उत्तर प्रदेश के कासगंज, आगरा और लखीमपुर खीरी जिलों में अंबेडकर जयंती के मौके पर छिटपुट हिंसा की घटनाओं की सूचना मिलने के बाद तनाव बढ़ गया।

अंबेडकर जयंती
अंबेडकर जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के कासगंज, आगरा और लखीमपुर खीरी जिलों में तनाव का माहौल रहा। कासगंज में एक जुलूस के दौरान पत्थरबाज़ी की घटना के बाद तनाव भड़क उठा, जबकि आगरा में कुछ शरारती तत्वों ने परशुराम चौक पर चढ़कर हंगामा किया। लखीमपुर खीरी में सरकारी जमीन पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई।
आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, कासगंज में यह घटना सहावर थाना क्षेत्र के चाहका गुनर गांव में हुई, जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही एक शोभा यात्रा उस इलाके से गुजर रही थी।
पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने कथित तौर पर जुलूस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पत्थरबाज़ी लगभग एक घंटे तक जारी रही।
कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सड़क जाम कर दी, जिससे आसपास के इलाके में यातायात बाधित हो गया। अधिकारियों ने बताया कि पत्थर लगने से एक पुलिस कांस्टेबल घायल हो गया।
जिलाधिकारी प्रणय सिंह और पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना के सिलसिले में एक महिला सहित लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थिति अब नियंत्रण में है। गांव में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।”
डीएम प्रणय सिंह ने कहा कि जुलूस के दौरान पत्थरबाज़ी हुई थी और तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, “लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वीडियो फुटेज के जरिए घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
एसपी ओ.पी. सिंह ने बताया कि जिले के कई थाना क्षेत्रों में लगभग 50 जुलूस निकाले गए, जिनके लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
उन्होंने आगे कहा कि यह घटना जुलूस को बाधित करने की एक सोची-समझी कोशिश लगती है और इसके पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा, “यादव समुदाय के कुछ सदस्यों ने जुलूस को रोका था। जांच पूरी होने के बाद इसके पीछे के राजनीतिक मकसद स्पष्ट हो जाएंगे।”
अधिकारियों ने बताया कि तनाव के बावजूद, बाद में पुलिस की निगरानी में जुलूस फिर से शुरू हुआ और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
पुलिस ने बताया कि आगरा में मंगलवार को अंबेडकर जयंती के मौके पर कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा कथित तौर पर माहौल खराब करने की कोशिश के बाद शहर के कुछ हिस्सों में कुछ देर के लिए तनाव फैल गया।
अधिकारियों के अनुसार, नीले झंडे लिए कुछ युवक सिकंदरा थाना क्षेत्र के परशुराम चौक पर चढ़ गए। इस चौक पर भगवान परशुराम से जुड़े एक हथियार का प्रतीक बना हुआ है, जिसे लोग आस्था का केंद्र मानते हैं।
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भगवान परशुराम के समर्थक भी वहां जुटने लगे।
मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और धीरे-धीरे लोगों को समझा-बुझाकर वहां से हटाया, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ गई।
उन्होंने कहा, “कुछ शरारती तत्वों ने परशुराम चौक पर बनी संरचना पर चढ़कर झंडा लगा दिया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा कि शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
उधर, लखीमपुर खीरी में सरकारी जमीन पर अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के चलते शाम को मैलानी थाना क्षेत्र के बनकेगंज कस्बे में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। अधिकारियों ने बताया कि जब भीड़ उग्र हो गई और उसने अधिकारियों का सामना किया, तो यह झड़प हिंसा में बदल गई।
पुलिस द्वारा भीड़ को शांत करने के प्रयासों के बावजूद भीड़ हिंसक हो गई और उसने पत्थरबाज़ी व आगजनी शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार, भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हल्के बल का प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग सहित शीर्ष अधिकारी स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे।
अतिरिक्त एसपी अमित कुमार राय ने बताया कि विवाद तब शुरू हुआ जब सरकारी जमीन पर अंबेडकर की मूर्ति लगाई गई और दूसरे गुट ने इसका विरोध किया, जिससे तनाव और अशांति फैल गई। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से भीड़ को सफलतापूर्वक तितर-बितर कर दिया गया और स्थिति को नियंत्रण में ला दिया गया।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बहाल कर दी गई है और अब स्थिति सामान्य है।
