मध्य प्रदेश में पीड़ित ने बताया कि जब उसके परिवार वालों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उनके साथ भी गाली-गलौज और मारपीट की गई। वहीं उत्तर प्रदेश की घटना में सामने आया है कि दबंग जाति के लोगों ने हमला किया।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में शुक्रवार को एक दलित युवक को उसके गांव की एक दुकान पर खड़े होकर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लिए तीन लोगों ने कथित तौर पर जूतों से पीटा और जातिसूचक गालियां दीं। जब उसके परिवार वाले उसे बचाने आए तो उन्हें भी पीटा गया।
ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने चार घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि फिलहाल आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सिविल लाइंस पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले महाराजगंज गांव के रहने वाले युवक वीरेंद्र अहिरवार के अनुसार, आरोपियों ने उस पर और उसके परिवार वालों पर हमला किया और उन्हें जातिसूचक गालियां भी दीं।
वीरेंद्र ने बताया, “शुक्रवार रात को मैं अपने गांव की एक दुकान पर घर का कुछ सामान खरीदने गया था। जब मैं वहां खड़ा था, तभी भरत लाल पटेल, जी लाल पटेल और एक अन्य स्थानीय दबंग ने मुझे गालियां देना शुरू कर दिया और फिर मुझ पर हाथ उठा दिया। जब मेरे माता-पिता और बहन ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया और उन्हें जातिसूचक गालियां दीं।”
सूचना मिलने पर सिविल लाइंस पुलिस थाने की एक टीम मौके पर पहुंची और वीरेंद्र, उसके पिता भागीरथ अहिरवार, उसकी मां हब्बू बाई अहिरवार और उसकी बहन नैना अहिरवार को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस बीच पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वीरेंद्र ने कहा, “आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी धाराएं नहीं लगाई गई हैं, इसलिए हम पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।”
सिविल लाइंस थाने के प्रभारी सतीश सिंह ने कहा, “आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।”
वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक दलित परिवार ने सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी है कि अगर पुलिस 24 घंटे के भीतर FIR दर्ज नहीं करती है, तो वे अपनी जान दे देंगे। यह घटना 10 मार्च को एक शादी समारोह के दौरान हुए एक कथित जाति-आधारित हमले से जुड़ी है। परिवार का आरोप है कि दबंग अवस्थी परिवार के लगभग 40 लोगों ने उनका अपहरण कर लिया था। बताया जाता है कि इस परिवार के तार बजरंग दल से जुड़े हैं।
मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों का दावा है कि उन्हें एक कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान उन्हें जातिसूचक गालियों और शारीरिक अपमान का सामना करना पड़ा। एक महिला को उसके बाल पकड़कर घसीटा गया और उसे पैरों से कुचला गया। हालांकि पुलिस ने आखिरकार परिवार को उस बंद कमरे से बचा लिया, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और दो दिन पहले शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद FIR भी दर्ज नहीं की गई।
रविवार को सोशल मीडिया पर साझा किया गया परिवार का एक वीडियो संदेश तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर गुस्सा पैदा कर दिया है और लोग उत्तर प्रदेश पुलिस तथा पुलिस महानिदेशक से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भीम आर्मी के नेताओं—प्रदेश समन्वयक डॉ. कुलदीप भार्गव और जिला महासचिव एडवोकेट दीपक जाटव—ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे सवर्ण जातियों की गुंडागर्दी बताया है। उन्होंने तिकुनिया पुलिस थाने के प्रभारी पर आरोप लगाया है कि वे पीड़ितों पर समझौता करने का दबाव डाल रहे हैं, जबकि बजरंग दल से कथित संबंधों के चलते आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
भीम आर्मी ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे—जिसमें पुलिस अधीक्षक के कार्यालय तक मार्च निकालना भी शामिल है। वे मांग कर रहे हैं कि SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
बढ़ते दबाव के जवाब में खीरी पुलिस ने ऑनलाइन यह बयान जारी किया है कि तिकुनिया थाने के प्रभारी को कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि अभी तक FIR दर्ज होने या किसी की गिरफ्तारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला भारत में लगातार जारी जाति-आधारित हिंसा की समस्या को उजागर करता है। यहां दबंग जातियां अक्सर दलितों के खिलाफ अत्याचार करती हैं, जिनमें अपमान करना, महिलाओं के साथ यौन हिंसा करना और सामाजिक दर्जे या संसाधनों को लेकर विवाद शामिल होते हैं। दबंग जातियां अपनी सामाजिक ऊंच-नीच (पदानुक्रम) को बनाए रखना चाहती हैं। ऐसी घटनाएं तत्काल न्याय सुनिश्चित करने और पुलिस की जवाबदेही तय करने में मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों को भी उजागर करती हैं।
