EVM विवाद पर पूर्व चुनाव आयुक्त बोले- VVPAT मशीनों से ही दूर किया जा सकता है राजनीतिक पार्टियों का संदेह

Published on: March 21, 2017
नई दिल्ली। पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी और हरिशंकर ब्रम्हा ने पूरे देश में मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी मशीनों का इस्तेमाल किए जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि पेपर ट्रेल ऐसी प्रक्रिया है जिससे ईवीएम पर गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली राजनीतिक पार्टियों के संदेह को दूर किया जा सकता है। 

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रविवार को इंडियन एक्सप्रेस बात करते हुए दोनों मुख्य चुनाव आयुक्तों ने कहा, कि मैं व्यक्तिगत रूप से चिंतित हूं जब राजनीतिक पार्टियां ईवीएम की विश्वनीयता पर सवालिया निशान उठाती हैं। कोर्ट के निर्णय के बावजूद ईवीएम पर विश्वनीयता की गई, मेरा विचार है कि एक बार सभी चुनाव वीवीपीएटी के माध्यम से कराए जाएं।  जिससे 90 फीसदी लोगों के आरोपों को खारिज किया जा सकता है। जिससे विश्व की सबसे बड़ी चुनाव प्रणाली को अधिक भरोसेमंद साबित होगी।  
 
हाल ही में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीएसी, एसपी, और आम आदमी पार्टी ने ईवीएम मशीनों का खुला विरोध किया था। इन पार्टियों का कहना है कि ईवीएम में छेड़छाड़ करके ही बीजेपी ने चुनाव जीता है। साल 2014 के आम चुनाव में भी मशीनों के साथ छेड़छाड़ की बात कही गई थी। वीवीपीएटी मशीनों से पर्ची निकलती है जो वोटर के किसी भी संदेह को दूर करती है। इस पर्ची को बॉक्स में जमा किया जाता है और चुनाव में विवाद होने पर इनकी गिनती की जाती है। साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वीवीपीएटी मशीनों का चरणबद्ध रूप में चुनाव में इस्तेमाल किया जाए और 2019 के आम चुनाव में इन मशीनों को पूरी तहर अमल में लाया जाए। 
 
इम मामले में चुनाव आयोग ने क़ानून मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा, "16 लाख वीवीपीएटी मशीनों को खरीदने के लिए 3,100 करोड़ रुपये की ज़रूरत है।" वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी पड़ताल में कहा "इस मामले में केंद्र सरकार को 10 रिमाइंडर पत्र लिखे गए लेकिन फंड के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।" फंड मुहैया कराने में देरी को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने 25 अक्टूबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।  
 
वीवीपीएटी मशीनों को मिलने वाले फंड में देरी को देखते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा, "चुनाव आयोग ने कहा है कि इन मशीनों के निर्माण में 30 महीने लगेंगे, 3500 करोड़ रूपये खर्च करके चुनाव प्रणाली पारदर्शी बनाया जा सकता है, सरकार को इस विषय पर तुरंत काम करना चाहिए, पता नहीं सरकार क्या कर रही है?

Courtesy: National Dastak

 

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