दलित महिला की आंगनवाड़ी हेल्पर के तौर पर नियुक्ति के बाद बढ़ा विवाद

Written by sabrang india | Published on: August 19, 2026
नियुक्ति के बाद कुछ ग्रामीणों ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र भेजने से इनकार कर दिया। शिवमोग्गा के डीसी प्रभुलिंग कवलीकट्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और महिला एवं बाल विकास विभाग को तुरंत उस जगह का निरीक्षण करने का निर्देश दिया।


साभार : इंडियन एक्सप्रेस, प्रतीकात्मक फोटो

शिवमोग्गा जिले के होसनगरा तालुक में रिप्पोनपेट के पास हेड्डारीपुरा जीपी के अंतर्गत आने वाले मुगदथी गांव में एक दलित महिला को आंगनवाड़ी हेल्पर के तौर पर नियुक्त किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी नियुक्ति के बाद कुछ ग्रामीणों ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र भेजने से इनकार कर दिया। शिवमोग्गा के डीसी प्रभुलिंग कवलीकट्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और महिला एवं बाल विकास विभाग को तुरंत मौके का निरीक्षण करने का निर्देश दिया।

इस निर्देश पर कार्रवाई करते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) गायत्री रामचंद्र ने रिप्पोनपेट पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों के साथ सोमवार को मुगदथी का दौरा किया और स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बैठक की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती पूरी तरह से सरकारी नियमों और कानूनी योग्यता मानदंडों के अनुसार की गई थी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आंगनवाड़ी में मिलने वाली स्वास्थ्य और शैक्षिक सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

स्थानीय ग्रामीण गुरुराज ने गांव में किसी भी तरह के जाति-आधारित भेदभाव या विरोध से इनकार किया और कहा कि सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। वह मुगदथी बालमुरी गणपति मंदिर के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला गलतफहमी या गलत जानकारी के कारण पैदा हुआ है और बच्चों के कल्याण के लिए पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

ज्ञात हो कि कुछ महीने पहले ओडिशा में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां ग्रामीणों ने दलित कर्मचारी द्वारा बनाए गए भोजन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। ओडिशा के बरगढ़ जिले में एक आंगनवाड़ी केंद्र को कथित तौर पर इसके बाद बंद कर दिया गया था। इस मामले में जाति-आधारित भेदभाव के आरोपों की जांच की मांग उठी थी।

राज्य में जाति-आधारित भेदभाव के आरोप सामने आए। मामला बरगढ़ जिले का था, जबकि बोलांगीर में भी ऐसा ही विवाद राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ था।

ओडिशा टीवी (OTV) के अनुसार, घटना झारबंध ब्लॉक के दीवानपाली आंगनवाड़ी केंद्र की थी, जहां ग्रामीणों ने कथित तौर पर दलित रसोइए द्वारा बनाए गए भोजन को लेने से इनकार कर दिया और केंद्र पर ताला लगा दिया।

शिकायत के अनुसार, दलित समुदाय की महिला पद्मिनी जगत को लगभग दो महीने पहले आंगनवाड़ी में रसोइया नियुक्त किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीण माता-पिता से कह रहे हैं कि वे अपने बच्चों को केंद्र न भेजें और न ही उनके बनाए भोजन, अंडे और पोषण सप्लीमेंट का सेवन करें, क्योंकि वह दलित हैं।

पद्मिनी ने यह भी दावा किया कि उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा था और उनके पिता अबाधुता जगत से भी ऐसी ही मांग की गई थी।

शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि ग्रामीणों के एक समूह ने आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा दिया, जिससे उसका कामकाज बाधित हो गया। नतीजतन, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं केंद्र से मिलने वाले अतिरिक्त पोषण और अन्य जरूरी सेवाओं से वंचित रह गईं।

इन आरोपों से इलाके में चिंता फैल गई। लोगों ने निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

आंगनवाड़ी केंद्र की रसोइया ने कहा, "ग्रामीणों ने मेरे पिता से कहा, 'अपनी बेटी से इस्तीफा देने को कहो। हम 'गांडा' (अनुसूचित जाति) के बनाए भोजन को कैसे खा सकते हैं? हम अपने बच्चों को वहां कैसे भेज सकते हैं?' इसके बाद स्कूल खुला और मैं वहां जाती रही। मेरे जाने के बाद कुछ दिनों तक बच्चे भी आए। लेकिन तीन-चार दिन तक बच्चों के आने के बाद ग्रामीणों ने मेरे पिता को फिर बुलाया और एक बैठक की।"

दलित महिला ने बताया, "उन्होंने कहा, 'हमारे कहने के बाद भी आपकी बेटी इस्तीफा क्यों नहीं दे रही है? उससे इस्तीफा देने को कहिए।' मेरे पिता ने जवाब दिया, 'नहीं, वह ऐसे इस्तीफा क्यों दे? अगर आप चाहते हैं कि वह इस्तीफा दे, तो आप सभी ग्रामीणों को लिखकर दें कि आप 'गांडा' जाति के व्यक्ति का बनाया हुआ भोजन नहीं खाएंगे।' इसके बाद ग्रामीणों ने आकर आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा दिया।"

पानी की बोतल से पानी पीने पर छात्र की पिटाई का आरोप

वहीं, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने शिक्षा व्यवस्था और समाज दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले एक 8 वर्षीय छात्र ने शिक्षक की पानी की बोतल से पानी पी लिया। इसी बात से नाराज शिक्षक ने कथित तौर पर बच्चे की पिटाई कर दी और उसके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील के उकावल गांव स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का था। जानकारी के अनुसार, कक्षा 4 में पढ़ने वाला 8 वर्षीय छात्र रोज की तरह स्कूल पहुंचा था। पढ़ाई के दौरान उसे प्यास लगी, जिसके बाद उसने कक्षा में रखी शिक्षक की पानी की बोतल से पानी पी लिया। बताया गया कि इसी बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया और शिक्षक का गुस्सा मासूम छात्र पर उतर आया।

परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप था कि शिक्षक लोकेश शर्मा छात्र द्वारा उनकी पानी की बोतल छूने से नाराज हो गए। उनका कहना था कि शिक्षक ने पहले छात्र को डांटा और कथित तौर पर उसके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद शिक्षक ने, "मेरी बोतल को छूने की हिम्मत कैसे हुई?" कहते हुए छात्र की डंडे से बेरहमी से पिटाई कर दी।

रोते हुए घर पहुंचा मासूम

घटना के बाद छात्र जब घर पहुंचा, तो वह काफी सहमा हुआ था। उसने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। बच्चे की बात सुनकर परिवार के सदस्य स्तब्ध रह गए। परिजनों का कहना था कि केवल पानी पीने के कारण एक छोटे बच्चे के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाना बेहद गंभीर मामला है। इसके बाद परिवार ने कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया और पुलिस थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

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