यूपी में बुज़ुर्ग मुस्लिम फेरीवाले पर हमला और लूटपाट

Written by sabrang india | Published on: May 8, 2026
2 मई को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कथित तौर पर एक बुज़ुर्ग मुस्लिम फेरीवाले के साथ मारपीट की गई, उनसे लूटपाट की गई और उनके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणियां की गईं।


फोटो साभार: मुस्लिम मिरर

उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। प्रतापगढ़ के डेरवा इलाके के रहने वाले मकसूद अली शाम करीब 4 बजे घर लौट रहे थे, तभी मनोज नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें पास के एक गांव में रोक लिया। बिना किसी उकसावे के आरोपी ने कथित तौर पर बुज़ुर्ग व्यक्ति को गालियां देना शुरू कर दिया, उनकी दाढ़ी खींची, टोपी छीन ली और लाठियों तथा लोहे की रॉड से उनकी पिटाई की।

पीड़ित के अनुसार, मनोज ने सांप्रदायिक टिप्पणियां करते हुए पूछा, “तुम यहां क्या कर रहे हो?” और उन्हें “पाकिस्तान चले जाने” को कहा। उसने अली का चेहरा तोड़ने की धमकी भी दी। हमलावर ने कथित तौर पर अली से करीब 10,000 रुपये लूट लिए, जो उन्होंने दिनभर फेरी लगाकर सामान बेचने से कमाए थे।

जब मौके पर कोई दूसरा व्यक्ति पहुंचा, तो पीड़ित वहां से भागने में सफल रहा। बाद में वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में घर पहुंचे।

अली ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका दावा है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हताशा जताते हुए बुज़ुर्ग व्यक्ति ने कहा, “मैं गरीब हूं। मैं क्या करूं? कमाऊं या इन मामलों के पीछे भागूं?”

इस घटना ने क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारियों ने अभी तक घटना के विवरण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है।

गौरतलब है कि बरेली में एक उर्स (धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम) से घर लौट रहे बिहार के रहने वाले 35 वर्षीय इमाम की 26 अप्रैल की रात बरेली कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन के पास मौत हो गई थी। आरोप है कि ट्रेन के यात्रियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा और कोच से बाहर फेंक दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 2 मई को अपने पहले पन्ने पर इस हत्या की खबर प्रकाशित की थी, जबकि इससे पहले यह खबर कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी सामने आ चुकी थी।

खबरों के मुताबिक, तौसीफ रजा मजहरी की पत्नी तबस्सुम खातून ने बताया कि उनके पति ने 26 अप्रैल की रात करीब 10:30 बजे उन्हें फोन किया था। उन्होंने बताया कि सहयात्री उन्हें पीट रहे हैं और उन पर चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इसके तुरंत बाद फोन कट गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चेहरे, कंधे और सीने पर पांच चोटों का उल्लेख है। इसके अलावा, उनकी खोपड़ी और सभी पसलियां टूटी हुई थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि मौत की वजह हेमोरेजिक शॉक और कोमा थी।

गौरतलब है कि मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) की घटनाएं मई 2014 में पहली मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के कुछ ही दिनों बाद महाराष्ट्र के पुणे में मोहसिन शेख, जो एक कंप्यूटर इंजीनियर थे, की हत्या के साथ शुरू हुई थीं और तब से लेकर अब तक लगभग बिना किसी रोक-टोक के जारी हैं।

बरेली मॉब लिंचिंग के इस मामले में, जो कथित तौर पर 26 अप्रैल को हुआ था और जिसे राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचने में छह दिन लग गए, पुलिस ने शुरू में इस मौत को दुर्घटना के रूप में दर्ज किया था। इमाम की पहचान उनके आधार कार्ड की मदद से हुई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। यह भी एक आम प्रवृत्ति बनती जा रही है कि मुस्लिम व्यक्तियों — खासकर युवा पुरुषों और धर्मगुरुओं — को हिंसक रूप से निशाना बनाने की घटनाओं को “दुर्घटना” बताकर टाल दिया जाता है या उसी रूप में दर्ज कर लिया जाता है।

कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों के सामने आने के बाद ही बरेली पुलिस ने कथित तौर पर मजहरी की मौत के संबंध में नया बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि “जरूरी कानूनी कार्रवाई” की जाएगी। यह बयान तब आया, जब उनके परिवार ने हमले के कथित सबूत पेश किए।

सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है कि बिहार के ठाकुरगंज में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। यहां मौलाना तौसीफ रजा मजहरी के लिए इंसाफ की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला गया। मौलाना 30 वर्षीय धर्मगुरु थे, जिनका शव 26 अप्रैल को बरेली में रेलवे ट्रैक के पास मिला था।

कॉल की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ऑनलाइन वायरल होने के बाद ही यूपी पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। 32 सेकंड की इस ऑडियो क्लिप में मजहरी को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है: “तबस्सुम, तुरंत पुलिस को बुलाओ, ये लोग मुझे बुरी तरह पीट रहे हैं।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तबस्सुम ने शुक्रवार, 1 मई को बताया, “जब मैंने अपने पति से दूसरे यात्रियों से मदद मांगने को कहा, तो उन्होंने जवाब दिया कि कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया।”

SP (सिटी) मानुष पारीख ने कथित तौर पर टीओआई को बताया, “मजहरी बरेली से सीवान जा रहे थे। 27 अप्रैल को GRP को एक लावारिस शव के बारे में सूचना मिली। शुरुआत में दावा किया गया था कि वह व्यक्ति ट्रेन से गिर गया था…”

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