उत्तराखंड: कम किराये पर सवारी बैठाने पर दलित टैक्सी चालक का अपमान, जूतों की माला पहनाकर बनाया वीडियो

Written by sabrang india | Published on: June 15, 2026
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


फोटो साभार :  द मूकनायक

उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कम किराये पर सवारी ले जाने को लेकर हुए विवाद में एक दलित टैक्सी चालक के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया। आरोप है कि कुछ अन्य टैक्सी चालकों ने उसके साथ मारपीट की और जूतों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित प्रेम राम के अनुसार, 10 जून को वह लोहाघाट से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को पुराने निर्धारित किराये पर ले जा रहे थे। आरोप है कि देवराड़ी बैंड के पास कुछ अन्य टैक्सी चालकों ने उनका वाहन रोक लिया। इसके बाद कम किराया लेने को लेकर उनके साथ गाली-गलौज की गई, जातिसूचक टिप्पणियां की गईं और मारपीट की गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की। विरोध करने पर कथित तौर पर प्रेम राम के गले में जूतों की माला डालकर उनका सार्वजनिक रूप से अपमान किया गया। साथ ही उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

पीड़ित ने इस संबंध में लोहाघाट थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि इस घटना से वे गहरे सदमे और आक्रोश में हैं। वहीं, प्रेम राम फिलहाल दिल्ली में हैं।

लोहाघाट पुलिस ने सोहन सिंह, हरीश बोहरा, वीरेंद्र सिंह और मोहन चंद्र समेत चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर एससी/एसटी एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं — 352, 351(3), 133, 126, 308(2), 309(3), 356 और 152(2) — के तहत कार्रवाई की गई है।

मामले की निगरानी चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव स्वयं कर रही हैं, जबकि जांच की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी (सीओ) निहारिका को सौंपी गई है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

इस बीच, 13 जून को पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी मनीष कुमार को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की। जिलाधिकारी ने मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए परिवहन विभाग को दिल्ली-देहरादून मार्गों पर किराये की जांच करने के निर्देश भी दिए।

वहीं, लोहाघाट थाने में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा कड़ी सजा की मांग की। अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लोगों ने इस घटना को अमानवीय और निंदनीय बताया।

ज्ञात हो कि दलित समुदाय के लोगों के साथ इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कथित तौर पर सवर्ण समुदाय के चार लोगों ने पानी की बाल्टी छूने के विवाद में एक 16 वर्षीय दलित किशोर को निर्वस्त्र कर बुरी तरह पीटा था।

रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों की क्रूरता यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि उन्होंने न केवल किशोर का हाथ तोड़ दिया, बल्कि उसे अपने जूतों पर थूककर उसे चाटने के लिए भी मजबूर किया।

कानपुर की यह घटना तब चर्चा में आई थी, जब इससे एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक अन्य वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में चंदौली जिले के एक पिछड़े वर्ग के युवक को बंदूक की नोक पर थूक चाटने के लिए मजबूर करते हुए देखा गया था।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर की यह घटना 2 मई को झखरा सांभरपुर गांव में हुई थी। पत्रकारों से बातचीत में पीड़ित किशोर के पिता ने बताया कि बीच-बचाव करने के दौरान हमलावरों ने उन पर भी हमला किया और उनकी पसलियां तोड़ दीं।

पेशे से किसान पीड़ित के पिता ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि उनके बेटे को कुछ लोगों ने बंधक बना रखा है। जब वह उसे बचाने के लिए मौके पर पहुंचे, तो आरोपियों ने उनकी भी बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने कहा कि गांव के अन्य लोगों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।

पीड़ित किशोर ने बताया कि वह खेतों में काम कर रहा था और उसे बहुत तेज प्यास लगी थी। तभी उसकी नजर संजय राजपूत के घर के सामने एक सार्वजनिक हैंडपंप के पास रखी पानी से भरी बाल्टी पर पड़ी।

किशोर के अनुसार, जैसे ही उसने वहां से एक मग पानी निकाला, संजय, उसका भाई दीपक और उनके साथी सागर कुमार तथा पतिया कुमार वहां पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने उसके हाथ से मग छीन लिया और करीब आधे घंटे तक उसे निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा।

किशोर ने बताया कि जब उसके पिता उसे बचाने आए, तो उन्हें भी लात-घूंसों से पीटा गया। दोनों पिता-पुत्र लगातार माफी मांगते रहे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें पीटना बंद नहीं किया।

इसके बाद, आरोप है कि संजय ने अपने जूतों पर थूका और किशोर को उसे चाटने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, उसके जूतों में पानी भरकर किशोर को वह पानी पीने के लिए भी विवश किया गया।

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