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अंबेडकर जयंती
अंबेडकर जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के कासगंज, आगरा और लखीमपुर खीरी जिलों में तनाव का माहौल रहा। कासगंज में एक जुलूस के दौरान पत्थरबाज़ी की घटना के बाद तनाव भड़क उठा, जबकि आगरा में कुछ शरारती तत्वों ने परशुराम चौक पर चढ़कर हंगामा किया। लखीमपुर खीरी में सरकारी जमीन पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई।
आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, कासगंज में यह घटना सहावर थाना क्षेत्र के चाहका गुनर गांव में हुई, जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही एक शोभा यात्रा उस इलाके से गुजर रही थी।
पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने कथित तौर पर जुलूस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पत्थरबाज़ी लगभग एक घंटे तक जारी रही।
कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सड़क जाम कर दी, जिससे आसपास के इलाके में यातायात बाधित हो गया। अधिकारियों ने बताया कि पत्थर लगने से एक पुलिस कांस्टेबल घायल हो गया।
जिलाधिकारी प्रणय सिंह और पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना के सिलसिले में एक महिला सहित लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थिति अब नियंत्रण में है। गांव में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।”
डीएम प्रणय सिंह ने कहा कि जुलूस के दौरान पत्थरबाज़ी हुई थी और तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, “लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वीडियो फुटेज के जरिए घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
एसपी ओ.पी. सिंह ने बताया कि जिले के कई थाना क्षेत्रों में लगभग 50 जुलूस निकाले गए, जिनके लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
उन्होंने आगे कहा कि यह घटना जुलूस को बाधित करने की एक सोची-समझी कोशिश लगती है और इसके पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा, “यादव समुदाय के कुछ सदस्यों ने जुलूस को रोका था। जांच पूरी होने के बाद इसके पीछे के राजनीतिक मकसद स्पष्ट हो जाएंगे।”
अधिकारियों ने बताया कि तनाव के बावजूद, बाद में पुलिस की निगरानी में जुलूस फिर से शुरू हुआ और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
पुलिस ने बताया कि आगरा में मंगलवार को अंबेडकर जयंती के मौके पर कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा कथित तौर पर माहौल खराब करने की कोशिश के बाद शहर के कुछ हिस्सों में कुछ देर के लिए तनाव फैल गया।
अधिकारियों के अनुसार, नीले झंडे लिए कुछ युवक सिकंदरा थाना क्षेत्र के परशुराम चौक पर चढ़ गए। इस चौक पर भगवान परशुराम से जुड़े एक हथियार का प्रतीक बना हुआ है, जिसे लोग आस्था का केंद्र मानते हैं।
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भगवान परशुराम के समर्थक भी वहां जुटने लगे।
मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और धीरे-धीरे लोगों को समझा-बुझाकर वहां से हटाया, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ गई।
उन्होंने कहा, “कुछ शरारती तत्वों ने परशुराम चौक पर बनी संरचना पर चढ़कर झंडा लगा दिया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा कि शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
उधर, लखीमपुर खीरी में सरकारी जमीन पर अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के चलते शाम को मैलानी थाना क्षेत्र के बनकेगंज कस्बे में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। अधिकारियों ने बताया कि जब भीड़ उग्र हो गई और उसने अधिकारियों का सामना किया, तो यह झड़प हिंसा में बदल गई।
पुलिस द्वारा भीड़ को शांत करने के प्रयासों के बावजूद भीड़ हिंसक हो गई और उसने पत्थरबाज़ी व आगजनी शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार, भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हल्के बल का प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग सहित शीर्ष अधिकारी स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे।
अतिरिक्त एसपी अमित कुमार राय ने बताया कि विवाद तब शुरू हुआ जब सरकारी जमीन पर अंबेडकर की मूर्ति लगाई गई और दूसरे गुट ने इसका विरोध किया, जिससे तनाव और अशांति फैल गई। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से भीड़ को सफलतापूर्वक तितर-बितर कर दिया गया और स्थिति को नियंत्रण में ला दिया गया।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बहाल कर दी गई है और अब स्थिति सामान्य है।
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