एसआईआर के बाद आजमगढ़ जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 33,62,770 है। इनमें 18,29,710 पुरुष, 15,33,011 महिलाएं एवं 49 अन्य श्रेणी के मतदाता हैं। 6 जनवरी की ड्राफ्ट सूची में 31,47,652 मतदाता थे।

साभार : द हिंदू
विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन तो कर दिया गया, लेकिन इसमें बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र कुरेशिया इंटर कॉलेज से जुड़ी सूची के भाग संख्या 155 व 156 में फिरोज के मकान में विकास और सलमान के मकान में अनितमा, पुत्री प्रशांत कुमार तिवारी का पता दर्ज है। मुस्लिम मतदाताओं के घरों में हिंदू मतदाताओं का पता दर्ज होने पर विपक्ष एसआईआर पर सवाल उठा रहा है।
एसआईआर के बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 33,62,770 है। इनमें 18,29,710 पुरुष, 15,33,011 महिलाएं एवं 49 अन्य श्रेणी के मतदाता हैं। 6 जनवरी की ड्राफ्ट सूची में 31,47,652 मतदाता थे।
इस प्रक्रिया के तहत 27 अक्टूबर 2025 से 6 मार्च तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की गईं।
फॉर्म-6 के अंतर्गत 2,36,751 आवेदन मिले, जिनमें से 2,31,303 दावे और आपत्तियां स्वीकृत की गईं। वहीं, फॉर्म-7 के माध्यम से 19,984 नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
फॉर्म-8 के तहत 57,115 संशोधन स्वीकार किए गए। पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 7,68,547 नोटिस जारी कर सुनवाई की गई।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि यह एसआईआर नहीं, बल्कि लोगों को गुमराह करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर जिस तरीके से होना चाहिए था, उस तरह से नहीं हुआ। भाजपा ने चुनावी राज्यों में जीत हासिल करने के लिए इसे आनन-फानन में शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर की संविधान में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है और गलत रिपोर्ट के आधार पर नाम जोड़े और हटाए गए हैं।
सदर के ईआरओ नरेंद्र कुमार गंगवार ने कहा, “मकान नंबर का मुद्दा काफी समय से चला आ रहा है। कई लोगों के मकान नंबर गलत हैं, इसी कारण ऐसी स्थिति बनी है। यदि किसी को समस्या है, तो उसे ठीक कराया जाएगा।”
वहीं, बुंदेलखंड के बांदा जिले में भी मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। अलीगंज ईस्ट की रहने वाली 33 वर्षीय रानी सिंह का नाम अंतिम वोटर सूची में पांच बार दर्ज पाया गया है। संशोधित सूची के अनुसार, उन्हें एक ही इलाके के पांच अलग-अलग घरों का निवासी दिखाया गया है।
द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा से जुड़े खान ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस गलती को सुधारने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन उनकी अर्जी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का इस्तेमाल गैर-बीजेपी वोटरों के नाम हटाने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका पता जानबूझकर बदल दिया गया, जिससे उनके मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।
खान ने यह भी दावा किया कि उनके परिवार के कई सदस्यों के पते भी गलत दर्ज हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग चुनाव आयोग के खिलाफ बोलने से डरते हैं।
बांदा जिले में करीब 1.19 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की बात सामने आई है। बबेरू विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विश्वंभर सिंह यादव ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र से 32,299 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो अधिकतर उनके समर्थक थे। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने कहा कि अंतिम सूची एक सप्ताह तक बूथ स्तर पर उपलब्ध रही और जिन लोगों को कोई आपत्ति है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील कर सकते हैं।
ऐसी ही शिकायतें बागपत, अलीगढ़ और इलाहाबाद से भी सामने आई हैं। मतदाता सूची के प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर (25 अप्रैल तक) आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जबकि इसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष अपील के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि SIR का उद्देश्य मतदाताओं को जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें हटाना था। उन्होंने दावा किया कि कन्नौज सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हटाए गए, जबकि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें वापस नहीं जोड़ा गया।
राज्य स्तर पर देखें तो उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 2 करोड़ से अधिक नाम, यानी कुल मतदाताओं का लगभग 13.24 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं।
वाराणसी जिले में भी अंतिम मतदाता सूची के आंकड़ों में बड़ी कमी दर्ज की गई है। नई सूची के अनुसार, जिले में कुल 27,30,603 मतदाता हैं, जो पिछली सूची से 4,23,102 कम हैं। पहले यह संख्या 31,53,705 थी। हालांकि, ड्राफ्ट सूची में एक समय 1,50,101 मतदाताओं की वृद्धि भी दर्ज की गई थी।
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 1,94,239 नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 44,138 नाम हटाए गए। 6 जनवरी से 6 मार्च के बीच प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 मार्च तक पूरा कर लिया गया।
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें अंतिम सूची की प्रतियां सौंपीं। इस प्रक्रिया के तहत 4 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच बीएलओ ने घर-घर जाकर फॉर्म वितरित और एकत्र किए थे। 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में कुल 25,80,502 मतदाता दर्ज थे।
