यह घटना बुधवार को कोर्ट नंबर 4 में हुई, जहां 2018 के एक मामले के सिलसिले में 24 आरोपियों को पेश होने का निर्देश दिया गया था।

सिलीगुड़ी सब-डिविजनल कोर्ट में एक घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक आरोपी ने महिला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को हिजाब पहने हुए देखकर "जय श्री राम" का नारा लगाया।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बुधवार को कोर्ट नंबर 4 में हुई, जहां 2018 के एक मामले के सिलसिले में 24 आरोपियों को पेश होने का निर्देश दिया गया था।
वकीलों के संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि कोर्टरूम के अंदर धार्मिक या राजनीतिक नारों की कोई जगह नहीं है। हालांकि, आरोपी की ओर से पेश वकील ने तुरंत बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि यह नारा जज के लिए नहीं लगाया गया था।
मामला 2018 का है
यह मामला 2018 में हुई एक अंतर-धार्मिक शादी से जुड़ी घटना का है। उस समय, लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर "लव जिहाद" के आरोप लगाए थे और एक ज्ञापन सौंपने के लिए बागहाजतिन पार्क से हिल कार्ट रोड स्थित सिलीगुड़ी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के कार्यालय तक मार्च किया था।
इसके बाद पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
कुछ आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जबकि अन्य के खिलाफ वारंट जारी किए गए थे, जिसके तहत उन्हें कोर्ट में पेश होना था। कार्यवाही के सिलसिले में सभी 24 लोगों को कोर्ट बुलाया गया था।
हाजिरी के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर नारा लगाया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब हाजिरी के लिए नाम पुकारे जा रहे थे, तो आरोपी कोर्टरूम में खड़े थे।
इस प्रक्रिया के दौरान, एक आरोपी ने कथित तौर पर जज की ओर देखा और उन्हें हिजाब पहने हुए देखकर "जय श्री राम" का नारा लगाया।
इस घटना से कोर्टरूम में हंगामा मच गया।
आरोपी के वकील, त्रिदीप साहा ने तुरंत कोर्ट से माफी मांगी और कहा कि यह नारा जज के लिए नहीं लगाया गया था।
वकील का कहना है कि नारा जज के लिए नहीं था
साहा ने इस घटना को अनजाने में हुई घटना बताया और कहा कि "जय श्री राम" और "राधे-राधे" जैसे शब्दों का इस्तेमाल लोग कभी-कभी अभिवादन के तौर पर करते हैं। उन्होंने कहा कि जब नाम पुकारे जा रहे थे, तब आरोपी ने वह बात कही और जैसे ही कानूनी टीम को एहसास हुआ कि इसे कोर्टरूम में गलत समझा जा सकता है, तो उन्होंने तुरंत माफी मांग ली।
साहा ने कहा, "यह बात जज के लिए नहीं कही गई थी। बहुत से लोग अभिवादन के तौर पर 'जय श्री राम' या 'राधे-राधे' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। जब नाम पुकारे जा रहे थे, तो एक आरोपी ने बिना सोचे-समझे ये शब्द कह दिए। फिर भी, हमने इस घटना के लिए तुरंत माफी मांग ली।"
वकीलों ने घटना की निंदा की
कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने इस घटना की आलोचना की।
सिलीगुड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उदय शंकर मालाकार ने इस घटना को "पूरी तरह से अनुचित" बताया और कहा कि कोर्टरूम के अंदर ऐसा व्यवहार ठीक नहीं है।
मालाकार ने मीडिया से कहा, "यह पूरी तरह से अनुचित घटना है। कोर्टरूम के अंदर ऐसी घटनाएं बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। अगर कोर्ट चाहती तो खुद से (suo motu) कार्रवाई शुरू कर सकती थी।"
ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के दार्जिलिंग जिला सचिव दिवाकर रॉय ने भी कोर्ट की कार्यवाही की निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कोर्टरूम निष्पक्ष न्याय की जगह है और इसे धार्मिक और राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए। रॉय के अनुसार, किसी भी हालत में कोर्टरूम के अंदर धार्मिक या राजनीतिक नारे नहीं लगाए जाने चाहिए।
