आंदोलन के दौरान छात्रों ने कहा कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के जीयनपुर थाना क्षेत्र की सड़कों पर मंगलवार सुबह अचानक सैकड़ों छात्र इकट्ठा हो गए। छात्रों के इस प्रदर्शन ने विद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
दरअसल, वर्ष 1916 में आजमगढ़ के अजमतगढ़ में स्थापित स्मिथ कॉलेज के छात्रों और उनके अभिभावकों का गुस्सा मंगलवार सुबह अचानक कॉलेज प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों के सड़क पर उतरने से इलाके में हलचल मच गई और मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान छात्रों और अभिभावकों ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए, बल्कि हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पूरे विद्यालय प्रशासन की पोल खोलकर रख दी। शिक्षकों की कमी और मनमानी फीस वसूली को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन को भले ही प्रिंसिपल के हस्तक्षेप के बाद महज दो घंटों में ही समाप्त करा दिया गया, लेकिन छात्रों ने मांगें नहीं पूरी होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दे डाली।
मनमानी फीस लेने का आरोप
आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
कॉलेज के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने विद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि पिछले 26 वर्षों से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए नियमित शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं। छात्रों के मुताबिक, इन विषयों के शिक्षक कुछ समय के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रदर्शनकारी छात्रों और छात्राओं ने विद्यालय प्रशासन पर मनमाने तरीके से फीस वसूलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि अधिकांश छात्र गरीब परिवारों से आते हैं और विद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित मनमानी फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद फीस जमा करने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जाता है।
अभिभावकों का विद्यालय प्रशासन पर आरोप
छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने भी विद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। अभिभावकों का कहना है कि स्थानीय लोगों द्वारा एक सरकारी संस्थान का मनमाने तरीके से संचालन किया जा रहा है, जिसके चलते छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन और प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर फर्जी तरीके से नियुक्तियां की जाती हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक समस्या का कोई उचित समाधान नहीं हो सका है।
अभिभावकों का यह भी आरोप है कि कई बार विद्यालय प्रशासन द्वारा एक ही पद पर एक से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाती है। इससे विद्यालय की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रिंसिपल के समझाने पर छात्र माने
छात्रों और अभिभावकों के अचानक किए गए इस आंदोलन से विद्यालय प्रशासन भी सकते में आ गया। स्थिति को देखते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल खुद छात्रों के बीच पहुंचे और उनकी मांगों पर सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
हालांकि, पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी सवालों से बचते नजर आए। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने जब मामले को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अजय कुमार से बात करने का प्रयास किया तो वह कैमरे के सामने आने से बचते हुए गाड़ी में बैठकर वहां से चले गए।
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के जीयनपुर थाना क्षेत्र की सड़कों पर मंगलवार सुबह अचानक सैकड़ों छात्र इकट्ठा हो गए। छात्रों के इस प्रदर्शन ने विद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
दरअसल, वर्ष 1916 में आजमगढ़ के अजमतगढ़ में स्थापित स्मिथ कॉलेज के छात्रों और उनके अभिभावकों का गुस्सा मंगलवार सुबह अचानक कॉलेज प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों के सड़क पर उतरने से इलाके में हलचल मच गई और मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान छात्रों और अभिभावकों ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए, बल्कि हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पूरे विद्यालय प्रशासन की पोल खोलकर रख दी। शिक्षकों की कमी और मनमानी फीस वसूली को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन को भले ही प्रिंसिपल के हस्तक्षेप के बाद महज दो घंटों में ही समाप्त करा दिया गया, लेकिन छात्रों ने मांगें नहीं पूरी होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दे डाली।
मनमानी फीस लेने का आरोप
आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
कॉलेज के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने विद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि पिछले 26 वर्षों से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए नियमित शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं। छात्रों के मुताबिक, इन विषयों के शिक्षक कुछ समय के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रदर्शनकारी छात्रों और छात्राओं ने विद्यालय प्रशासन पर मनमाने तरीके से फीस वसूलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि अधिकांश छात्र गरीब परिवारों से आते हैं और विद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित मनमानी फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद फीस जमा करने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जाता है।
अभिभावकों का विद्यालय प्रशासन पर आरोप
छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने भी विद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। अभिभावकों का कहना है कि स्थानीय लोगों द्वारा एक सरकारी संस्थान का मनमाने तरीके से संचालन किया जा रहा है, जिसके चलते छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन और प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर फर्जी तरीके से नियुक्तियां की जाती हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक समस्या का कोई उचित समाधान नहीं हो सका है।
अभिभावकों का यह भी आरोप है कि कई बार विद्यालय प्रशासन द्वारा एक ही पद पर एक से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाती है। इससे विद्यालय की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रिंसिपल के समझाने पर छात्र माने
छात्रों और अभिभावकों के अचानक किए गए इस आंदोलन से विद्यालय प्रशासन भी सकते में आ गया। स्थिति को देखते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल खुद छात्रों के बीच पहुंचे और उनकी मांगों पर सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
हालांकि, पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी सवालों से बचते नजर आए। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने जब मामले को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अजय कुमार से बात करने का प्रयास किया तो वह कैमरे के सामने आने से बचते हुए गाड़ी में बैठकर वहां से चले गए।
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