पड़तालः यूपी में बेरोज़गारी दर के बारे में भ्रामक दावा कर बैठे सीएम योगी

Written by राज कुमार | Published on: December 21, 2022
सवाल ये उठता है कि क्या सचमुच उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी दर 2% है? क्या 2017 में बेरोज़गारी दर 19% थी? क्या 2017 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी दर में कोई कमी आई है? आइये, पड़ताल करते हैं।



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में 2017 में बेरोजगारी दर 19% थी जो आज घटकर 2% रह गई है। वे 18 दिसंबर को लखनऊ में प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। अख़बार भी इस बयान को वेरिफाई करने की बजाय ज्यों का त्यों छाप रहे हैं। समझना मुश्किल है कि अख़बार में ख़बर को तौर पर छपा है या फिर विज्ञापन है। उत्तर प्रदेश, सीएम ऑफिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसे ट्वीट भी किया गया है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सचमुच उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर 2% है? क्या 2017 में बेरोजगारी दर 19% थी? क्या 2017 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर में कोई कमी आई है? आइये, पड़ताल करते हैं।



क्या उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी दर 2% है?

सबसे पहले योगी आदित्यनाथ के इस दावे की पड़ताल करते हैं कि यूपी में बेरोजगारी दर 2% है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी संस्था यानी सीएमआईई देश में रोजगार संबंधी आंकड़ों को इकठ्ठा करती है और साल के हर क्वार्टर पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करती है। सीएमआईई के अनुसार नवंबर 2022 में यूपी में बेरोजगारी दर 2% नहीं बल्कि 4.1% प्रतिशत है। यानी योगी आदित्यनाथ बेरोजगारी दर को आधी करके बता रहे हैं। मई-अगस्त तिमाही में बेरोजगारी दर का ये आंकड़ा 3.27% था। यानी अगर पिछली तिमाही से तुलना करें तो भी बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी ही हुई है।



सीएम योगी ने ये भी कहा है कि वर्ष 2017 में बेरोजगारी दर 19% थी जो घटकर 2022 में 2% हो गई है। पिछली बार 2017 में ही उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव हुए थे और भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी को बेदख़ल कर राज्य की सत्ता में आई थी। और योगी आदित्यनाथ को पहली बार राज्य की कमान सौंपी गई थी। मार्च 2022 में हुए चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। इस तरह योगी का कहना है कि समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार में बेरोज़गारी दर 19 प्रतिशत थी। ऐसा दावा पहले भी कई बार किया जा चुका है।

अब सवाल उठता है कि क्या सचमुच 2017 में बेरोजगारी दर 19% थी? सीएमआईई की मई-अगस्त 2017 की रिपोर्ट के अनुसार यूपी में बेरोजगारी दर 3.88% प्रतिशत थी। यानी दोनों ही संदर्भों में योगी आदित्यनाथ का दावा ग़लत है। गौरतलब है कि सीएमआईई अपनी रिपोर्ट साल की हर तिमाही में प्रकाशित करती है। हर तिमाही और साल दर साल आंकड़ों में हेर-फेर होता रहता है।

सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार



क्या पिछले पौने छह सालों में यूपी में बेरोजगारी दर में कमी आई है?

योगी आदित्यनाथ का दावा है कि पिछले पौने छह सालों में यूपी में बेरोजगारी में कमी आई है। क्या समचुमच ऐसा है? आइये, पड़ताल करते हैं। हम हर साल की मई-अगस्त की तिमाही को ही अपनी पड़ताल का आधार बनाते हैं और देखते हैं कि पिछले पांच-छह सालों में साल दर साल बेरोजगारी की स्थिति क्या रही है?

