असम: स्कूल में टिफिन में बीफ लाने के आरोप में महिला गिरफ्तार, बेटा हिरासत में

Written by sabrang india | Published on: June 10, 2026
पुलिस ने बताया कि दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, गलत तरीके से रोकने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करने तथा सामूहिक रूप से अपराध करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।



असम के गोलपारा जिले के एक सरकारी स्कूल में एक मुस्लिम महिला और उसके नाबालिग बेटे को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि छात्र अपनी मां द्वारा तैयार किए गए टिफिन में बीफ (गोमांस) लेकर स्कूल आया था और उसने अपने दो हिंदू सहपाठियों को उसे खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, गलत तरीके से रोकने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करने तथा सामूहिक रूप से अपराध करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार छात्र के साथ चार अन्य मुस्लिम छात्र भी थे, जिन्होंने कथित तौर पर दो हिंदू छात्रों को बीफ खाने के लिए देने का प्रयास किया।

पुलिस ने बताया कि बाकी चार छात्रों से कृष्णाई पुलिस थाने में पूछताछ की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार नाबालिग छात्र और उसकी मां नूर साहिदा बेगम को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। यह घटना शुक्रवार को हबराघाट हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई थी, जबकि मामला शनिवार सुबह प्रकाश में आया।

दो हिंदू छात्रों के परिवारों ने कृष्णाई पुलिस थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। कृष्णाई, गोलपारा जिले का एक ऐसा क्षेत्र है जहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत अधिक है, हालांकि हिंदू समुदाय की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है।

शनिवार को गोलपारा के जिला आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने स्कूल का दौरा किया, क्योंकि इस घटना के बाद जिले में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले केरल के कोल्लम जिले के एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में मुस्लिम बच्चों को दाखिला देने से इनकार किए जाने की शिकायत सामने आई थी। मीडियावन टीवी के अनुसार, यह आरोप सस्थमकोट्टा स्थित डॉ. सी.टी. ईपेन मेमोरियल आरएचएस स्कूल की हेडमिस्ट्रेस पर लगाया गया था।

माध्यम ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि हेडमिस्ट्रेस ने अभिभावकों और छात्रों से कहा कि मुस्लिम बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने बच्चों के सफेद कपड़े पहनकर आने पर भी आपत्ति जताई थी। मकतूब मीडिया के मुताबिक, चक्कुवल्ली के एक 'दर्स' (इस्लामिक शिक्षा केंद्र) के छात्रों सहित लगभग 30 छात्रों ने स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया था।

शिकायतकर्ताओं का कहना था कि शिक्षकों और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के प्रतिनिधियों के अनुरोध के बावजूद छात्रों को दाखिला नहीं दिया गया। उनका यह भी आरोप था कि स्कूल प्रबंधन और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को शिकायत सौंपे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में कक्षा 5 से 10 तक कुल 63 छात्र हैं, जबकि हाई स्कूल सेक्शन में केवल एक मुस्लिम छात्र नामांकित है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि शिक्षकों ने छात्र संख्या बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए थे, क्योंकि नामांकन में और गिरावट आने पर कुछ अंशकालिक शिक्षकों के पद समाप्त हो सकते थे।

पीटीए के उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि दाखिला प्रक्रिया के दौरान बच्चों की मुस्लिम पहचान और उनके पहनावे को भी मुद्दा बनाया गया।

कुछ शिक्षकों का दावा था कि हेडमिस्ट्रेस पहले भी इसी प्रकार का व्यवहार कर चुकी हैं।

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