RSS नेता मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के लिए जाने जाते हैं। दक्षिण कन्नड़ जिले में ही उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता कल्लाडका प्रभाकर भट, जिन पर दक्षिण कन्नड़ जिले में हेट स्पीच (नफरती भाषण) के कई मामले दर्ज हैं, ने कर्नाटक हाई कोर्ट को लिखित आश्वासन दिया है कि वे भविष्य में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभाकर भट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने मंगलवार, 2 जून को हाई कोर्ट के समक्ष यह आश्वासन दिया। यह सुनवाई ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन की ईश्वरी पद्मंजा द्वारा भट के खिलाफ दायर एक मामले में हो रही थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि केरल के कासरगोड जिले के उप्पला में आयोजित एक दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान भट ने मुस्लिम महिलाओं की तुलना सूअरों से करते हुए कहा था कि वे "सूअर के बच्चों की तरह बच्चे पैदा करती हैं।"
एफआईआर रद्द करवाने की मांग को लेकर भट ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मामले में स्टे ऑर्डर (रोक का आदेश) हासिल कर लिया था।
जब 2 जून को मामले की सुनवाई हुई, तो शिकायतकर्ता ईश्वरी पद्मंजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस. बालन ने एक आवेदन दाखिल कर स्टे ऑर्डर हटाने की मांग की।
बालन ने कोर्ट से कहा, "कल्लाडका प्रभाकर भट एक विशेष समुदाय के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं। यह भाईचारे की भावना के खिलाफ एक गंभीर कृत्य है। जिस समुदाय ने वर्षों से सौहार्दपूर्ण माहौल में जीवन बिताया है, उसे निशाना बनाया जा रहा है। कोर्ट उन्हें जमानत और स्टे ऑर्डर देता है, लेकिन वे इन कानूनी राहतों का इस्तेमाल और अधिक अपराध करने के लिए करते हैं। स्टे हटाने की अपनी अर्जी में हमने प्रभाकर भट के खिलाफ दर्ज 12 एफआईआर की सूची भी पेश की है।"
भट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने दलील दी कि भट 83 वर्ष के हैं, इसलिए स्टे ऑर्डर को हटाया नहीं जाना चाहिए।
जब बालन ने कोर्ट में भट के भाषण के कुछ अंश पढ़कर सुनाने की कोशिश की, तो न्यायाधीशों ने उन्हें ऐसा करने से पहले अपना माइक्रोफ़ोन बंद करने का निर्देश दिया। बालन ने आगे तर्क दिया कि भट लगातार ऐसे बेहद आपत्तिजनक और ज़हरीले भाषण दे रहे हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से सुनना भी उचित नहीं है।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने निर्देश दिया कि भट के खिलाफ पहले से दर्ज सभी मामलों को इस मौजूदा याचिका के साथ संलग्न किया जाए।
बालन ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि स्टे हटाने की अर्जी पर फैसला होने तक कल्लाडका प्रभाकर भट को हेट स्पीच देने से रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया जाए। इस पर भट का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण श्याम ने पीठ को आश्वस्त किया कि "कल्लाडका प्रभाकर भट अब से कोई हेट स्पीच नहीं देंगे।"
यह मामला, प्रभाकर भट के खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों के साथ, आगे की सुनवाई के लिए 16 जून को सूचीबद्ध किया गया है।
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द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभाकर भट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने मंगलवार, 2 जून को हाई कोर्ट के समक्ष यह आश्वासन दिया। यह सुनवाई ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन की ईश्वरी पद्मंजा द्वारा भट के खिलाफ दायर एक मामले में हो रही थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि केरल के कासरगोड जिले के उप्पला में आयोजित एक दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान भट ने मुस्लिम महिलाओं की तुलना सूअरों से करते हुए कहा था कि वे "सूअर के बच्चों की तरह बच्चे पैदा करती हैं।"
एफआईआर रद्द करवाने की मांग को लेकर भट ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मामले में स्टे ऑर्डर (रोक का आदेश) हासिल कर लिया था।
जब 2 जून को मामले की सुनवाई हुई, तो शिकायतकर्ता ईश्वरी पद्मंजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस. बालन ने एक आवेदन दाखिल कर स्टे ऑर्डर हटाने की मांग की।
बालन ने कोर्ट से कहा, "कल्लाडका प्रभाकर भट एक विशेष समुदाय के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं। यह भाईचारे की भावना के खिलाफ एक गंभीर कृत्य है। जिस समुदाय ने वर्षों से सौहार्दपूर्ण माहौल में जीवन बिताया है, उसे निशाना बनाया जा रहा है। कोर्ट उन्हें जमानत और स्टे ऑर्डर देता है, लेकिन वे इन कानूनी राहतों का इस्तेमाल और अधिक अपराध करने के लिए करते हैं। स्टे हटाने की अपनी अर्जी में हमने प्रभाकर भट के खिलाफ दर्ज 12 एफआईआर की सूची भी पेश की है।"
भट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने दलील दी कि भट 83 वर्ष के हैं, इसलिए स्टे ऑर्डर को हटाया नहीं जाना चाहिए।
जब बालन ने कोर्ट में भट के भाषण के कुछ अंश पढ़कर सुनाने की कोशिश की, तो न्यायाधीशों ने उन्हें ऐसा करने से पहले अपना माइक्रोफ़ोन बंद करने का निर्देश दिया। बालन ने आगे तर्क दिया कि भट लगातार ऐसे बेहद आपत्तिजनक और ज़हरीले भाषण दे रहे हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से सुनना भी उचित नहीं है।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने निर्देश दिया कि भट के खिलाफ पहले से दर्ज सभी मामलों को इस मौजूदा याचिका के साथ संलग्न किया जाए।
बालन ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि स्टे हटाने की अर्जी पर फैसला होने तक कल्लाडका प्रभाकर भट को हेट स्पीच देने से रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया जाए। इस पर भट का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण श्याम ने पीठ को आश्वस्त किया कि "कल्लाडका प्रभाकर भट अब से कोई हेट स्पीच नहीं देंगे।"
यह मामला, प्रभाकर भट के खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों के साथ, आगे की सुनवाई के लिए 16 जून को सूचीबद्ध किया गया है।
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