वर्ष 2017 में यूपी में बेरोजगारी दर 3.88% थी जो वर्ष 2018 में बढ़कर 5.79% हो गई। वर्ष 2019 में यूपी में बेरोजगारी का आंकड़ा डबल हो गया और बेरोजगारी दर बढ़कर 10.76% हो गई। वर्ष 2020 में बेरोजगारी दर 8.63% थी जो वर्ष 2021 में घटकर 5.41% पर आ गई। नवंबर 2022 में यूपी में बेरोजगारी दर 4.1% है। जबकि वर्ष 2017 में ये आंकड़ा 3.88% था।

ऊपर दिये गये आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि यूपी में बेरोजगारी की दर में कमी नहीं आई है बल्कि बढ़ोतरी हुई है। सभी आंकड़े सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट से लिए गये हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्पष्ट करना चाहिये कि वो इतना बड़ा दावा किस आधार पर कर रहे हैं।

सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार



यूपी में बेरोज़गारी की स्थिति

ऊपर दिये गये आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि यूपी में बेरोजगारी में कमी नहीं आई बल्कि बढ़ोतरी हुई है। लेकिन मात्र बेरोजगारी दर के आंकड़े से बेरोजगारी की पूरी स्थिति को समझा नहीं जा सकता। हमें ये भी देखना होगा कि कितने लोग हैं जो रोजगार की तलाश में हैं और कितने हैं जो रोजगार की तलाश करते-करते थक गये हैं और हताश होकर रोजगार ढूंढना ही छोड़ दिया है। हम रोजगारी के मुद्दे को सिर्फ पुरुषों तक सीमित करके नहीं देख सकते बल्कि हमें यह भी देखना होगा कि महिलाओं में रोजगार की स्थिति क्या है?

यूपी में 18 लाख 73 हज़ार लोग ऐसे हैं जो बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश में सक्रिय हैं। जबकि 35 लाख 59 हज़ार लोग ऐसे हैं जो बेरोजगार हैं लेकिन हताश होकर रोजगार तलाश करना बंद कर चुके हैं। यानी जितने लोग सक्रिय तौर पर रोजगार ढूंढ रहे हैं उनसे लगभग दोगुना ऐसे बेरोजगार हैं जो रोजगार ढूंढना भी छोड़ चुके हैं। ये स्थिति हमें एक रोजगार संपन्न यूपी की तस्वीर पेश करती है या एक हताश यूपी की? सभी आंकड़े सीएमआईई की मई-अगस्त 2022 की रिपोर्ट से लिए गये हैं।

यूपी में महिलाओं में बेरोजगारी की स्थिति

अगर महिलाओं में रोजगार की उपलब्धता की बात करें तो स्थिति और भी खराब है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं में बेरोजगारी दर 22.6% है। जबकि वर्ष 2017 मई-अगस्त में महिलाओं में बेरोजगारी दर 16.9% थी।

आइये, साल दर साल देखते हैं कि यूपी में महिलाओं में बेरोजगारी की स्थिति क्या रही है?

वर्ष 2017 मई-अगस्त में महिलाओं में बेरोगारी दर 16.9% थी जो वर्ष 2018 में बढ़कर 27.1% हो गई। वर्ष 2019 में महिलाओं में बेरोजगारी दर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा बढ़कर 46.9% हो गया। वर्ष 2020 में बेरोजगारी दर में कमी आई और आंकड़ा 25.6% पर आ गया। वर्ष 2021 में महिलाओं में बेरोजगारी दर 24% थी और वर्ष 2022 में यूपी में महिलाओं में बेरोजगारी दर 22.6% है।



सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार

अगर हम साल दर साल के आंकड़ें देखते हैं तो पाते हैं कि यूपी में महिलाओं में बेरोजगारी दर के आंकड़ों में कमी नहीं आई है बल्कि बढ़ोतरी हुई है। अगर वर्ष 2017 से तुलना करें तो पाएंगे कि पिछले पांच सालों में महिलाओं में बेरोजगारी दर में 5.7% की बढ़ोतरी हुई है। सभी आंकड़े सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट से लिए गए हैं।



सीएमआईई की मई-अगस्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार

निष्कर्ष

यूपी में बेरोजगारी दर के संदर्भ में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के दावे भ्रामक हैं। सीएमआईई की रिपोर्ट योगी के दावों की पुष्टि नहीं करती है। योगी को स्पष्ट करना चाहिये कि उनके दावों का आधार क्या है?

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। वे सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं।)

Courtesy: Newsclick

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