‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और बाधा डालने को दंडनीय बनाने के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी

Written by sabrang india | Published on: May 7, 2026
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए प्रस्तावित संशोधन के संसद से पारित होने के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने, अशांति फैलाने या अनादरपूर्ण व्यवहार करने पर जुर्माना और अधिकतम तीन वर्ष तक की कारावास की सजा का प्रावधान लागू हो सकता है। यह व्यवस्था राष्ट्रगान से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों के समान होगी।


फोटो साभार : आजतक

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया जाएगा। साथ ही, इसे ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ के दायरे में शामिल किए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

संसद द्वारा प्रस्तावित संशोधन पारित होने के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने, अशांति फैलाने या अनादरपूर्ण व्यवहार करने पर जुर्माना और अधिकतम तीन वर्ष तक की कारावास की सजा का प्रावधान हो सकता है। यह व्यवस्था राष्ट्रगान से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों के समान होगी।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय गृह मंत्रालय के उस आदेश के कुछ महीनों बाद आया है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को आधिकारिक कार्यक्रमों में बजाने का निर्देश दिया गया था। 28 जनवरी को जारी इस आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों एक साथ प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ बजाया जाए और श्रोताओं को पूरे समय सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्तावित संशोधन का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मोदी सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम’ को लेकर आयोजित किए जा रहे वर्षभर के समारोहों के साथ मेल खाता है। साथ ही, यह कदम भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल में मिली ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद सामने आया है।

वर्ष 1971 का यह कानून देश के राष्ट्रीय प्रतीकों — जैसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक-चिह्न, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय आदर्श वाक्य, संविधान और भारत के मानचित्र — के अपमान या अनादर को लेकर सख्त प्रावधान निर्धारित करता है। इन नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसमें राष्ट्रगान के दौरान उपस्थित सभी लोगों का सावधान की मुद्रा में खड़ा होना भी शामिल है। अब प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से इसी प्रकार के प्रावधान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर भी लागू करने की तैयारी की जा रही है।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी के उत्तरार्ध में संस्कृत और बंगाली मिश्रित भाषा में ‘वंदे मातरम’ की रचना की थी। मूल रूप से इस गीत में छह छंद शामिल थे। यह गीत पहली बार उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में प्रकाशित हुआ था। उपन्यास की कहानी 18वीं सदी के उत्तरार्ध के उस दौर पर आधारित है, जब बंगाल अकाल और विद्रोह जैसी घटनाओं से जूझ रहा था और व्यापक तबाही का सामना कर रहा था।

वर्ष 1950 में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान घोषित किए जाने के साथ ही ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का सम्मान प्रदान किया गया था। यह निर्णय संविधान सभा द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मार्गदर्शन में लिया गया था। इस फैसले में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक भूमिका और उसके प्रेरणास्रोत स्वरूप को विशेष महत्व दिया गया था।

हालांकि, ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंदों को ही आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया था। राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के विपरीत, अब तक ‘वंदे मातरम’ के गायन या प्रस्तुति को लेकर कोई औपचारिक प्रोटोकॉल निर्धारित नहीं किया गया था।

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