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द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बुधवार को कोर्ट नंबर 4 में हुई, जहां 2018 के एक मामले के सिलसिले में 24 आरोपियों को पेश होने का निर्देश दिया गया था।
वकीलों के संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि कोर्टरूम के अंदर धार्मिक या राजनीतिक नारों की कोई जगह नहीं है। हालांकि, आरोपी की ओर से पेश वकील ने तुरंत बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि यह नारा जज के लिए नहीं लगाया गया था।
मामला 2018 का है
यह मामला 2018 में हुई एक अंतर-धार्मिक शादी से जुड़ी घटना का है। उस समय, लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर "लव जिहाद" के आरोप लगाए थे और एक ज्ञापन सौंपने के लिए बागहाजतिन पार्क से हिल कार्ट रोड स्थित सिलीगुड़ी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के कार्यालय तक मार्च किया था।
इसके बाद पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
कुछ आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जबकि अन्य के खिलाफ वारंट जारी किए गए थे, जिसके तहत उन्हें कोर्ट में पेश होना था। कार्यवाही के सिलसिले में सभी 24 लोगों को कोर्ट बुलाया गया था।
हाजिरी के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर नारा लगाया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब हाजिरी के लिए नाम पुकारे जा रहे थे, तो आरोपी कोर्टरूम में खड़े थे।
इस प्रक्रिया के दौरान, एक आरोपी ने कथित तौर पर जज की ओर देखा और उन्हें हिजाब पहने हुए देखकर "जय श्री राम" का नारा लगाया।
इस घटना से कोर्टरूम में हंगामा मच गया।
आरोपी के वकील, त्रिदीप साहा ने तुरंत कोर्ट से माफी मांगी और कहा कि यह नारा जज के लिए नहीं लगाया गया था।
वकील का कहना है कि नारा जज के लिए नहीं था
साहा ने इस घटना को अनजाने में हुई घटना बताया और कहा कि "जय श्री राम" और "राधे-राधे" जैसे शब्दों का इस्तेमाल लोग कभी-कभी अभिवादन के तौर पर करते हैं। उन्होंने कहा कि जब नाम पुकारे जा रहे थे, तब आरोपी ने वह बात कही और जैसे ही कानूनी टीम को एहसास हुआ कि इसे कोर्टरूम में गलत समझा जा सकता है, तो उन्होंने तुरंत माफी मांग ली।
साहा ने कहा, "यह बात जज के लिए नहीं कही गई थी। बहुत से लोग अभिवादन के तौर पर 'जय श्री राम' या 'राधे-राधे' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। जब नाम पुकारे जा रहे थे, तो एक आरोपी ने बिना सोचे-समझे ये शब्द कह दिए। फिर भी, हमने इस घटना के लिए तुरंत माफी मांग ली।"
वकीलों ने घटना की निंदा की
कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने इस घटना की आलोचना की।
सिलीगुड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उदय शंकर मालाकार ने इस घटना को "पूरी तरह से अनुचित" बताया और कहा कि कोर्टरूम के अंदर ऐसा व्यवहार ठीक नहीं है।
मालाकार ने मीडिया से कहा, "यह पूरी तरह से अनुचित घटना है। कोर्टरूम के अंदर ऐसी घटनाएं बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। अगर कोर्ट चाहती तो खुद से (suo motu) कार्रवाई शुरू कर सकती थी।"
ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के दार्जिलिंग जिला सचिव दिवाकर रॉय ने भी कोर्ट की कार्यवाही की निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कोर्टरूम निष्पक्ष न्याय की जगह है और इसे धार्मिक और राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए। रॉय के अनुसार, किसी भी हालत में कोर्टरूम के अंदर धार्मिक या राजनीतिक नारे नहीं लगाए जाने चाहिए।
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