"सरकार की लगातार उदासीनता और वास्तविक आंकड़ों को छुपाने की उसकी कोशिश के खिलाफ ये प्रदर्शन किया जा रहा है।"

न्यूजक्लिक, फाइल फोटो
सफाई कर्मचारी आंदोलन देश भर में सीवर व सेप्टिक टैंकों में हो रही मौतों को लेकर मंगलवार 4 अगस्त को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए संगठन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि सरकार की लगातार उदासीनता और वास्तविक आंकड़ों को छुपाने की उसकी कोशिश के खिलाफ ये प्रदर्शन किया जा रहा है।
उन्होंने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि इस संबंध में हम निम्न बिंदुओं को उठाना चाहते हैं:
● जनवरी 2021 से लेकर आज तक देशभर में कुल 593 लोग सीवर व सेप्टिक टैंकों में मारे गए हैं। लेकिन सरकार ने संसद के सामने केवल 332 मौतों की बात स्वीकार की है।
● सरकार शेष 261 मौतों के आंकड़े क्यों छुपा रही है।
● हमारे आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में 47 मौतें, 2022 में 93, 2023 में 102, 2024 में 117 और 2025 में 121 मौतें सीवर व सेप्टिक टैंकों में हुई हैं।
● इस साल 2026 के पहले सात महीनों में 113 लोगों की मौत सीवर व सेप्टिक टैंकों में हुई जिनमें से केवल जुलाई 2026 में ही 15 लोग मारे गये हैं।
संगठन ने आगे कहा कि, "आंकड़ों को छुपाने की सरकार की कोशिश आपराधिक और निहायत शर्मनाक है। वह देश को इस भ्रम में भी डालने की भी कोशिश कर रही हैं कि मैनुअल स्कैवेंजिंग से होने वाली मौतें दरअसल काम की जगहों के हादसे हैं। यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है कि इस तरह की मौतों को रोकने के बजाय सरकार का सारा ध्यान आंकड़ों की अशलियत को छुपाने पर है।"
सफाई कर्मचारी आंदोलन इसी को लेकर सीवर व सेप्टिक टैंकों में काम करने वाली महिलाएं, युवा व अन्य कर्मचारी और मारे गए लोगों के परिजन 4 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर मांग करेंगे कि प्रधानमंत्री इन मौतों की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करें और इनकी जांच का काम एक संसदीय स्थानीय समिति को सौंपें। सरकार को सीवर व सेप्टिक टैंकों की मौतों को तत्काल रोकने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना पेश करनी चाहिए।
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न्यूजक्लिक, फाइल फोटो
सफाई कर्मचारी आंदोलन देश भर में सीवर व सेप्टिक टैंकों में हो रही मौतों को लेकर मंगलवार 4 अगस्त को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए संगठन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि सरकार की लगातार उदासीनता और वास्तविक आंकड़ों को छुपाने की उसकी कोशिश के खिलाफ ये प्रदर्शन किया जा रहा है।
उन्होंने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि इस संबंध में हम निम्न बिंदुओं को उठाना चाहते हैं:
● जनवरी 2021 से लेकर आज तक देशभर में कुल 593 लोग सीवर व सेप्टिक टैंकों में मारे गए हैं। लेकिन सरकार ने संसद के सामने केवल 332 मौतों की बात स्वीकार की है।
● सरकार शेष 261 मौतों के आंकड़े क्यों छुपा रही है।
● हमारे आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में 47 मौतें, 2022 में 93, 2023 में 102, 2024 में 117 और 2025 में 121 मौतें सीवर व सेप्टिक टैंकों में हुई हैं।
● इस साल 2026 के पहले सात महीनों में 113 लोगों की मौत सीवर व सेप्टिक टैंकों में हुई जिनमें से केवल जुलाई 2026 में ही 15 लोग मारे गये हैं।
संगठन ने आगे कहा कि, "आंकड़ों को छुपाने की सरकार की कोशिश आपराधिक और निहायत शर्मनाक है। वह देश को इस भ्रम में भी डालने की भी कोशिश कर रही हैं कि मैनुअल स्कैवेंजिंग से होने वाली मौतें दरअसल काम की जगहों के हादसे हैं। यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है कि इस तरह की मौतों को रोकने के बजाय सरकार का सारा ध्यान आंकड़ों की अशलियत को छुपाने पर है।"
सफाई कर्मचारी आंदोलन इसी को लेकर सीवर व सेप्टिक टैंकों में काम करने वाली महिलाएं, युवा व अन्य कर्मचारी और मारे गए लोगों के परिजन 4 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर मांग करेंगे कि प्रधानमंत्री इन मौतों की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करें और इनकी जांच का काम एक संसदीय स्थानीय समिति को सौंपें। सरकार को सीवर व सेप्टिक टैंकों की मौतों को तत्काल रोकने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना पेश करनी चाहिए।
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