गुजरात: सवर्णों के उत्पीड़न और भेदभाव से परेशान 1500 दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म

Written by sabrang india | Published on: October 28, 2019
गुजरात के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले 1500 दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। शाहीबाग स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल मेमोरियल में रविवार (27 अक्टूबर) को हुए इस कार्यक्रम का आयोजन बुद्ध लाइट इंटरनेशनल असोसिएशन (BLIA) की गुजरात इकाई की ओर से किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएलआईए के धार्मिक प्रमुख और ताइवान के बौद्ध भिक्षु हसीन बाऊ ने की।



देश-विदेश के बौद्ध भिक्षुओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान लोगों ने पहले बीएलआईए में रजिस्ट्रेशन कराया और उसके बाद बौद्ध धर्म का पालन करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम के दौरान बीएलआईए की गुजरात यूनिट के पूर्व अध्यक्ष और दासादा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक नौशाद सोलंकी और बीजेपी के पूर्व सांसद रतिलाल वर्मा भी मौजूद थे।

बीएलआईए के गुजरात अध्यक्ष तुषार श्रीपाल ने बताया कि करीब 1400 लोगों ने इस कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। वहीं, बीएलआईए गुजरात के वरिष्ठ सलाहकार सोलंकी के मुताबिक, 1400 लोगों के अलावा कार्यक्रम में ऐसे काफी लोग मौजूद थे, जिन्होंने पहली बार बौद्ध धर्म का पालन करने का संकल्प लिया।

बौद्ध धर्म अपनाने की वजह भी बताई: सौराष्ट्र के सुरेंद्रनगर में रहने वाली मंजुला मकवाना ने बताया, ‘‘मैंने इस कार्यक्रम में अपने पति घनश्याम मकवाना और 3 बच्चों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया। बौद्ध धर्म को अपनाने का एकमात्र कारण समानता है। बतौर हिंदू हमें समानता का अधिकार नहीं दिया जा रहा था। अनुसूचित लोगों (दलितों) के खिलाफ भेदभाव व अत्याचार के काफी मामले हम देख चुके हैं। सुरेंद्रनगर इसके लिए कुख्यात है।’’

एक ही परिवार के 25 लोगों ने बदला धर्म: अहमदाबाद के नरोदा में रहने वाले निसर्ग परमार पेशे से इंजीनियर हैं। साथ ही, वह बीबीए का कोर्स भी कर रहे है। इस कार्यक्रम में बौद्ध धर्म अपनाने वाले वह दूसरे दलित शख्स हैं। निसर्ग के परिवार के करीब 25 लोगों ने इस कार्यक्रम में बौद्ध धर्म अपनाया।

जातिवाद से रुक रहा देश का विकास: परमार ने बौद्ध धर्म अपनाने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। उन्होंने बताया, ‘‘हम हिंदू धर्म का पालन करते थे, लेकिन हमें इसमें मौजूद भेदभाव पसंद नहीं है। बौद्ध धर्म समानता का संदेश देता है। ऐसे में हमने आज बौद्ध धर्म का पालन करने का संकल्प लिया। मैं चाहता हूं कि भारत पूरी दुनिया में सबसे अच्छा देश बने, लेकिन जातिवाद इस रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है, जिसमें लोगों के साथ भेदभाव होता है।’’

बाकी ख़बरें