शौर्य दिवसः भीमा-कोरेगांव में इकट्ठा हुए दलित समुदाय के लोग

Written by Sabrangindia Staff | Published on: January 1, 2019
प्रत्येक साल 1 जनवरी को पुणे के भीमा कोरेगांव में शौर्य दिवस मनाया जाता है. जिसके लिए बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग इकठ्ठा होकर यौद्धाओं को श्रद्धांजलि देते हैं. इस बार भीमा कोरेगांव संग्राम की 201वीं बरसी है. इलाके में तनाव के बावजूद दलित समुदाय के लोग इकट्ठा हो रहे हैं. 



बता दें कि पिछले साल (2018) इसी दिन दो समुदाय के बीच हिंसा हुई थी. जिसके बाद सरकार ने कई लोगों को आरोपी बनाया था जिनमें कई लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल थे लेकिन दलित समुदाय के नेता मानते हैं कि इस हिंसा के असल आरोपियों को सजा नहीं हुई. इसलिए इस बार शौर्य दिवस का यह कार्यक्रम शांतिपूर्वक हो, इसके लिए सुरक्षा के सख्त कदम उठाए गए हैं. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भीमा कोरेगांव की हिंसा जहां सबसे पहले भड़की, उस वडु-बुद्रक गांव को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है. इस गांव में हिंसा के बाद कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था. आपको बता दें कि ये वही गांव है, जहां संभाजी महाराज की समाधि है. गांव में मराठा समाज का बहुत बोलबाला है.

क्विंट से बात करते हुए पुलिस आईजी विश्वास नागरे पाटिल ने कहा कि गांव में आने वाले हर नागरिक की सुरक्षा का खयाल रखा जाएगा, इसका पूरा प्लान तैयार किया गया है. भीमा कोरेगांव में दर्शन के बाद जो लोग वडु गांव आना चाहते हैं, उनके लिए शटल बस सर्विस शुरू की गई है, जिससे आने-जाने में कोई असुविधा न हो.

1 जनवरी के प्रोग्राम के मद्देनजर पुणे और अहमदनगर से आने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक भी डाइवर्ट रहेगा. जो इस प्रोग्राम के लिए आना चाहते हैं, उन्हें ही आने दिया जाएगा. वही ड्रोन कैमरा सीसीटीवी की मदद और सोशल मीडिया पर भी पुलिस नजर बनाए रखेगी. उत्तेजित मैसेज भेजने वालों पर कार्रवाई करने की सूचना दे दी गई है.

1 जनवरी, 1818 के दिन ब्रिटिश सेना के 834 सैनिकों और पेशवा बाजीराव द्वितीय की मजबूत सेना के 28,000 जवानों के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें मराठा सेना पराजित हो गई थी. अंग्रेजों की सेना में ज्यादातर दलित महार समुदाय के लोग शामिल थे.

अंग्रेजों ने बाद में भीमा कोरेगांव विजय-स्तंभ बनाया. दलित समुदाय के लोग इसे ऊंची जातियों पर अपनी विजय का प्रतीक मानते हैं. यहां नए साल पर 1 जनवरी को पिछले 200 साल से सालाना समारोह आयोजित होता रहा है.

दलित समाज से जुड़े कई नेताओं को सभा की जानकारी है, जिसमें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, प्रकाश अम्बेडकर, आनंदराज अम्बेडकर शामिल हैं. उधर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को भीम आर्मी सेना प्रेसिडेंट चंद्रशेखर आजाद को बड़ा झटका देते हुए उनकी पुणे में आयोजित सभा पर रोक लगा दी है.