“राजेश को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया था। शौचालय से लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया और बाद में बदायूं जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।”

प्रतीकात्मक तस्वीर, न्यूज18
बदायूं में पुलिस कस्टडी में एक 28 वर्षीय दलित व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस का दावा है कि शनिवार को थाने में उसकी तबीयत बिगड़ी और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई, जबकि परिवार का आरोप है कि कस्टडी में टॉर्चर की वजह से उसकी मौत हुई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें राजेश कुमार थाने के फर्श पर बेहोश पड़ा दिख रहा है। उसे एक कम्युनिटी दावत के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद डतगंज थाने में हिरासत में लिया गया था, जिसमें दो-तीन लोग घायल हो गए थे। करीब एक मिनट के इस वीडियो में दो पुलिसकर्मी कुमार को सहारा देते और उसे पानी पिलाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा ने कहा, “राजेश को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया था। शौचालय से लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया और बाद में बदायूं जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।”
एसएसपी ने आगे कहा, “सीसीटीवी फुटेज में कुमार के साथ मारपीट की कोई घटना नहीं दिखी। एक मेडिकल पैनल ने पोस्टमार्टम किया और उसकी मौत का कारण कार्डियोजेनिक शॉक बताया। मामले की जांच चल रही है।”
स्थानीय कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर रितेश भसीन ने कहा, “राजेश को गंभीर हालत में और सांस लेने में तकलीफ के साथ यहां लाया गया था। उसकी हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसके शरीर पर बाहर से कोई चोट नहीं दिखी।”
कुमार के भाई वीरेश ने पुलिस के बयान को गलत बताया और कहा कि राजेश को दिल की कोई बीमारी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया, “राजेश को थाने ले जाया गया और रात भर वहीं रखा गया। कस्टडी में ही थाने में उसकी मौत हो गई।”
बता दें कि बीते महीने आंध्र प्रदेश में भी पुलिस कस्टडी में मौत की इसी तरह की घटना सामने आई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नेल्लोर जिले में चोरी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी।
परिवार वालों और रिश्तेदारों का आरोप है कि मनुबोलु पुलिस स्टेशन में कस्टडी के दौरान तीन दिनों तक ‘थर्ड-डिग्री टॉर्चर’ के कारण उसकी मौत हुई।
व्यक्ति को 8 जुलाई 2026 को चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। मृतक की पहचान येडुकोंडालु के रूप में हुई है, जो जिले के मनुबोलु मंडल के चेरुकुमुडी गांव का रहने वाला था।
पूर्व मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के जिला अध्यक्ष काकानी गोवर्धन रेड्डी और एमएलसी मेरिगा मुरलीधर ने येडुकोंडालु के शव को देखने के लिए गुडूर सरकारी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने परिवार वालों को सांत्वना दी, उन्हें हिम्मत बंधाई और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
पूर्व मंत्री ने दावा किया, “पुलिस ने तीन दिनों तक उसकी पिटाई की और आखिरकार 12 जुलाई को उसे छोड़ दिया, जब उसके परिवार वालों ने सब-इंस्पेक्टर (एसआई) हनीफ के पैर पकड़कर रोना-धोना किया। उसे 13 जुलाई (सोमवार) तक स्टेशन पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। दर्द बर्दाश्त न कर पाने के कारण वह स्टेशन नहीं जा सका। 14 जुलाई को पुलिस एक प्राइवेट कार में उसके गांव गई और उसे जबरदस्ती खींचकर स्टेशन ले गई।”
वाईएसआरसीपी नेता ने आरोप लगाया, “येडुकोंडालु बेहोश हो गए थे और स्टेशन पर कार से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय, पुलिस उन्हें दोपहर 3:30 बजे से शाम 6 बजे तक बाहर घुमाती रही। जब उन्हें गुडूर सरकारी अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने पुष्टि की कि अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। जब हमने उनका शव देखा, तो उनकी गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें पाईं।”
उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति की मौत पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में होती है, तो इसे निश्चित रूप से कस्टोडियल डेथ माना जाना चाहिए।”
पुलिस का जवाब
इस बीच, हिरासत में मौत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) अजिता वेजेंडला ने कहा, “मनुबोलु पुलिस स्टेशन के मामले को लेकर चल रही सभी रिपोर्टें झूठी हैं। रियाज, येडुकोंडालु और प्रसाद की पहचान चेन-स्नैचिंग की घटना में शामिल लोगों के रूप में की गई थी। धारा 41 का नोटिस देने के बाद, उनसे कानून के अनुसार पूछताछ की गई।”
उन्होंने बताया, “पुलिस को पता चला कि येडुकोंडालु ने खेती में इस्तेमाल होने वाली 25 मोटरें भी चुराई थीं। पुलिस स्टेशन में उनके बेहोश होने की जानकारी मिलने पर, अधिकारियों ने उन्हें बचाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। मामले की जांच अभी चल रही है।”
