मुंबई। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के टेंभुर्णी में सामाजिक कार्यकर्ता बशीर जागीरदार करीब 90 हजार लोगों के स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए अऩशन पर बैठे। करीब 200 लोग बशीर जागीरदार का साथ निभाते हुए उनके साथ ही अनशन पर बैठे। 13 मार्च को बशीर जागीरदार के अनशन का दिन था। अनशनकर्ताओं की मांग बस इतनी सी है कि टेंभुर्णी में जिला चिकित्सालय बनाया जाए जो अभी तक नहीं बना है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, टेंभुर्णी शहर की जनसंख्या 30 हजार के आसपास है। इसके साथ ही 40 गांव इस शहर के आसपास स्थित हैं। करीब 90 हजार लोग इस इलाके में आते हैं जिनके लिए जिला चिकित्सालय का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। राज्य सरकार की लापरवाही के चलते यहां जिला अस्पताल का काम अभी अधर में ही लटका हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार, वे पिछले 8 महीने से प्रशासन से बात करने की कोशिश कर रहे हैं और सरकारी अस्पताल के अभाव में लगातार जनमानस को होने वाली समस्याओं से अवगत करा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही।
इस इलाके में 70 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। छोटी-बड़ी किसी भी बीमारी के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल भी मुंहमांगी फीस वसूलते हैं। कई बार गरीब लोगों के पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते ऐसी स्थिति में वे कर्ज लेकर अस्पताल का रुख करते हैं। सरकारी अस्पताल के अभाव में लोगों को आर्थिक स्तर पर काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ऐसे में प्रशासन का ध्यान जनता की समस्याओं की तरफ खींचने के लिए बशीर जागीरदार ने 11 मार्च को अनशन पर बैठने का फैसला लिया। उनके सपोर्ट में टेंभुर्णी और आसपास के गाँवों से 200 से ज्यादा लोग भी आ गए हैं। इसके साथ ही उन्हें 5 संघटनों व कई राजनीतिक पार्टियों ने उऩ्हें समर्थन दिया है। इस अनशन ने इलाके के लोगों में एक आशा बनी हुई है कि शायद अब प्रशासन जिला अस्पताल का कार्य पूरा करा दे।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, टेंभुर्णी शहर की जनसंख्या 30 हजार के आसपास है। इसके साथ ही 40 गांव इस शहर के आसपास स्थित हैं। करीब 90 हजार लोग इस इलाके में आते हैं जिनके लिए जिला चिकित्सालय का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। राज्य सरकार की लापरवाही के चलते यहां जिला अस्पताल का काम अभी अधर में ही लटका हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार, वे पिछले 8 महीने से प्रशासन से बात करने की कोशिश कर रहे हैं और सरकारी अस्पताल के अभाव में लगातार जनमानस को होने वाली समस्याओं से अवगत करा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही।
इस इलाके में 70 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। छोटी-बड़ी किसी भी बीमारी के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल भी मुंहमांगी फीस वसूलते हैं। कई बार गरीब लोगों के पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते ऐसी स्थिति में वे कर्ज लेकर अस्पताल का रुख करते हैं। सरकारी अस्पताल के अभाव में लोगों को आर्थिक स्तर पर काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ऐसे में प्रशासन का ध्यान जनता की समस्याओं की तरफ खींचने के लिए बशीर जागीरदार ने 11 मार्च को अनशन पर बैठने का फैसला लिया। उनके सपोर्ट में टेंभुर्णी और आसपास के गाँवों से 200 से ज्यादा लोग भी आ गए हैं। इसके साथ ही उन्हें 5 संघटनों व कई राजनीतिक पार्टियों ने उऩ्हें समर्थन दिया है। इस अनशन ने इलाके के लोगों में एक आशा बनी हुई है कि शायद अब प्रशासन जिला अस्पताल का कार्य पूरा करा दे।