केरल में स्कूल की हेडमिस्ट्रेस पर मुस्लिम छात्रों को दाखिला देने से इनकार करने का आरोप

Written by sabrang india | Published on: June 9, 2026
केरल के शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कहा है कि यदि शिकायत औपचारिक रूप से प्राप्त होती है और जांच में सही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।


साभार : अनस्पलैश

केरल के कोल्लम जिले के एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में मुस्लिम बच्चों को दाखिला देने से इनकार किए जाने की शिकायत सामने आई है। मीडियावन टीवी के अनुसार, यह आरोप सस्थमकोट्टा स्थित डॉ. सी.टी. ईपेन मेमोरियल आरएचएस स्कूल की हेडमिस्ट्रेस पर लगाया गया है।

माध्यम ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि हेडमिस्ट्रेस ने अभिभावकों और छात्रों से कहा कि मुस्लिम बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने बच्चों के सफेद कपड़े पहनकर आने पर भी आपत्ति जताई। मकतूब मीडिया के मुताबिक, चक्कुवल्ली के एक 'दर्स' (इस्लामिक शिक्षा केंद्र) के छात्रों सहित लगभग 30 छात्रों ने स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया था।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिक्षकों और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के प्रतिनिधियों के अनुरोध के बावजूद छात्रों को दाखिला नहीं दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को शिकायत सौंपे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में वर्तमान में कक्षा 5 से 10 तक कुल 63 छात्र हैं, जबकि हाई स्कूल सेक्शन में केवल एक मुस्लिम छात्र नामांकित है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि शिक्षकों ने छात्र संख्या बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए थे, क्योंकि नामांकन में और गिरावट आने पर कुछ अंशकालिक शिक्षकों के पद समाप्त हो सकते थे।

पीटीए के उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दाखिला प्रक्रिया के दौरान बच्चों की मुस्लिम पहचान और उनके पहनावे को भी मुद्दा बनाया गया।

कुछ शिक्षकों का दावा है कि हेडमिस्ट्रेस पहले भी इसी प्रकार का व्यवहार कर चुकी हैं।

इस बीच, केरल के शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कहा कि यदि शिकायत औपचारिक रूप से प्राप्त होती है और जांच में सही पाई जाती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

ज्ञात हो कि स्कूलों में वंचित समूहों के छात्रों के साथ भेदभाव के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इसी वर्ष की शुरुआत में मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक बड़े निजी स्कूल पर हिंदू और मुस्लिम छात्रों के लिए अलग-अलग वार्षिक समारोह (एनुअल फंक्शन) आयोजित करने तथा धर्म के आधार पर कक्षाओं में छात्रों को अलग रखने के आरोप लगे थे।

द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर के मुस्लिम-बहुल खजराना क्षेत्र में स्थित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बॉम्बे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध है और इसका संचालन सत्यवती अर्गल एजुकेशन सोसाइटी द्वारा किया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2019 में स्थापित इस सह-शैक्षिक संस्थान में लगभग 70 प्रतिशत छात्र मुस्लिम समुदाय से थे।

यह मामला तब सामने आया जब स्कूल ने 2 और 3 फरवरी को दो अलग-अलग वार्षिक समारोह आयोजित किए। मुस्लिम अभिभावकों का आरोप था कि उन्हें पहले से यह नहीं बताया गया था कि समारोह धर्म के आधार पर अलग-अलग आयोजित किए जा रहे हैं।

मीर गुलरेज़ अली, जिनका बेटा दसवीं कक्षा में पढ़ता है, ने कहा, "वहां केवल मुस्लिम छात्र और उनके अभिभावक मौजूद थे। स्टाफ भी सीमित था और किसी मुख्य अतिथि को नहीं बुलाया गया था। अगले दिन हिंदू छात्रों के लिए आयोजित कार्यक्रम में पूरा स्टाफ मौजूद था और एक मुख्य अतिथि को भी आमंत्रित किया गया था।"

एक अन्य अभिभावक उजमा ने कहा कि पहला कार्यक्रम अपेक्षाकृत फीका लगा। उन्होंने आरोप लगाया, "जब हम कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तो वहां केवल मुस्लिम छात्र और उनके अभिभावक थे। कोई मुख्य अतिथि नहीं था और बहुत कम स्टाफ सदस्य मौजूद थे। यह एक सामान्य वार्षिक समारोह जैसा नहीं लगा। अगले दिन का कार्यक्रम कहीं अधिक बड़ा और भव्य था।"

कुछ अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाजन केवल वार्षिक समारोह तक सीमित नहीं था। उनका दावा था कि छात्रों को धर्म के आधार पर अलग-अलग सेक्शनों में रखा जाता था और पिछले वर्षों में स्कोरकार्ड तथा स्कूल मैगजीन से मुस्लिम उपनाम भी हटा दिए गए थे।

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