बैठक में विभिन्न अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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साभार : द हिंदू
विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन तो कर दिया गया, लेकिन इसमें बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र कुरेशिया इंटर कॉलेज से जुड़ी सूची के भाग संख्या 155 व 156 में फिरोज के मकान में विकास और सलमान के मकान में अनितमा, पुत्री प्रशांत कुमार तिवारी का पता दर्ज है। मुस्लिम मतदाताओं के घरों में हिंदू मतदाताओं का पता दर्ज होने पर विपक्ष एसआईआर पर सवाल उठा रहा है।
एसआईआर के बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 33,62,770 है। इनमें 18,29,710 पुरुष, 15,33,011 महिलाएं एवं 49 अन्य श्रेणी के मतदाता हैं। 6 जनवरी की ड्राफ्ट सूची में 31,47,652 मतदाता थे।
इस प्रक्रिया के तहत 27 अक्टूबर 2025 से 6 मार्च तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की गईं।
फॉर्म-6 के अंतर्गत 2,36,751 आवेदन मिले, जिनमें से 2,31,303 दावे और आपत्तियां स्वीकृत की गईं। वहीं, फॉर्म-7 के माध्यम से 19,984 नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
फॉर्म-8 के तहत 57,115 संशोधन स्वीकार किए गए। पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 7,68,547 नोटिस जारी कर सुनवाई की गई।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि यह एसआईआर नहीं, बल्कि लोगों को गुमराह करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर जिस तरीके से होना चाहिए था, उस तरह से नहीं हुआ। भाजपा ने चुनावी राज्यों में जीत हासिल करने के लिए इसे आनन-फानन में शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर की संविधान में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है और गलत रिपोर्ट के आधार पर नाम जोड़े और हटाए गए हैं।
सदर के ईआरओ नरेंद्र कुमार गंगवार ने कहा, “मकान नंबर का मुद्दा काफी समय से चला आ रहा है। कई लोगों के मकान नंबर गलत हैं, इसी कारण ऐसी स्थिति बनी है। यदि किसी को समस्या है, तो उसे ठीक कराया जाएगा।”
वहीं, बुंदेलखंड के बांदा जिले में भी मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। अलीगंज ईस्ट की रहने वाली 33 वर्षीय रानी सिंह का नाम अंतिम वोटर सूची में पांच बार दर्ज पाया गया है। संशोधित सूची के अनुसार, उन्हें एक ही इलाके के पांच अलग-अलग घरों का निवासी दिखाया गया है।
द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा से जुड़े खान ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस गलती को सुधारने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन उनकी अर्जी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का इस्तेमाल गैर-बीजेपी वोटरों के नाम हटाने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका पता जानबूझकर बदल दिया गया, जिससे उनके मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।
खान ने यह भी दावा किया कि उनके परिवार के कई सदस्यों के पते भी गलत दर्ज हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग चुनाव आयोग के खिलाफ बोलने से डरते हैं।
बांदा जिले में करीब 1.19 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की बात सामने आई है। बबेरू विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विश्वंभर सिंह यादव ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र से 32,299 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो अधिकतर उनके समर्थक थे। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने कहा कि अंतिम सूची एक सप्ताह तक बूथ स्तर पर उपलब्ध रही और जिन लोगों को कोई आपत्ति है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील कर सकते हैं।
ऐसी ही शिकायतें बागपत, अलीगढ़ और इलाहाबाद से भी सामने आई हैं। मतदाता सूची के प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर (25 अप्रैल तक) आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जबकि इसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष अपील के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि SIR का उद्देश्य मतदाताओं को जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें हटाना था। उन्होंने दावा किया कि कन्नौज सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हटाए गए, जबकि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें वापस नहीं जोड़ा गया।
राज्य स्तर पर देखें तो उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 2 करोड़ से अधिक नाम, यानी कुल मतदाताओं का लगभग 13.24 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं।
वाराणसी जिले में भी अंतिम मतदाता सूची के आंकड़ों में बड़ी कमी दर्ज की गई है। नई सूची के अनुसार, जिले में कुल 27,30,603 मतदाता हैं, जो पिछली सूची से 4,23,102 कम हैं। पहले यह संख्या 31,53,705 थी। हालांकि, ड्राफ्ट सूची में एक समय 1,50,101 मतदाताओं की वृद्धि भी दर्ज की गई थी।
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 1,94,239 नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 44,138 नाम हटाए गए। 6 जनवरी से 6 मार्च के बीच प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 मार्च तक पूरा कर लिया गया।
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें अंतिम सूची की प्रतियां सौंपीं। इस प्रक्रिया के तहत 4 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच बीएलओ ने घर-घर जाकर फॉर्म वितरित और एकत्र किए थे। 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में कुल 25,80,502 मतदाता दर्ज थे।
बैठक में विभिन्न अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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