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ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने चार घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि फिलहाल आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सिविल लाइंस पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले महाराजगंज गांव के रहने वाले युवक वीरेंद्र अहिरवार के अनुसार, आरोपियों ने उस पर और उसके परिवार वालों पर हमला किया और उन्हें जातिसूचक गालियां भी दीं।
वीरेंद्र ने बताया, “शुक्रवार रात को मैं अपने गांव की एक दुकान पर घर का कुछ सामान खरीदने गया था। जब मैं वहां खड़ा था, तभी भरत लाल पटेल, जी लाल पटेल और एक अन्य स्थानीय दबंग ने मुझे गालियां देना शुरू कर दिया और फिर मुझ पर हाथ उठा दिया। जब मेरे माता-पिता और बहन ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया और उन्हें जातिसूचक गालियां दीं।”
सूचना मिलने पर सिविल लाइंस पुलिस थाने की एक टीम मौके पर पहुंची और वीरेंद्र, उसके पिता भागीरथ अहिरवार, उसकी मां हब्बू बाई अहिरवार और उसकी बहन नैना अहिरवार को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस बीच पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वीरेंद्र ने कहा, “आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी धाराएं नहीं लगाई गई हैं, इसलिए हम पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।”
सिविल लाइंस थाने के प्रभारी सतीश सिंह ने कहा, “आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।”
वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक दलित परिवार ने सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी है कि अगर पुलिस 24 घंटे के भीतर FIR दर्ज नहीं करती है, तो वे अपनी जान दे देंगे। यह घटना 10 मार्च को एक शादी समारोह के दौरान हुए एक कथित जाति-आधारित हमले से जुड़ी है। परिवार का आरोप है कि दबंग अवस्थी परिवार के लगभग 40 लोगों ने उनका अपहरण कर लिया था। बताया जाता है कि इस परिवार के तार बजरंग दल से जुड़े हैं।
मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों का दावा है कि उन्हें एक कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान उन्हें जातिसूचक गालियों और शारीरिक अपमान का सामना करना पड़ा। एक महिला को उसके बाल पकड़कर घसीटा गया और उसे पैरों से कुचला गया। हालांकि पुलिस ने आखिरकार परिवार को उस बंद कमरे से बचा लिया, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और दो दिन पहले शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद FIR भी दर्ज नहीं की गई।
रविवार को सोशल मीडिया पर साझा किया गया परिवार का एक वीडियो संदेश तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर गुस्सा पैदा कर दिया है और लोग उत्तर प्रदेश पुलिस तथा पुलिस महानिदेशक से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भीम आर्मी के नेताओं—प्रदेश समन्वयक डॉ. कुलदीप भार्गव और जिला महासचिव एडवोकेट दीपक जाटव—ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे सवर्ण जातियों की गुंडागर्दी बताया है। उन्होंने तिकुनिया पुलिस थाने के प्रभारी पर आरोप लगाया है कि वे पीड़ितों पर समझौता करने का दबाव डाल रहे हैं, जबकि बजरंग दल से कथित संबंधों के चलते आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
भीम आर्मी ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे—जिसमें पुलिस अधीक्षक के कार्यालय तक मार्च निकालना भी शामिल है। वे मांग कर रहे हैं कि SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
बढ़ते दबाव के जवाब में खीरी पुलिस ने ऑनलाइन यह बयान जारी किया है कि तिकुनिया थाने के प्रभारी को कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि अभी तक FIR दर्ज होने या किसी की गिरफ्तारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला भारत में लगातार जारी जाति-आधारित हिंसा की समस्या को उजागर करता है। यहां दबंग जातियां अक्सर दलितों के खिलाफ अत्याचार करती हैं, जिनमें अपमान करना, महिलाओं के साथ यौन हिंसा करना और सामाजिक दर्जे या संसाधनों को लेकर विवाद शामिल होते हैं। दबंग जातियां अपनी सामाजिक ऊंच-नीच (पदानुक्रम) को बनाए रखना चाहती हैं। ऐसी घटनाएं तत्काल न्याय सुनिश्चित करने और पुलिस की जवाबदेही तय करने में मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों को भी उजागर करती हैं।
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