MP : पन्ना में ग्रामीणों का जल-सत्याग्रह, कई घरों में घुसा पानी 

Written by sabrang india | Published on: September 29, 2026
पन्ना में लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में हालात बिगड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि मकान गिराए जाने के बावजूद अब तक मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित परिवारों ने मुआवजे के साथ सुरक्षित पुनर्वास की मांग उठाई। 


फोटो साभार : द मूकनायक

मध्य प्रदेश में मझगांय बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का जल-सत्याग्रह 15वें दिन भी जारी रहा। यह सत्याग्रह के पन्ना जिले में किया जा रहा है। लगातार बारिश और रेड अलर्ट के बीच बांध क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में हालात बिगड़ गए हैं। बहनरी, टपरियां, कुंवरपुर, मड़लिया, जुड़र, सर्रा और करिया खेत समेत आसपास के कई गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। 

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। घरों में पानी घुसने से अनाज, राशन और गृहस्थी का सामान खराब होने की बात ग्रामीणों ने कही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं मिली है। ऐसे में बिना मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास के जलस्तर बढ़ाए जाने का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।

15वें दिन भी जारी रहा जल- सत्याग्रह

जय किसान संगठन के अमित भटनागर के नेतृत्व में मझगांय बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। विरोध के तहत ग्रामीण जलमग्न क्षेत्र में रहकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। भारी बारिश और रेड अलर्ट के बीच भी आंदोलनकारी मौके पर डटे हुए हैं। 

आंदोलन के दौरान ग्रामीण अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांग केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। वे प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास के साथ-साथ हुए नुकसान का उचित आकलन भी चाहते हैं। 

मकान गिरा दिया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला -ग्रामीण

विस्थापित ग्रामीण धनीराम ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनका मकान गिरा दिया, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजे की राशि नहीं मिली है। उनका कहना है कि मकान टूटने के बाद परिवार के सामने रहने की जगह और घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की समस्या पैदा हो गई है। 

वहीं रानी रैकवार ने बताया कि उनका मकान और कुआं भी गिरा दिया गया, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों की संपत्ति का नुकसान होने से पहले उन्हें मुआवजा और पुनर्वास की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए। 

5 लाख रुपये देने का दावा

ग्रामीणों के मुताबिक, सरकार ने प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन कई परिवारों को अब तक यह राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक मुआवजे की रकम उनके बैंक खातों में नहीं पहुंचती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों की सूची और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट की जाए और पात्र परिवारों को जल्द भुगतान किया जाए।

बारिश और दूषित पानी से बिगड़ रही तबीयत

पिछले 15 दिनों से बारिश और पानी के बीच चल रहे जल-सत्याग्रह में शामिल महिलाओं और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने की बात ग्रामीणों ने कही है। उनके मुताबिक, लंबे समय तक पानी में रहने के कारण पैरों में घाव और चकत्ते पड़ने के साथ त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। 

ग्रामीणों के मुताबिक, आंदोलन स्थल पर लगातार बारिश और पानी के बीच रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आंदोलनकारियों के लिए तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। 

नुकसान का सर्वे और सुरक्षित पुनर्वास की मांग 

प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से गांवों और घरों में हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने खराब हुए अनाज और घरेलू सामान के नुकसान का आकलन करने, राहत सामग्री मुहैया कराने, लंबित मुआवजे का भुगतान करने और प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करने की भी मांग की है। 

ग्रामीणों का कहना है कि बांध परियोजना से कई परिवारों की जमीन, मकान, कुएं और आजीविका प्रभावित हुई है। उनका आरोप है कि पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए बिना उन्हें डूब क्षेत्र में रहने के लिए छोड़ना गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक जल-सत्याग्रह जारी रहेगा। 

Related

चुनाव आयोग के “सब ठीक है” वाले दावे के खिलाफ एक आरोप-पत्र

ECI के अंदर मतभेदों और बंटवारे से जुड़े गंभीर सवालों को EC ने टाल दिया और नजरअंदाज कर दिया

बाकी ख़बरें