MP: जज को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में भाजपा विधायक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू

Written by sabrang india | Published on: April 4, 2026
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने करीब सात महीने पहले अवैध खनन से जुड़े एक मामले में एक न्यायाधीश से संपर्क करने की कथित कोशिश की थी। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।


फोटो साभार:द वायर, फेसबुक/@sanjaypathak.in

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार, 2 अप्रैल को अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करे। विधायक पर आरोप है कि उन्होंने अवैध खनन से जुड़े एक मामले में एक वर्तमान न्यायाधीश से अनुचित तरीके से संपर्क किया।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने सात महीने पहले न्यायाधीश से संपर्क करने के प्रयास को लेकर विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी का व्यवहार आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है। इसलिए इस याचिका का निपटारा करते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज की जाए और इसे 6 अप्रैल को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।”

इस आदेश में संबंधित न्यायाधीश जस्टिस विशाल मिश्रा के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। न्यायालय ने बताया कि 1 सितंबर 2025 के अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा था कि इस मामले पर चर्चा करने के लिए उनसे फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।

पिछले वर्ष सितंबर में जस्टिस मिश्रा ने कथित अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि पाठक ने ‘इस विशेष मामले पर चर्चा करने के लिए’ उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी, इसलिए वे इस याचिका की सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं।

यह मामला हाईकोर्ट में दायर एक रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें अवैध खनन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष दीक्षित नामक एक व्यक्ति ने इन आरोपों के संबंध में भोपाल स्थित आर्थिक अपराध विंग (ईओडब्ल्यू) से संपर्क किया था। इसके बाद, ईओडब्ल्यू द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा विधायक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र तथा वन भूमि में ‘अवैध और अत्यधिक खनन’ कर रही हैं।

दीक्षित ने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी करने में विफल रहा। वहीं, पाठक ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप की अनुमति मांगी और कहा कि उनकी भी बात सुनी जानी चाहिए।

पाठक द्वारा जज से संपर्क करने की कथित कोशिश के बाद दीक्षित ने एक रिट याचिका दायर कर अदालत को प्रभावित करने के इस प्रयास पर न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की।

द वायर के अनुसार, इस याचिका का अब इस निर्देश के साथ निपटारा कर दिया गया है कि इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना के मामले के रूप में लिया जाए।

संजय सत्येंद्र पाठक, जो पहले शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं, कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक हैं। उनसे पहले उनके पिता सत्येंद्र पाठक इसी सीट से कांग्रेस विधायक रहे थे और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रह चुके थे।

राज्य के सबसे अमीर नेताओं में शुमार संजय पाठक ने 2014 में कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्होंने 2015 में विजयराघवगढ़ सीट से चुनाव जीता। वे 2016 से 2018 तक शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री रहे और 2018 तथा 2023 के चुनाव भी इसी सीट से भाजपा के टिकट पर जीते।

Related

गुजरात के पत्रकार पर कथित अत्याचार का मामला: जिग्नेश मेवाणी ने मेडिकल रिपोर्ट को खारिज किया, DCP के निलंबन और CBI जांच की मांग की

मालवानी में कथित हेट स्पीच के लिए नितेश राणे के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई

बाकी ख़बरें