आईटी नियमों में बदलावों के साथ सरकार ने अब ‘एक्स’ के कम्युनिटी नोट्स पर निगरानी की मांग की

Written by sabrang india | Published on: April 11, 2026
सरकार अब आईटी नियमों में प्रस्तावित संशोधनों के तहत समाचार और समसामयिक मामलों से जुड़ी जानकारी के संदर्भ में ‘एक्स’ के कम्युनिटी नोट्स को औपचारिक रूप से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नियामक दायरे में लाने पर विचार कर रही है। इसके लागू होने पर सरकार को ऐसे कंटेंट को हटाने की मांग करने का अधिकार मिल सकता है, जो उसके आधिकारिक दावों को चुनौती देता या उनमें सुधार करता है।


साभार : विकिपीडिया कॉमन्स

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के तहत समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़ी जानकारी के संदर्भ में “कम्युनिटी नोट्स” को औपचारिक रूप से सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नियामक दायरे में शामिल किया जाएगा। यह फीचर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यूजर्स द्वारा संचालित फैक्ट-चेकिंग टूल है। इन संशोधनों के लागू होने के बाद सरकार को ऐसे कंटेंट को हटाने की मांग करने का अधिकार मिल जाएगा, जो आधिकारिक दावों को चुनौती देता या सुधारता हो।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नाम न छापने की शर्त पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने न्यूज पेपर को बताया कि जब कोई कम्युनिटी नोट समाचार, राजनीति या सार्वजनिक नीति से संबंधित प्रतीत होता है, तो विस्तारित ढांचे के तहत उसकी जांच की जा सकती है।

इस मुद्दे पर जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या किसी मंत्री के दावे को सही करने या किसी नीतिगत विषय पर संदर्भ देने वाले कम्युनिटी नोट्स भी इस श्रेणी में आएंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, “यह हर मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा, लेकिन ऐसा होना संभव है।”

ज्ञात हो कि 30 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन जारी किए थे, जिनके तहत ऑनलाइन सामग्री से संबंधित भाग-III को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया है।

इस संशोधन का एक अहम पहलू सोशल मीडिया पर यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाना है। इसमें इंफ्लुएंसर के साथ-साथ सामान्य यूजर्स भी शामिल होंगे, जो किसी सामग्री को दोबारा साझा करते हैं। फिलहाल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्यक्षेत्र केवल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट तक सीमित है।

ध्यान देने योग्य है कि इस प्रस्तावित विस्तार के बाद मंत्रालय को उस श्रेणी की सामग्री पर भी औपचारिक अधिकार मिल जाएगा, जिसे वह फिलहाल विनियमित नहीं करता है।

कंपनी से जुड़े जानकारों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में ‘एक्स’ पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों द्वारा किए गए कई पोस्ट पर कम्युनिटी नोट्स जोड़े गए थे, जिनकी जानकारी सरकार ने प्लेटफॉर्म को दी थी।

इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की पोस्ट भी शामिल थीं। कुछ खास पोस्टों के नीचे लगे कम्युनिटी नोट्स अब प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए हैं।

14 फरवरी को एक व्यापार शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के वीडियो के नीचे एक कम्युनिटी नोट जोड़ा गया था, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों से जुड़ी सामाजिक न्याय नीतियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती हैं। बाद में इस टिप्पणी को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

इसी तरह भाजपा के आधिकारिक अकाउंट पर गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों के निर्वासन संबंधी बयान के नीचे भी एक कम्युनिटी नोट जोड़ा गया था, जिसमें इस मुद्दे पर असम में सरकार के अपने रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था। यह टिप्पणी कभी दिखाई देती है तो कभी गायब हो जाती है।

हालांकि, आधिकारिक पोस्ट्स पर मौजूद सभी कम्युनिटी नोट्स हटाए नहीं गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 28 जनवरी की पोस्ट के नीचे दिया गया एक नोट अभी भी प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्राध्यक्ष के रूप में वे संवैधानिक रूप से सभी नागरिकों की सेवा करने के लिए बाध्य हैं, न कि किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र की।

अपनी पोस्ट में राष्ट्रपति ने कहा था कि सरकार हाशिए पर पड़े और कमजोर समुदायों के लिए काम करती है।

द वायर ने लिखा, इस विस्तारित ढांचे के तहत यदि सरकार किसी कम्युनिटी नोट को गैरकानूनी घोषित करती है, तो प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ेगी। इसके तहत प्लेटफॉर्म को उस नोट को हटाने या अवरुद्ध करने का निर्देश दिया जाएगा, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर हटाना या उसकी पहुंच को सीमित करना अनिवार्य होगा।

