MP: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी, नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने का आरोप

Written by sabrang india | Published on: October 12, 2026
नवरात्रि में देवी पंडालों के आसपास गंदगी से श्रद्धालु परेशान, नियमितीकरण की मांग पर अड़े सफाई कर्मचारी; नौकरी के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये वसूलने का आरोप लगा है।


फोटो साभार : द मूकनायक

मध्य प्रदेश के दतिया में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कचरा उठाने का काम बंद होने के कारण कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं। नवरात्रि के दौरान देवी पंडालों के आसपास भी गंदगी जमा होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हड़ताल खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन नौकरी के नियमितीकरण की मांग पर अड़े सफाई कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, देर रात नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढंगुला सफाई कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने और हड़ताल समाप्त कराने की कोशिश की। इस दौरान कर्मचारियों ने वेतन, नौकरी की सुरक्षा और अपनी अन्य समस्याओं को उनके सामने रखा। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर तीखी बहस भी हुई।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी पर रखने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक वसूले गए, जबकि काम के बदले उन्हें महज 6,000 रुपये वेतन दिया जा रहा है। हालांकि, नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूले जाने के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

हड़ताल के बीच देर रात नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढंगुला सफाई कर्मचारियों से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को समझाकर हड़ताल खत्म कराने की कोशिश की। इस दौरान कर्मचारियों ने वेतन, नौकरी की सुरक्षा और अपनी अन्य समस्याओं को लेकर सवाल उठाए। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर तीखी बहस भी हुई।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी पर रखने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक देने पड़े, जबकि इसके बदले उन्हें महज 6,000 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। हालांकि, नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए जाने के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

नौकरी के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप

बातचीत के दौरान सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नौकरी पर रखने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली गई। कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक दिए, इसके बावजूद उन्हें महज मामूली वेतन पर काम करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जब उनसे नियमित रूप से काम लिया जा रहा है, तो उन्हें उचित वेतन और नौकरी की सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही है।

इन आरोपों के सामने आने के बाद नगर पालिका की सफाई व्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, आरोपों की सत्यता की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, भुगतान के साक्ष्यों और नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है। 

रोजाना 8 घंटे काम, फिर भी उचित वेतन और सुरक्षा नहीं

हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनसे रोजाना करीब आठ-आठ घंटे काम कराया जाता है, लेकिन इसके बदले उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं मिलता। इतना ही नहीं, नौकरी की निरंतरता को लेकर भी उनके मन में अनिश्चितता बनी रहती है।

कर्मचारियों का कहना है कि सफाई जैसे आवश्यक कार्य में लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी का भरोसा नहीं मिल रहा है। कम वेतन के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होने से उन्हें अपने भविष्य को लेकर भी लगातार चिंता बनी रहती है। 

इन्हीं समस्याओं के चलते सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब उनसे लगातार काम लिया जा रहा है, तो उनकी नौकरी को स्थायी बनाने और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। 

रिक्त पदों पर नियमित करने की मांग

सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि नगर पालिका में रिक्त पदों पर उनकी नियमित नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि महज आश्वासन देने से उनकी समस्याएं दूर नहीं होंगी। कर्मचारियों की मांग है कि नियमितीकरण को लेकर ठोस फैसला लिया जाए, ताकि उन्हें स्थायी रोजगार और नौकरी की सुरक्षा मिल सके। 

सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक नियमितीकरण की उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। कर्मचारियों के इस रुख से नगर पालिका प्रशासन के सामने शहर की सफाई व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती और बढ़ गई है।

कर्मचारियों के रुख से स्पष्ट है कि यह विवाद अब केवल कचरा उठाने या ठेका व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। रोजगार की स्थिरता, उचित वेतन और कामकाज की शर्तें भी इस विवाद के प्रमुख मुद्दे बन गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल खत्म कराने के लिए कर्मचारियों से बातचीत करने पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढंगुला ने सफाई व्यवस्था को पूरी तरह ठेके पर दिए जाने की बात से इनकार किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर पालिका ने केवल घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने का काम ठेके पर दिया है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद कर्मचारियों को हटाना नहीं है और इससे किसी की नौकरी पर असर नहीं पड़ेगा। 

प्रशांत ढंगुला ने कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की कि ठेका व्यवस्था लागू होने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कर्मचारियों को काम से बाहर कर दिया जाएगा। हालांकि, बातचीत के बावजूद कर्मचारी अपनी नियमितीकरण की मांग पर अड़े रहे।

कर्मचारियों का कहना है कि ठेका व्यवस्था लागू करने से पहले उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका आग्रह है कि रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही ठेका व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए। 

ठेका व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की आशंकाएं

सफाई कर्मचारियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह ठेका व्यवस्था को लेकर उनकी आशंकाएं भी हैं। उन्हें डर है कि इस व्यवस्था में बदलाव से उनकी नौकरी की सुरक्षा, वेतन और कामकाज की शर्तें प्रभावित हो सकती हैं।

वहीं, प्रशांत ढंगुला ने कर्मचारियों की आशंकाएं दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि ठेके पर केवल घर-घर कचरा संग्रहण का काम दिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों को हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। 

ऐसे में विवाद का समाधान निकालने के लिए नगर पालिका प्रशासन को ठेका व्यवस्था, कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति और नियमितीकरण की मांग पर स्पष्ट रुख सामने रखना होगा। इससे कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर करने और हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में रास्ता निकल सकता है। 

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