50 पैसे प्रति किलो: प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से महाराष्ट्र के किसान कर्ज के बोझ तले दबे

Written by sabrang india | Published on: May 13, 2026
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सोलंके ने इस सीजन में 1 लाख रुपये से ज्यादा का निवेश किया था — यह पैसा उन्होंने एक स्थानीय साहूकार से उधार लिया था।


साभार : इंडियन एक्सप्रेस

जब जितेंद्र सोलंके 8 मई को नासिक के सताना तालुका स्थित सताना कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में प्याज से भरा अपना ट्रैक्टर लेकर पहुंचे, तो उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम उनकी लागत तो निकल ही आएगी। लेकिन उन्हें मिला सिर्फ 50 पैसे प्रति किलोग्राम — उस उपज के लिए आधा रुपया, जिसे उगाने में उन्होंने एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, करेगांव गांव के छोटे किसान सोलंके ने कहा, “मेरे पास मध्यम आकार के प्याज थे, न कि छोटे ‘गोलटी’ किस्म वाले, जिन्हें आमतौर पर कम दाम मिलते हैं। पूरे दिन इंतजार करने के बाद सिर्फ एक व्यापारी आया और उसने यही दाम लगाया।”

सोलंके 1.5 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और पूरी जमीन पर प्याज ही उगाते हैं। उन्होंने कहा, “जब मैंने कम दामों की शिकायत करने के लिए APMC अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि वे इसमें दखल नहीं दे सकते। मेरे पास बेचने के अलावा कोई चारा नहीं था।”

आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सोलंके ने इस सीजन में 1 लाख रुपये से ज्यादा का निवेश किया था — यह पैसा उन्होंने एक स्थानीय साहूकार से उधार लिया था। उनकी पूरी फसल, जो लगभग 100 क्विंटल थी और जिसका ज्यादातर हिस्सा बेमौसम बारिश से खराब हो गया था, उससे उन्हें सिर्फ 15,000 रुपये मिले। अब उन पर 85,000 रुपये का कर्ज बाकी है, जिसमें मूलधन और बढ़ता हुआ ब्याज शामिल है।

उनकी स्थिति को और भी तकलीफदेह बनाने वाली बात इसका समय है। ठीक छह दिन पहले, 2 मई को उसी खेत के प्याज 3.50 रुपये प्रति किलोग्राम बिके थे। सोलंके ने कहा, “सरकार को दखल देना चाहिए और कम से कम 20 रुपये प्रति किलोग्राम का दाम तय करना चाहिए। वरना हम गुजारा कैसे करेंगे? अगर यही चलता रहा, तो किसानों की आत्महत्याएं बढ़ती रहेंगी।”

जहां सोलंके की आपबीती महाराष्ट्र के प्याज बेल्ट में फैली भारी तकलीफ को दिखाती है, वहीं छत्रपति संभाजीनगर से मिली एक मुड़ी-तुड़ी भुगतान रसीद ने इस संकट को सबसे मार्मिक ढंग से सामने रखा और यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

पैठण तालुका के वारुडी गांव के 45 वर्षीय किसान प्रकाश गलाधर 3 मई को प्याज की 25 बोरियां — जिनका कुल वजन 1,262 किलोग्राम था — लेकर पैठण APMC पहुंचे। नीलामी के बाद उनकी कुल कमाई 1,262 रुपये हुई, यानी 1 रुपया प्रति किलोग्राम।

लेकिन असली झटका कटौतियों के बाद लगा। परिवहन, तौल, भंडारण और हैंडलिंग के खर्चों ने उस थोड़ी-सी कमाई को भी खत्म कर दिया और गलाधर को बताया गया कि उन्हें व्यापारी को अपनी कमाई से भी 1 रुपया ज्यादा देना है।

गलाधर ने कहा, “मैंने करीब 12 क्विंटल प्याज बेचा और मुझे 1 रुपया प्रति किलो का रेट मिला। जब उन्होंने सारे खर्च काट लिए, तो मेरे पास कुछ नहीं बचा, बल्कि मुझे 1 रुपया और चुकाना था। मैंने बचा हुआ स्टॉक फेंक दिया। उसे यहां लाने का कोई फायदा नहीं था।”

