मीडिया संगठनों ने IT नियमों के मसौदे को वापस लेने की मांग की, सेल्फ-सेंसरशिप के खतरों को लेकर चेतावनी दी

Written by sabrang india | Published on: April 13, 2026
प्रेस क्लब में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, डिजीपब, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन प्रेस कॉर्प्स, नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पत्रकारों और पदाधिकारियों ने इन संशोधनों पर चर्चा की।


फोटो साभार : इंडियन एक्सप्रेस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

छह भारतीय मीडिया संगठनों ने ड्राफ्ट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) सेकेंड अमेंडमेंट रूल्स, 2026 को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है।

ये IT नियम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन, मैसेजिंग सेवाओं और ऑनलाइन समाचार एग्रीगेटर को नियंत्रित करते हैं। ये संशोधन 30 मार्च से सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए खुले हैं।

शनिवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, डिजीपब, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन प्रेस कॉर्प्स, नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पदाधिकारियों ने इन संशोधनों पर चर्चा की।

उनके प्रस्ताव में संशोधनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की गई। उनका कहना है कि “ड्राफ्ट IT नियम 2026 का अनुपालन ढांचा आर्थिक रूप से विनाशकारी हो सकता है, साथ ही यह ‘भय का माहौल’ पैदा करता है, जिसमें कंटेंट निर्माता एल्गोरिथम द्वारा गलत पहचान के जोखिम से बचने के लिए खुद ही सेंसरशिप करने लगेंगे।”

इन संशोधनों के तहत मंत्रालयों की सलाह और स्पष्टीकरणों का पालन करना अनिवार्य होगा, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए बाध्यकारी होंगे। ये संशोधन समाचार पोर्टलों और OTT सेवाओं के लिए बनी आचार संहिता का विस्तार करते हुए उसे उन सभी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर भी लागू करते हैं, जो समाचारों पर चर्चा करते हैं।

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि सरकार को “आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत विभिन्न एजेंसियों को दी गई शक्तियों को वापस लेना चाहिए, क्योंकि इनसे प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को कमजोर किया गया है।” साथ ही, फरवरी 2026 में IT नियम, 2021 में किए गए उस संशोधन को भी वापस लेने की मांग की गई है, जिसमें मध्यस्थों के लिए कंटेंट हटाने की समय-सीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई है।

इसके अलावा, केंद्र से IT नियम, 2009 के नियम 16 को वापस लेने की मांग की गई है, “जो बिना जवाबदेही के अभिव्यक्ति को बाधित करने की अनुमति देता है।” साथ ही, “सहयोग पोर्टल के कठोर संचालन” को भी वापस लेने की मांग की गई है, जो बिना विधायी स्वीकृति के और IT अधिनियम, 2000 की धारा 79A के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहा है।

पत्रकार समूहों ने कहा कि कानून में कोई भी ऐसा बदलाव, जो अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मीडिया की संवैधानिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता हो, उस पर केंद्र सरकार को ड्राफ्ट कानून प्रकाशित करने से पहले संबंधित पक्षों से परामर्श करना चाहिए।

गौरतलब है कि IT नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के तहत समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़ी जानकारी के संदर्भ में “कम्युनिटी नोट्स” को औपचारिक रूप से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नियामक दायरे में लाया जाएगा। यह फीचर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उपयोगकर्ताओं द्वारा संचालित फैक्ट-चेकिंग टूल है। इन संशोधनों के लागू होने के बाद सरकार को ऐसे कंटेंट को हटाने की मांग करने का अधिकार मिल सकता है, जो आधिकारिक दावों को चुनौती देता या सुधारता हो।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने, नाम न छापने की शर्त पर, बताया कि जब कोई कम्युनिटी नोट समाचार, राजनीति या सार्वजनिक नीति से संबंधित प्रतीत होता है, तो विस्तारित ढांचे के तहत उसकी जांच की जा सकती है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी मंत्री के दावे को चुनौती देने या नीतिगत संदर्भ देने वाले कम्युनिटी नोट्स भी इस दायरे में आएंगे, तो उन्होंने कहा, “यह हर मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा, लेकिन ऐसा संभव है।”

ध्यान देने योग्य है कि 30 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने IT नियमों में संशोधन जारी किए, जिनके तहत ऑनलाइन सामग्री से संबंधित भाग-III को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया है।

इस संशोधन का एक अहम पहलू सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाना है। इसमें इंफ्लुएंसर्स के साथ-साथ सामान्य उपयोगकर्ता भी शामिल होंगे, जो किसी सामग्री को साझा करते हैं। फिलहाल, मंत्रालय का कार्यक्षेत्र केवल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट तक सीमित है।

इस प्रस्तावित विस्तार के बाद मंत्रालय को उस श्रेणी की सामग्री पर भी अधिकार मिल जाएगा, जिसे वह अभी तक विनियमित नहीं करता है।

सूत्रों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में ‘एक्स’ पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों के कई पोस्ट पर कम्युनिटी नोट्स जोड़े गए थे, जिनकी जानकारी सरकार ने प्लेटफॉर्म को दी थी।

इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की पोस्ट भी शामिल थीं। कुछ पोस्टों के नीचे लगे कम्युनिटी नोट्स बाद में हटा दिए गए।

14 फरवरी को एक व्यापार शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के वीडियो के नीचे एक कम्युनिटी नोट जोड़ा गया था, जिसमें सामाजिक न्याय नीतियों को लेकर संवैधानिक सवाल उठाए गए थे। बाद में यह टिप्पणी हटा दी गई।

इसी तरह, गृह मंत्री अमित शाह के बयान से जुड़े एक पोस्ट के नीचे भी कम्युनिटी नोट जोड़ा गया था, जिसमें असम में सरकार के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था। यह नोट कभी दिखाई देता है, तो कभी हट जाता है।

हालांकि, सभी कम्युनिटी नोट्स नहीं हटाए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 28 जनवरी की पोस्ट के नीचे एक नोट अब भी दिखाई दे रहा है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्राध्यक्ष के रूप में वे सभी नागरिकों की सेवा करने के लिए बाध्य हैं, न कि किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र की।

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