उत्तर प्रदेश: SIR के बाद वोटर लिस्ट को लेकर शिकायतें, अखिलेश यादव ने दलितों और मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया

Written by sabrang india | Published on: April 14, 2026
बुंदेलखंड के बांदा में अलीगंज ईस्ट की रहने वाली 33 वर्षीय रानी सिंह को अंतिम वोटर लिस्ट में अपना नाम पांच बार मिला है। संशोधित सूची के अनुसार, वह एक ही इलाके में पांच अलग-अलग घरों में रहती हैं।



उत्तर प्रदेश में SIR के बाद बनी वोटर लिस्ट में कुछ अजीबोगरीब मामले सामने आ रहे हैं, जिससे कई जगहों पर जल्दबाजी में किए गए इस जटिल कार्य की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।

बुंदेलखंड के बांदा में अलीगंज ईस्ट की रहने वाली 33 वर्षीय रानी सिंह को फाइनल वोटर लिस्ट में अपना नाम पांच बार मिला है। संशोधित सूची के मुताबिक, वह उसी इलाके के पांच अलग-अलग घरों में रहती हैं।

द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा के सदस्य खान ने दावा किया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस गलती को ठीक करने के लिए लिखा था, लेकिन उनकी अर्जी को नजरअंदाज कर दिया गया।

खान ने कहा, “हम शुरू से ही कह रहे हैं कि SIR सिर्फ गैर-BJP वोटरों के नाम हटाने का एक तरीका है। उन्होंने मेरा नाम इसलिए नहीं हटाया क्योंकि मैं सक्रिय था और लगातार आवेदन दे रहा था। लेकिन उन्होंने मेरा पता बदल दिया, ताकि विवाद पैदा हो और मेरे वोट देने का अधिकार प्रभावित हो।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरे परिवार के कई सदस्यों के पते, जिनके नाम फाइनल लिस्ट में हैं, गलत हैं। इससे साफ होता है कि SIR का मकसद अफरा-तफरी और विवाद पैदा करना था। आम आदमी चुनाव आयोग के खिलाफ बोलने से डरता है।”

बांदा जिले में करीब 1.19 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं।

बांदा की बबेरू विधानसभा सीट से SP विधायक विश्वंभर सिंह यादव ने कहा, “मेरे चुनाव क्षेत्र से कुल 32,299 वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं और मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि वे मेरे वोटर थे। 2022 में मैंने BJP उम्मीदवार को करीब 7,300 वोटों के अंतर से हराया था। BJP सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर गैर-कानूनी तरीके से हमसे यह सीट छीनने की साजिश रच रही है।”

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि यह सूची एक सप्ताह तक बूथ-स्तर के कार्यालयों में उपलब्ध थी। उन्होंने कहा, “जिन लोगों को इसमें कोई गड़बड़ी मिलती है, वे संबंधित अधिकारियों से अपील कर सकते हैं।”

बागपत, अलीगढ़ और इलाहाबाद के लोगों ने भी इसी तरह की शिकायतें की हैं।

लोग वोटर लिस्ट के प्रकाशित होने के 15 दिनों के भीतर (25 अप्रैल तक) DEO के पास अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। DEO के आदेश के बाद, उनके पास मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष दूसरी अपील करने के लिए 30 दिन का समय होता है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “SIR का मकसद वोटरों को सूची में जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें हटाना था। कन्नौज में हमारे बड़ी संख्या में वोटरों को लिस्ट से हटा दिया गया, लेकिन अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें सूची में वापस नहीं जोड़ा गया। चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को साफ नहीं बनाया है, बल्कि इसे पूरी तरह गड़बड़ कर दिया है। इस तरह की गड़बड़ी BJP को ही फायदा पहुंचाती है।”

उन्होंने आगे कहा, “सूची से केवल दलित, OBC और मुस्लिम वोटरों को ही हटाया गया है।”

उत्तर प्रदेश की अंतिम वोटर लिस्ट से 2 करोड़ से अधिक नाम, यानी SIR से पहले के कुल वोटरों का 13.24 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं।

बता दें कि SIR के अंतर्गत वाराणसी जिले की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन शुक्रवार को किया गया। नई सूची के अनुसार, पिछली सूची की तुलना में 4,23,102 मतदाता कम हो गए हैं। अब जिले में कुल 27,30,603 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें 14,86,874 पुरुष, 12,43,611 महिलाएं और 118 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित किया गया था। उस समय जिले में मतदाताओं की कुल संख्या 31,53,705 (पुरुष-16,99,615, महिला-14,53,939, थर्ड जेंडर-151) थी। अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची (10 अप्रैल) में यह संख्या घटकर 27,30,603 रह गई है।

हालांकि, 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट के आधार पर मतदाता सूची में 1,50,101 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई थी। उस समय सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या 25,80,502 थी। पुनरीक्षण अवधि के दौरान 1,94,239 नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 44,138 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

6 जनवरी से 6 मार्च के बीच प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 मार्च तक पूरा कर लिया गया। आयोग के निर्देशानुसार, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जिले के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और उन्हें अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची की प्रतियां उपलब्ध कराईं।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 4 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए और उनका संग्रह भी किया। 6 जनवरी को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) प्रकाशित किया गया, जिसमें कुल मतदाताओं की संख्या 25,80,502 थी। इनमें 14,15,247 पुरुष, 11,65,145 महिलाएं और 110 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे।

बैठक में अधिकारियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अधिकारियों में शिवपुर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ARO) नीतिन सिंह, उत्तरी क्षेत्र के ARO आनंद मोहन उपाध्याय, दक्षिणी के ARO देवेंद्र कुमार तथा कैंट क्षेत्र की ARO शिवानी सिंह मौजूद रहीं।

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