गंगा में नाव पर इफ्तार मामला: 8 आरोपियों को 60 दिन बाद जमानत, 6 की अर्जी पर 18 मई को सुनवाई

Written by sabrang india | Published on: May 16, 2026
पुलिस ने 16 मार्च को ही इफ्तार पार्टी करने के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को एसीपी कोर्ट से भी जमानत नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस लाइंस स्थित एसीपी कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।



वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर नॉनवेज पार्टी करने के मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों को 60 दिन बाद शुक्रवार को जमानत मिल गई। वहीं, बाकी 6 आरोपियों की जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार, 18 मई को सुनवाई होगी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने आरोपियों को जमानत दे दी। याचियों दानिश सैफी, आमिर कैफी और नुरुल इस्लाम की ओर से सबसे पहले जमानत याचिका दाखिल की गई थी।

बाकी आरोपियों ने बाद में जमानत याचिका दाखिल की थी। अदालत सभी 14 आरोपियों की जमानत अर्जी पर एक साथ सुनवाई कर रही थी। 16 मार्च को रजत जायसवाल ने वाराणसी के कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई थी।

पुलिस ने 16 मार्च को ही इफ्तार पार्टी करने के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को एसीपी कोर्ट से भी जमानत नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस लाइंस स्थित एसीपी कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

नाविक का अपहरण कर नाव हाईजैक करने का मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार के अवशेष नदी में फेंकने के मामले में 28 अप्रैल को सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 15 मार्च को रोजेदारों ने नाविक का अपहरण कर नाव पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद बीच गंगा में इफ्तार पार्टी आयोजित की गई।

पुलिस के अनुसार, युवकों ने नाविक को धमकाकर नाव चलाने के लिए मजबूर किया। पार्टी के दौरान नाविक ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन आरोपियों ने उसकी बात अनसुनी कर दी। पुलिस का कहना है कि इफ्तार पार्टी के फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें सार्वजनिक करने का उद्देश्य केवल बनारस ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया तक एक अलग संदेश पहुंचाना था। पुलिस ने यह भी दावा किया कि काशी में इससे पहले इस तरह बीच गंगा में रोजा इफ्तार का आयोजन कभी नहीं हुआ था।

वीडियो रील में सबसे पहले मस्जिद का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद गंगा नदी और नाव पर सजे दस्तरखान को अलग-अलग एंगल से फिल्माया गया। बिरयानी के भी अलग से वीडियो बनाए गए। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के जरिए खुद को प्रभावशाली और ताकतवर दिखाने की कोशिश की गई।

इससे पहले 17 अप्रैल को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था।

काशी में सोमवार, 16 मार्च को गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। इस दौरान आयोजकों ने रोजेदारों को फल और मेवों के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी थी। पार्टी का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया था।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदूवादी संगठनों की नजर इस पर पड़ी। वीडियो में चिकन बिरयानी परोसे जाने की बात सामने आते ही BJP और अन्य हिंदूवादी संगठनों ने विरोध जताया। इसके बाद रजत जायसवाल, जो भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष हैं, ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत दर्ज होने के करीब 8 घंटे के भीतर पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान बिरयानी परोसने के मामले में गिरफ्तार सभी 14 युवक मदनपुरा इलाके के ताड़तल्ला क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। इनमें से अधिकांश युवक एक ही परिवार से संबंध रखते हैं। स्थानीय स्तर पर “बाबू बीड़ी वाले” के नाम से मशहूर परिवार के कई सदस्य भी इनमें शामिल हैं। आरोपियों में मोहम्मद अव्वल, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद, नूर इस्लाम और मोहम्मद फैजान एक ही घर के रहने वाले बताए गए हैं।

इन युवकों के साथ उसी परिवार और इलाके के आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, महफूज आलम और नेहाल अफरीदी भी शामिल थे। इसके अलावा मोहम्मद अहमद, मोहम्मद तौसीफ, आमिर कैफी, मोहम्मद अनस और दानिश सैफी भी घाट पहुंचे थे, जहां बाद में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई। सभी आरोपियों की उम्र लगभग 19 से 25 वर्ष के बीच बताई गई है।

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