 करोड़ सक्रिय मजदूर दर्ज किए गए थे। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5.34 करोड़ परिवारों के करीब 7.2 करोड़ लोगों ने इस योजना का लाभ लिया था।

पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने 27 मार्च को मनरेगा की मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी की थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल–मार्च) के लिए लागू रही। उस समय मजदूरी में पिछले साल के मुकाबले 2 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी।

ज्ञात हो कि एनडीए सरकार ने करीब दो दशक पुराने मनरेगा, 2005 को समाप्त करने के उद्देश्य से दिसंबर 2025 में वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पारित किया था। इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक नई केंद्र प्रायोजित योजना शुरू करना है।

विपक्ष ने इस नए कानून के कई प्रावधानों पर तीखी आपत्ति जताई है। इनमें फंड-शेयरिंग पैटर्न (धारा 22), मानक आवंटन (धारा 4 की उप-धारा 5) और कृषि के व्यस्त मौसम में रोजगार गारंटी पर रोक (धारा 6) जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन नियमों का सीधा असर राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है, जो पहले से ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

मनरेगा से अलग, वीबी-जी राम जी अधिनियम में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के वित्तपोषण में राज्यों की अधिक हिस्सेदारी का प्रस्ताव रखा गया है। नए कानून की धारा 22(1) के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड-शेयरिंग का अनुपात 11 राज्यों के लिए 90:10 और अन्य सभी राज्यों के लिए 60:40 निर्धारित किया गया है। वहीं, पुरानी मनरेगा योजना के तहत केंद्र सरकार पूरी मजदूरी का भुगतान करती थी और सामग्री व प्रशासनिक खर्च का 75 प्रतिशत वहन करती थी।

सरकार ने अभी तक उस तारीख की घोषणा नहीं की है, जब से नई योजना को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। तब तक मनरेगा योजना ही जारी रहेगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

इसी बीच, सूत्रों के अनुसार ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नई योजना लागू होने तक मनरेगा के तहत हर महीने के आधार पर लेबर बजट (यानी सृजित किए जाने वाले मानव-दिवसों की संख्या) को मंजूरी देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

इसी क्रम में अप्रैल महीने के लिए 29.94 करोड़ मानव-दिवस का लेबर बजट स्वीकृत किया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के इसी महीने में स्वीकृत 26.93 करोड़ मानव-दिवस के मुकाबले लगभग 11 प्रतिशत अधिक है।

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