देवबंद गांव में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। विवाद के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थरबाज़ी और गोलीबारी के आरोप लगाए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई
सहारनपुर जिले के देवबंद के लालवाला गांव में शनिवार को जमीन विवाद को लेकर ठाकुर और दलित समुदायों के लोगों के बीच हुई झड़प में आधा दर्जन लोग घायल हो गए।
उत्तर प्रदेश प्रशासन ने हिंसा की आगे की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया है।
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, दलित ग्रामीण नरेश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले रविंद्र कुमार राणा को ठेके पर खेती करने के लिए दो बीघा जमीन दी थी, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद राणा ने जमीन लौटाने से इनकार कर दिया।
नरेश ने आगे कहा, “राणा ने कागजातों में भी हेरफेर किया और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जमीन के मालिक के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया। हाल ही में मैं एक जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मिला और उनसे अपनी जमीन वापस दिलाने में मदद करने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने राणा को बुलाया, लेकिन वे उसे जमीन मुझे वापस देने के लिए राजी नहीं कर पाए।”
नरेश ने बताया कि उन्होंने भीम सेना के सदस्यों से संपर्क किया, जिन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया। नरेश ने कहा, “वे आज (शनिवार) मुझसे मिले और हम अपनी जमीन वापस लेने गए। ठाकुरों ने पहले हम पर पत्थर फेंके और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। जैसे ही यह खबर फैली, दलित ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए और उन्होंने ठाकुरों पर पत्थर फेंके।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ठाकुर समुदाय के सदस्यों का पक्ष ले रहे थे, क्योंकि उनके राजनीतिक संबंध थे।
सर्किल अधिकारी अभितेश भाटी ने कहा, “हिंसा के बाद स्थिति शांतिपूर्ण है। घायलों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। गांव में शांति बहाल करने के लिए हमने पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं।”
वहीं, राणा ने कहा कि उन्होंने नरेश के पिता से 32 बीघा जमीन खरीदी थी।
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सहारनपुर जिले के देवबंद के लालवाला गांव में शनिवार को जमीन विवाद को लेकर ठाकुर और दलित समुदायों के लोगों के बीच हुई झड़प में आधा दर्जन लोग घायल हो गए।
उत्तर प्रदेश प्रशासन ने हिंसा की आगे की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया है।
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, दलित ग्रामीण नरेश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले रविंद्र कुमार राणा को ठेके पर खेती करने के लिए दो बीघा जमीन दी थी, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद राणा ने जमीन लौटाने से इनकार कर दिया।
नरेश ने आगे कहा, “राणा ने कागजातों में भी हेरफेर किया और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जमीन के मालिक के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया। हाल ही में मैं एक जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मिला और उनसे अपनी जमीन वापस दिलाने में मदद करने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने राणा को बुलाया, लेकिन वे उसे जमीन मुझे वापस देने के लिए राजी नहीं कर पाए।”
नरेश ने बताया कि उन्होंने भीम सेना के सदस्यों से संपर्क किया, जिन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया। नरेश ने कहा, “वे आज (शनिवार) मुझसे मिले और हम अपनी जमीन वापस लेने गए। ठाकुरों ने पहले हम पर पत्थर फेंके और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। जैसे ही यह खबर फैली, दलित ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए और उन्होंने ठाकुरों पर पत्थर फेंके।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ठाकुर समुदाय के सदस्यों का पक्ष ले रहे थे, क्योंकि उनके राजनीतिक संबंध थे।
सर्किल अधिकारी अभितेश भाटी ने कहा, “हिंसा के बाद स्थिति शांतिपूर्ण है। घायलों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। गांव में शांति बहाल करने के लिए हमने पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं।”
वहीं, राणा ने कहा कि उन्होंने नरेश के पिता से 32 बीघा जमीन खरीदी थी।
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