“हम CBI को निर्देश देते हैं कि वह लड़की की मौत से जुड़े हालात की शुरुआती जांच करे।”

फोटो साभार : फ्रंटलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBI को निर्देश दिया कि वह 2024 में मध्य प्रदेश के सागर जिले में 20 वर्षीय एक दलित महिला की मौत से जुड़े हालात की शुरुआती जांच करे। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है, और कहा कि सच सामने आना ही चाहिए।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि उनका अंतर्मन उन्हें राज्य सरकार की दलील स्वीकार करने की अनुमति नहीं देता। इसलिए उन्होंने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने FIR दर्ज करने का फैसला CBI पर छोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल महिला की मां द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें परिवार के तीन सदस्यों की मौत की CBI या SIT से जांच कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम CBI को निर्देश देते हैं कि वह लड़की की मौत से जुड़े हालात की शुरुआती जांच करे।”
लॉ चक्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले ने गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, क्योंकि याचिका में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के एक करीबी सहयोगी इन हत्याओं में शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 2025 में मध्य प्रदेश सरकार और CBI से इन मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस अधिकारी निष्पक्ष जांच करने में विफल रहे और इस मामले के गवाहों को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता की बेटी की मई 2024 में एक रिश्तेदार के साथ हत्या कर दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता के 18 वर्षीय बेटे नितिन की भी कथित तौर पर उसी समूह द्वारा एक साल पहले हत्या कर दी गई थी।
याचिका में दावा किया गया है कि ये हत्याएं जवाबी हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा थीं, जो तब शुरू हुई जब याचिकाकर्ता की बेटी ने 2019 में गांव के प्रभावशाली ठाकुर समुदाय के कुछ लोगों के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
इस मामले की जड़ें 2019 की एक घटना से जुड़ी हैं, जब याचिकाकर्ता की बेटी, जो उस समय 15 वर्ष की थी, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के चार लोगों ने उसके साथ मारपीट और छेड़छाड़ की थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जाति-सूचक गालियां दीं और पुलिस के पास जाने पर उसे जान से मारने की धमकी दी।
हालांकि, याचिका में दावा किया गया है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने याचिकाकर्ता के बेटे विष्णु को झूठे आरोप में फंसाकर गिरफ्तार कर लिया।
बाद में अगस्त 2023 में याचिकाकर्ता के एक और बेटे नितिन की भी कथित तौर पर उसी समूह द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
हालांकि उस मामले में FIR दर्ज की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता का दावा है कि शिकायत में कई गंभीर आरोपों को शामिल नहीं किया गया था। याचिका के अनुसार FIR में यह आरोप शामिल नहीं किया गया कि हमले के दौरान उसके कपड़े फाड़ दिए गए थे और आरोपियों ने उसके घर में तोड़फोड़ की थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि FIR में आरोपियों में से एक अंकित सिंह ठाकुर का नाम शामिल नहीं किया गया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके भूपेंद्र सिंह के साथ करीबी संबंध हैं।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता की बेटी ने बार-बार अधिकारियों से संपर्क कर मामले में सभी आरोपियों को शामिल करने की मांग की और जबरन समझौता करने के लिए दी जा रही धमकियों की शिकायत भी की। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि भूपेंद्र सिंह ने उसे बुलाया और “मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 करोड़ रुपये” की पेशकश की।
याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता की बेटी और उसका रिश्तेदार राजेंद्र, नितिन की मौत से जुड़े हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे।
मई 2024 में कथित तौर पर आरोपियों ने राजेंद्र को पीट-पीटकर मार डाला।
एक दिन बाद याचिकाकर्ता की बेटी की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जब वह राजेंद्र का शव ले जा रही एम्बुलेंस में सफर कर रही थी।
पुलिस के अनुसार वह महिला चलती गाड़ी से गिर गई थी। हालांकि याचिकाकर्ता ने इस दावे का खंडन किया है और आरोप लगाया है कि उसकी बेटी की मौत में साजिश शामिल थी।
इसीलिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह इन मौतों की CBI जांच का आदेश दे और साथ ही 2019 और 2023 के मामलों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश भी दे।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि स्थानीय पुलिस निष्पक्ष जांच करने में विफल रही है और गवाहों की सुरक्षा खतरे में है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस, अधिवक्ता मीनेश दुबे के साथ, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए।
