काशी स्टेशन के पास स्थित मस्जिद हटाने का रेलवे का नोटिस; इंतजामिया का दावा— "मस्जिद 1034 की, रेलवे 1887 में आई"

Written by sabrang india | Published on: June 16, 2026
काशी रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित एक मस्जिद को हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे प्रशासन ने मस्जिद प्रबंधन को 20 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया है। वहीं, मस्जिद इंतजामिया का कहना है कि मस्जिद का निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था, जबकि राजघाट क्षेत्र में रेलवे 1887 में आई थी।


साभार :दैनिक भास्कर (स्क्रीनग्रैब)

काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और उसे मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर के आसपास मौजूद कथित अतिक्रमणों को चिह्नित कर उन्हें हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में काशी स्टेशन के निकट स्थित गन शहीदा मस्जिद को हटाने के लिए रेलवे की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में मस्जिद प्रबंधन को 20 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की ओर से संबंधित स्थल पर नोटिस चस्पा किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है और प्रस्तावित विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उक्त स्थान को खाली कराया जाना आवश्यक है। रेलवे की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

रेलवे मंत्रालय की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत काशी रेलवे स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। योजना में स्टेशन भवन का विस्तार, यात्रियों के लिए बेहतर प्रवेश और निकास व्यवस्था, सुव्यवस्थित पार्किंग, आधुनिक सुविधाओं का विकास, स्टेशन परिसर का सौंदर्यीकरण, यातायात प्रबंधन में सुधार और आसपास के क्षेत्र के समग्र पुनर्विकास का प्रावधान शामिल है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और प्रस्तावित विकास कार्यों को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए आसपास की रेल भूमि को अतिक्रमण-मुक्त कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्थलों की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है।

काशी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के क्षेत्रों में रेलवे तथा जिला प्रशासन पूर्व में भी अतिक्रमण-रोधी अभियान चला चुके हैं। इसी क्रम में किला कोहना (राजघाट) क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर, अजगेब शहीद मस्जिद और एक मजार को संयुक्त कार्रवाई के तहत हटाया गया था। प्रशासन का कहना था कि कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को नोटिस देकर सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं।

रेलवे की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है और क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

वहीं, स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और मस्जिद प्रबंधन के अगले कदमों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। 20 जून की निर्धारित समय-सीमा नजदीक आने के साथ यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। दूसरी ओर, रेलवे और जिला प्रशासन स्टेशन विकास परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के लिए संबंधित भूमि को खाली कराने की तैयारियों में जुटे हैं।

मस्जिद इंतजामिया की प्रतिक्रिया

उधर, मस्जिद इंतजामिया ने रेलवे के नोटिस पर आपत्ति जताई है। इंतजामिया की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि कथित नोटिस पर न तो किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और न ही उसके जारी होने की तारीख अंकित है।

बयान में कहा गया है कि जिस मुकदमे के खारिज होने का उल्लेख नोटिस में किया गया है, वह मस्जिद के बाहर पूर्व दिशा की भूमि से संबंधित था और उसका मस्जिद से कोई संबंध नहीं था। इसलिए यह नोटिस भ्रामक है।

इंतजामिया का कहना है कि इसी मुकदमे में रेलवे प्रशासन ने अपने शपथपत्र में मस्जिद के अस्तित्व और उस पर मुस्लिम समुदाय के स्वामित्व को स्वीकार किया था।



बयान में आगे कहा गया है, "यह मस्जिद वर्ष 1034 में बनी थी। इसका उल्लेख 1883-84 के बंदोबस्त नक्शे में भी मिलता है और उससे पुराने नक्शों में भी इसका रिकॉर्ड मौजूद है। दूसरी ओर, राजघाट क्षेत्र में रेलवे 1887 में आई थी। इससे स्पष्ट है कि मस्जिद रेलवे से पहले की है।"

इंतजामिया ने आरोप लगाया कि मस्जिद को अवैध बताने की रेलवे की कोशिश दुर्भावनापूर्ण है। उसने कहा कि अंजुमन मस्जिद इस मामले में हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेगी और पहले से लड़ रही है।

बयान में यह भी कहा गया कि रेलवे प्रशासन का नोटिस भ्रामक है और इससे नगर की कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।

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