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प्रतीकात्मक तस्वीर, न्यूज18
बदायूं में पुलिस कस्टडी में एक 28 वर्षीय दलित व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस का दावा है कि शनिवार को थाने में उसकी तबीयत बिगड़ी और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई, जबकि परिवार का आरोप है कि कस्टडी में टॉर्चर की वजह से उसकी मौत हुई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें राजेश कुमार थाने के फर्श पर बेहोश पड़ा दिख रहा है। उसे एक कम्युनिटी दावत के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद डतगंज थाने में हिरासत में लिया गया था, जिसमें दो-तीन लोग घायल हो गए थे। करीब एक मिनट के इस वीडियो में दो पुलिसकर्मी कुमार को सहारा देते और उसे पानी पिलाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा ने कहा, “राजेश को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया था। शौचालय से लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ा। उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया और बाद में बदायूं जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।”
एसएसपी ने आगे कहा, “सीसीटीवी फुटेज में कुमार के साथ मारपीट की कोई घटना नहीं दिखी। एक मेडिकल पैनल ने पोस्टमार्टम किया और उसकी मौत का कारण कार्डियोजेनिक शॉक बताया। मामले की जांच चल रही है।”
स्थानीय कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर रितेश भसीन ने कहा, “राजेश को गंभीर हालत में और सांस लेने में तकलीफ के साथ यहां लाया गया था। उसकी हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसके शरीर पर बाहर से कोई चोट नहीं दिखी।”
कुमार के भाई वीरेश ने पुलिस के बयान को गलत बताया और कहा कि राजेश को दिल की कोई बीमारी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया, “राजेश को थाने ले जाया गया और रात भर वहीं रखा गया। कस्टडी में ही थाने में उसकी मौत हो गई।”
बता दें कि बीते महीने आंध्र प्रदेश में भी पुलिस कस्टडी में मौत की इसी तरह की घटना सामने आई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नेल्लोर जिले में चोरी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी।
परिवार वालों और रिश्तेदारों का आरोप है कि मनुबोलु पुलिस स्टेशन में कस्टडी के दौरान तीन दिनों तक ‘थर्ड-डिग्री टॉर्चर’ के कारण उसकी मौत हुई।
व्यक्ति को 8 जुलाई 2026 को चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। मृतक की पहचान येडुकोंडालु के रूप में हुई है, जो जिले के मनुबोलु मंडल के चेरुकुमुडी गांव का रहने वाला था।
पूर्व मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के जिला अध्यक्ष काकानी गोवर्धन रेड्डी और एमएलसी मेरिगा मुरलीधर ने येडुकोंडालु के शव को देखने के लिए गुडूर सरकारी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने परिवार वालों को सांत्वना दी, उन्हें हिम्मत बंधाई और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
पूर्व मंत्री ने दावा किया, “पुलिस ने तीन दिनों तक उसकी पिटाई की और आखिरकार 12 जुलाई को उसे छोड़ दिया, जब उसके परिवार वालों ने सब-इंस्पेक्टर (एसआई) हनीफ के पैर पकड़कर रोना-धोना किया। उसे 13 जुलाई (सोमवार) तक स्टेशन पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। दर्द बर्दाश्त न कर पाने के कारण वह स्टेशन नहीं जा सका। 14 जुलाई को पुलिस एक प्राइवेट कार में उसके गांव गई और उसे जबरदस्ती खींचकर स्टेशन ले गई।”
वाईएसआरसीपी नेता ने आरोप लगाया, “येडुकोंडालु बेहोश हो गए थे और स्टेशन पर कार से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय, पुलिस उन्हें दोपहर 3:30 बजे से शाम 6 बजे तक बाहर घुमाती रही। जब उन्हें गुडूर सरकारी अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने पुष्टि की कि अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। जब हमने उनका शव देखा, तो उनकी गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें पाईं।”
उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति की मौत पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में होती है, तो इसे निश्चित रूप से कस्टोडियल डेथ माना जाना चाहिए।”
पुलिस का जवाब
इस बीच, हिरासत में मौत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) अजिता वेजेंडला ने कहा, “मनुबोलु पुलिस स्टेशन के मामले को लेकर चल रही सभी रिपोर्टें झूठी हैं। रियाज, येडुकोंडालु और प्रसाद की पहचान चेन-स्नैचिंग की घटना में शामिल लोगों के रूप में की गई थी। धारा 41 का नोटिस देने के बाद, उनसे कानून के अनुसार पूछताछ की गई।”
उन्होंने बताया, “पुलिस को पता चला कि येडुकोंडालु ने खेती में इस्तेमाल होने वाली 25 मोटरें भी चुराई थीं। पुलिस स्टेशन में उनके बेहोश होने की जानकारी मिलने पर, अधिकारियों ने उन्हें बचाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। मामले की जांच अभी चल रही है।”
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