उम्मीद है कि CBI द्वारा प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष पेश किए जाने के बाद यह मामला अदालत में आगे भी जारी रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBI को निर्देश दिया कि वह 2024 में मध्य प्रदेश के सागर जिले में 20 वर्षीय एक दलित महिला की मौत से जुड़े हालात की शुरुआती जांच करे। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है, और कहा कि सच सामने आना ही चाहिए।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि उनका अंतर्मन उन्हें राज्य सरकार की दलील स्वीकार करने की अनुमति नहीं देता। इसलिए उन्होंने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने FIR दर्ज करने का फैसला CBI पर छोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल महिला की मां द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें परिवार के तीन सदस्यों की मौत की CBI या SIT से जांच कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम CBI को निर्देश देते हैं कि वह लड़की की मौत से जुड़े हालात की शुरुआती जांच करे।”
लॉ चक्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले ने गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, क्योंकि याचिका में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के एक करीबी सहयोगी इन हत्याओं में शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 2025 में मध्य प्रदेश सरकार और CBI से इन मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस अधिकारी निष्पक्ष जांच करने में विफल रहे और इस मामले के गवाहों को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता की बेटी की मई 2024 में एक रिश्तेदार के साथ हत्या कर दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता के 18 वर्षीय बेटे नितिन की भी कथित तौर पर उसी समूह द्वारा एक साल पहले हत्या कर दी गई थी।
याचिका में दावा किया गया है कि ये हत्याएं जवाबी हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा थीं, जो तब शुरू हुई जब याचिकाकर्ता की बेटी ने 2019 में गांव के प्रभावशाली ठाकुर समुदाय के कुछ लोगों के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
इस मामले की जड़ें 2019 की एक घटना से जुड़ी हैं, जब याचिकाकर्ता की बेटी, जो उस समय 15 वर्ष की थी, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के चार लोगों ने उसके साथ मारपीट और छेड़छाड़ की थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जाति-सूचक गालियां दीं और पुलिस के पास जाने पर उसे जान से मारने की धमकी दी।
हालांकि, याचिका में दावा किया गया है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने याचिकाकर्ता के बेटे विष्णु को झूठे आरोप में फंसाकर गिरफ्तार कर लिया।
बाद में अगस्त 2023 में याचिकाकर्ता के एक और बेटे नितिन की भी कथित तौर पर उसी समूह द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
हालांकि उस मामले में FIR दर्ज की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता का दावा है कि शिकायत में कई गंभीर आरोपों को शामिल नहीं किया गया था। याचिका के अनुसार FIR में यह आरोप शामिल नहीं किया गया कि हमले के दौरान उसके कपड़े फाड़ दिए गए थे और आरोपियों ने उसके घर में तोड़फोड़ की थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि FIR में आरोपियों में से एक अंकित सिंह ठाकुर का नाम शामिल नहीं किया गया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके भूपेंद्र सिंह के साथ करीबी संबंध हैं।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता की बेटी ने बार-बार अधिकारियों से संपर्क कर मामले में सभी आरोपियों को शामिल करने की मांग की और जबरन समझौता करने के लिए दी जा रही धमकियों की शिकायत भी की। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि भूपेंद्र सिंह ने उसे बुलाया और “मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 करोड़ रुपये” की पेशकश की।
याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता की बेटी और उसका रिश्तेदार राजेंद्र, नितिन की मौत से जुड़े हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे।
मई 2024 में कथित तौर पर आरोपियों ने राजेंद्र को पीट-पीटकर मार डाला।
एक दिन बाद याचिकाकर्ता की बेटी की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जब वह राजेंद्र का शव ले जा रही एम्बुलेंस में सफर कर रही थी।
पुलिस के अनुसार वह महिला चलती गाड़ी से गिर गई थी। हालांकि याचिकाकर्ता ने इस दावे का खंडन किया है और आरोप लगाया है कि उसकी बेटी की मौत में साजिश शामिल थी।
इसीलिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह इन मौतों की CBI जांच का आदेश दे और साथ ही 2019 और 2023 के मामलों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश भी दे।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि स्थानीय पुलिस निष्पक्ष जांच करने में विफल रही है और गवाहों की सुरक्षा खतरे में है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस, अधिवक्ता मीनेश दुबे के साथ, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए।
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