वह रसीद WhatsApp ग्रुप और Instagram पर तेजी से फैल गई। इस रसीद में दिखाया गया था कि एक किसान को, जिसने पूरे सीजन कड़ी मेहनत की थी, व्यापारी को 1 रुपया और देना है। यह इस बात का प्रतीक बन गई कि प्याज की खेती का आर्थिक ढांचा कितना टूट चुका है।

गलाधर की मुश्किलें सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं हैं। कुछ साल पहले उन्होंने अपनी बेटी की शादी की थी और उस मौके का आर्थिक बोझ अभी भी उन पर बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे अभी भी कर्जदाताओं के 5 लाख रुपये से ज्यादा चुकाने हैं। प्याज के इस संकट ने मुझे पूरी तरह तोड़ दिया है।”

एक्सप्रेस से बात करते हुए पैठण APMC के व्यापारी इब्राहिम बागवान — जिन्होंने गलाधर की फसल खरीदी थी — ने दो मुख्य कारणों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “कर्नाटक, तेलंगाना और दूसरे राज्यों में प्याज की आवक अचानक बढ़ गई है। इसी वजह से जो स्थानीय प्याज पहले वहां बिकता था, अब उसे महाराष्ट्र की APMC मंडियों में लाया जा रहा है। इससे बाजार में प्याज की आपूर्ति जरूरत से ज्यादा हो गई है और कीमतें नीचे गिर गई हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “गलाधर की फसल की गुणवत्ता भी औसत से कम थी, जिसका असर उसकी कीमत पर पड़ा। इसी मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज अभी 7 से 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं।”

व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में यह भारी गिरावट कई कारणों के एक साथ सामने आने का नतीजा है। Agro Indi Exim Pvt Ltd के मालिक और पुणे की गुलटेकड़ी थोक मंडी के व्यापारी शिवम धुमल ने बताया कि पूरे महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश की वजह से प्याज के मौजूदा स्टॉक की शेल्फ लाइफ कम हो गई है।

उन्होंने कहा, “गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ा है, जिसकी वजह से कीमतें कम हैं। इस समय गुलटेकड़ी मंडी में गुणवत्ता के हिसाब से प्याज के थोक रेट 5 से 12 रुपये प्रति किलो के बीच चल रहे हैं।”

उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के निर्यात मांग पर पड़ने वाले असर की ओर भी इशारा किया। धुमल ने कहा, “निर्यात में कमी आने से घरेलू आपूर्ति बढ़ गई है। लेकिन कीमतों में सुधार होना चाहिए। हमें उम्मीद है कि जून तक कीमतें 20-25 रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली जाएंगी और दिवाली के आसपास 35-40 रुपये तक पहुंच सकती हैं।”

किसानों के प्रतिनिधियों की मांग

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

दिघोले ने कहा, “हमने सरकार से अल्पकालिक राहत उपाय के तौर पर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने को कहा है। हमारी यह भी मांग है कि नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) खरीद शुरू करें। उन्हें केवल APMC मंडियों से ही खरीद करनी चाहिए, ताकि बिचौलियों को हटाया जा सके और इसका लाभ वास्तव में किसानों तक पहुंचे।”

ढांचागत सुधारों पर उन्होंने कहा, “खेती में लगने वाली चीजों — खाद, बीज, मजदूरी, सिंचाई, भंडारण और परिवहन — की बढ़ती लागत को देखते हुए, प्याज की खरीद के लिए न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) 3,000 रुपये प्रति क्विंटल (30 रुपये प्रति किलोग्राम) तय किया जाना चाहिए। इस तरह की सुरक्षा के बिना किसान हर मौसम में बाजार की दया पर ही निर्भर रहेंगे।”

NCP (SP) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा, “यह बेहद निराशाजनक है कि किसानों को — जिनमें ज्यादातर छोटे और सीमांत किसान हैं — सिर्फ 1 रुपया प्रति किलोग्राम का भाव मिल रहा है। वे न्याय के हकदार हैं। सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और किसानों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।”

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