VVPAT के लिए 10 पत्र लिखकर फंड मांग चुका है चुनाव आयोग, जानबूझकर नहीं दे रही मोदी सरकार!

Published on: March 21, 2017
नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद मायावती, अखिलेश यादव, लालू प्रसाद यादव, हरीश रावत और अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद VVPAT मशीन और सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। 

Modi VVPAT

जनसत्ता के अनुसार, चुनाव आयोग पिछले दो साल से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र लिखकर वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (VVPAT) मशीन के लिए फंड की मांग कर रहा है लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि इन VVPAT मशीनों का इस्तेमाल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में होना है। जून 2014 से अब तक चुनाव आयोग की तरफ से मोदी सरकार को दस बार इस बात की याद दिलाई जा चुकी है।
 
कोई सुनवाई ना होने के बाद 25 अक्टूबर 2016 को मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने भी इसके लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा है। आमतौर पर चुनाव आयुक्त और पीएम के बीच सीधा संवाद देखने को नहीं मिलता। चुनाव आयुक्त कानून और गृह मंत्रालय से ही संपर्क में रहता है।
 
दरअसल चुनाव आयोग को VVPAT मशीनें खरीदने के लिए 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया था। चुनाव आयोग ने भी वादा किया था कि उनको खरीदने का काम 2018 तक पूरा हो जाएगा और 2019 के चुनाव में उनका इस्तेमाल होगा। चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को लिखित में इस चीज के लिए दिया। बताया गया कि लगभग 16 लाख VVPAT मशीनें खरीदनी हैं जिसके लिए 3,100 करोड़ रुपए चाहिए होंगे।
 

VVPAT से फायदा-
इस मशीन की मदद से जब कोई ईवीएम से वोट डालता है तो एक प्रिंट आउट निकलता है। जिसमें लिखा होता है कि उम्मीदवार ने किसको वोट दिया है। वह पर्ची उम्मीदवार को नहीं मिलती बल्कि वहीं एक बॉक्स में जमा हो जाती है। उन पर्चियों का इस्तेमाल तब किया जाता है जब वोटिंग को लेकर कोई गड़बड़ी की बात सामने आती है।
 
20 जुलाई 2016 को केंद्रीय कैबिनेट ने VVPAT खरीदने की बात पर चर्चा की थी लेकिन कहा था कि उनको बनवाने की जिम्मेदारी खुद चुनाव आयोग ले क्योंकि BEL और ECIL इस काम को बेहद लिमिटिड तरीके से कर सकते हैं। अब चुनाव आयुक्त ने कहा है कि अगर उनको जल्द ही फंड नहीं मिला तो 2018 तक इतनी VVPAT मशीन खरीदना मुमकिन नहीं होगा।

Courtesy: National Dastak
 

बाकी ख़बरें