असम के एनआरसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह पुनः साफ कर दिया है कि एनआरसी तैयार करने की समय सीमा को 31 जुलाई से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा। एनआरसी मामले के महत्व को समझते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही एनआरसी एक दिन पहले प्रकाशित कर दी जाए पर 31 जुलाई से एक भी दिन अधिक नहीं लगाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए एनआरसी कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला को किसी भी प्रकार की आपत्ति न होने पर कानून के तहत अपनी समझ के अनुसार काम को पूरा करने की छूट दे दी है। साथ ही पीठ ने कहा कि कार्य को पूरा करने के लिए जो भी जरूरत है वह सुनिश्चित कराई जाए। पीठ ने एनआरसी कोऑर्डिनेटर से पूछा कि सहायता के लिए अगर कोर्ट से कोई आदेश जारी करवाना चाहते हैं तो वो इसके लिए अनुरोध कर सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की गई है।
गौरतलब है कि 30 जुलाई 2018 को प्रकाशित एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ में से 2.89 करोड़ लोगों को ही शामिल किया गया था। अन्य 40 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों को 15 में किसी एक दस्तावेज को प्रस्तुत कर आपत्ति दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसे लेकर प्रतीक हजेला ने पीठ को सूचित किया कि एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट प्रकाशित होने पर आपत्ति जताने वाले लोगों को लेकर काम मंगलवार से ही शुरू हो गया है लेकिन कई लोग उपस्थित नहीं हुए। इस पर पीठ ने कहा कि अगर कोई आपत्ति दर्ज कराने हेतु मौजूद नहीं होता है तो कानून के तहत प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। लेकिन किसी भी हालत में 31 जुलाई तक एनआरसी प्रकाशित हो जाना चाहिए।
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए सरकार ने एनआरसी को प्रकाशित करने की तारीख बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अंतिम तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया था कि चुनाव जितना जरूरी है उतना ही जरूरी एनआरसी का काम भी है।

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए एनआरसी कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला को किसी भी प्रकार की आपत्ति न होने पर कानून के तहत अपनी समझ के अनुसार काम को पूरा करने की छूट दे दी है। साथ ही पीठ ने कहा कि कार्य को पूरा करने के लिए जो भी जरूरत है वह सुनिश्चित कराई जाए। पीठ ने एनआरसी कोऑर्डिनेटर से पूछा कि सहायता के लिए अगर कोर्ट से कोई आदेश जारी करवाना चाहते हैं तो वो इसके लिए अनुरोध कर सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की गई है।
गौरतलब है कि 30 जुलाई 2018 को प्रकाशित एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ में से 2.89 करोड़ लोगों को ही शामिल किया गया था। अन्य 40 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों को 15 में किसी एक दस्तावेज को प्रस्तुत कर आपत्ति दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसे लेकर प्रतीक हजेला ने पीठ को सूचित किया कि एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट प्रकाशित होने पर आपत्ति जताने वाले लोगों को लेकर काम मंगलवार से ही शुरू हो गया है लेकिन कई लोग उपस्थित नहीं हुए। इस पर पीठ ने कहा कि अगर कोई आपत्ति दर्ज कराने हेतु मौजूद नहीं होता है तो कानून के तहत प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। लेकिन किसी भी हालत में 31 जुलाई तक एनआरसी प्रकाशित हो जाना चाहिए।
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए सरकार ने एनआरसी को प्रकाशित करने की तारीख बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अंतिम तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया था कि चुनाव जितना जरूरी है उतना ही जरूरी एनआरसी का काम भी है।