कर्नाटक में 48 हजार आदिवासी परिवारों पर संकट: पोषण किट और रुकी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना

Written by sabrang india | Published on: July 31, 2026
मैसूरु में पिछले छह महीनों से पोषण किट और सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित करीब 48 हजार आदिवासी परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।


साभार : द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

मैसूरु जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आदिवासी परिवारों ने मंगलवार को मैसूरु के उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि आदिवासी परिवारों को दी जाने वाली पौष्टिक भोजन किट का वितरण तत्काल दोबारा शुरू किया जाए।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा मैसूरु, चामराजनगर और कोडागु जिलों के लगभग 48,000 आदिवासी परिवारों को पोषण किट प्रदान की जाती है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय जन अधिकार सुरक्षा समिति (ABJASS) के सुनील का आरोप है कि जनवरी 2026 के बाद से पिछले छह महीनों से इस किट का वितरण नहीं किया गया है।

धरने पर बैठे लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें फरवरी से जुलाई तक लगातार छह महीनों की पोषण किट नहीं मिली है। उनका आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद अब तक वितरण शुरू नहीं किया गया। वहीं, सरकार ने इस देरी के लिए टेंडर प्रक्रिया में आई तकनीकी समस्याओं को जिम्मेदार बताया है।

हालांकि, समिति के अनुसार, अधिकारियों ने मई और जून में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान आश्वासन दिया था कि 10 दिनों के भीतर इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। सुनील ने चिंता जताते हुए कहा कि अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पोषण किट का वितरण जल्द शुरू नहीं किया गया, तो आदिवासी समुदायों में कुपोषण से निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वपूर्ण योजना का मकसद ही अधूरा रह जाएगा। समिति ने सरकार से टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाते हुए पोषण किट का वितरण तत्काल बहाल करने की मांग की है।

धरने पर बैठे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पोषण किट का वितरण शीघ्र बहाल नहीं किया गया, तो आदिवासी समुदायों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए शुरू की गई इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। समिति ने सरकार से टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द से जल्द इसे पूरा करने और पोषण किट का वितरण तत्काल शुरू करने की मांग की है।

संगठन की मांग है कि जब तक टेंडर फाइनल नहीं हो जाता, तब तक जिला प्रशासन अस्थायी तौर पर इन फूड किट्स की खरीद कर उनका वितरण सुनिश्चित करे।

पहले ये किट हर 45 दिनों में दी जाती थीं, लेकिन आदिवासियों की कठिनाइयों और लगातार आंदोलन के बाद सरकार ने तीन साल पहले इन्हें हर महीने वितरित करने का फैसला किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, सुनील ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकार के इस महत्वपूर्ण फैसले का लाभ अब तक वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पड़े भीषण सूखे ने हालात को और गंभीर बना दिया है, जिसके चलते कई आदिवासी परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

पोषण किट का वितरण बंद होने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़ी नई समस्याओं ने भी आदिवासी समुदाय की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार ने वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं के पात्रता मानदंडों में बदलाव किया है, लेकिन इन नए नियमों की पर्याप्त जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचाई गई है।

समिति का दावा है कि पेंशन पात्रता के लिए वार्षिक आय सीमा घटाकर 32,000 रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही लाभार्थियों को 31 जुलाई, 2026 तक नए आय प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया गया है।

सुनील ने बताया कि राजस्व विभाग के अधिकारी फिलहाल एसआईआर से जुड़े कार्यों में व्यस्त हैं, जिसके चलते सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर उन्हें पोषण किट नहीं मिल रही है, तो दूसरी ओर सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी बाधित हो गई है।

समिति ने अधिकारियों से बिना किसी और देरी के लंबित पोषण किट एक साथ वितरित करने की अपील की है। इसके साथ ही पिछले चार से पांच महीनों से रुकी हुई वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन भी जल्द जारी करने की मांग की गई है।

सुनील ने कहा कि राजस्व विभाग के अधिकारी एसआईआर से जुड़े कार्यों में व्यस्त हैं, इसलिए दस्तावेजों के सत्यापन की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 से आगे बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार पुराने नियमों के तहत सभी पात्र बीपीएल लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान जारी रखे।

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