इस मामले में कई अहम सवाल उठते हैं। पहला सवाल जवाबदेही से जुड़ा है, क्योंकि कम्युनिटी नोट किसी एक यूजर द्वारा नहीं, बल्कि कई यूजर्स के सामूहिक योगदान से तैयार होते हैं।

इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “इसका निर्धारण अदालत में इस आधार पर किया जाएगा कि इसमें किन-किन लोगों ने योगदान दिया है। यदि ‘एक्स’ की संपादन प्रक्रिया में कोई भूमिका पाई जाती है, तो उसकी भी जवाबदेही तय होगी।”

नोट में योगदान देने वाले उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ प्लेटफॉर्म को भी मामले के आधार पर जांच का सामना करना पड़ सकता है।

दूसरा मुद्दा यह है कि क्या मंत्रालय इसे विनियमित कर सकता है। कम्युनिटी नोट्स पूरी तरह यूजर्स द्वारा तैयार किए जाते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होस्ट किए जाते हैं।

इस सप्ताह प्रस्तावित बदलावों पर हुए परामर्श में शामिल इंडस्ट्री और नागरिक समाज के समूहों ने इसका विरोध जताया। साथ ही, मध्यस्थों ने मंत्रालय के निर्देशों के अधीन आने वाले प्रावधानों में अपनी शामिलीकरण को लेकर सवाल उठाए।

सरकार ने हितधारकों को बताया कि मध्यस्थों को शामिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे ऐसी सामग्री तक पहुंच के माध्यम के रूप में कार्य करें और जरूरत पड़ने पर यूजर्स की पहचान करने में सहायता कर सकें।

इस संबंध में नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्तावित विस्तार का दायरा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।

इंडियन गवर्नेंस एंड पॉलिसी प्रोजेक्ट (आईजीपी) के पार्टनर ध्रुव गर्ग ने कहा, “आईटी नियमों के भाग-III के दायरे का प्रस्तावित विस्तार इतना व्यापक लगता है कि यह समसामयिक मामलों और समाचारों से मिलती-जुलती, मध्यस्थ-आधारित और कम्युनिटी-ड्रिवन सामग्री को भी अपने दायरे में शामिल कर सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे विकिपीडिया या ‘एक्स’ के कम्युनिटी नोट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं, जहां सामग्री किसी एक यूजर या स्वयं प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित नहीं होती, बल्कि सामूहिक रूप से लगातार विकसित होती रहती है।”

ध्रुव गर्ग के अनुसार, यह व्याख्या सरकार के स्वयं के विवरण के बिल्कुल विपरीत है।

उल्लेखनीय है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा हितधारकों के साथ परामर्श के बाद, मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने प्रस्तावित बदलावों को मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक बताया था।

उन्होंने कहा था, “ये संशोधन हमें किसी भी प्रकार की व्यापक शक्तियां नहीं देते… ये केवल स्पष्टीकरणात्मक और आकस्मिक प्रकृति के हैं।”

इस संबंध में गर्ग ने कहा कि मंत्रालय को अपना इरादा स्पष्ट करना चाहिए।

गौरतलब है कि अप्रैल 2024 में ‘एक्स’ ने भारत में कम्युनिटी नोट्स फीचर का विस्तार किया था, जिससे यहां के यूजर्स भी योगदानकर्ता के रूप में जुड़ सके। इस प्रणाली में केवल वही नोट्स पोस्ट के नीचे दिखाई देते हैं, जिन्हें विभिन्न दृष्टिकोण रखने वाले यूजर्स द्वारा उपयोगी माना जाता है।

‘एक्स’ का कहना है कि वह कम्युनिटी नोट्स को तब तक नियंत्रित नहीं करता, जब तक वे प्लेटफॉर्म के नियमों का उल्लंघन न करें। हालांकि, प्रस्तावित ढांचे के तहत इस दावे की भी जांच हो सकती है।

ज्ञात हो कि प्रस्तावित बदलावों पर जनता और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 14 अप्रैल निर्धारित की गई थी। हालांकि, अखबार को मिली जानकारी के अनुसार उद्योग और अन्य हितधारकों के दबाव के चलते इस समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाए जाने की संभावना है।

‘एक्स’ के अलावा ‘मेटा’ ने भी संकेत दिया है कि वह अपने अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स- पर कम्युनिटी नोट्स फीचर शुरू करने की योजना बना रहा है। हालांकि, यह सुविधा फिलहाल केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में उपलब्ध है और भारत में इसे लागू करने के लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।

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