मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा है कि सरकार दोषियों और उनके आकाओं को सजा दिलाने के लिए हर संभव संसाधन का इस्तेमाल करेगी। कई संगठनों ने ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया है।

फोटो साभार : पीटीआई
बुधवार सुबह, 13 मई को मणिपुर के कांगपोकपी जिले में संदिग्ध हथियारबंद चरमपंथियों ने आदिवासी चर्च नेताओं की एक टीम पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और चार घायल हो गए।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित, जो ‘थाडो बैपटिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (TBAI) और ‘यूनाइटेड बैपटिस्ट काउंसिल’ (UBC) के सदस्य थे, चुराचांदपुर में एक बैपटिस्ट सम्मेलन से कांगपोकपी जा रहे थे, तभी दो गाड़ियों में सवार उन पर हमला हुआ। यह घटना सुबह करीब 10 बजे कोटलेन और कोटज़िम गांवों के बीच पहाड़ी ‘टाइगर रोड’ पर हुई।
हमले में बचे लोगों में से एक पीड़ित ने सुरक्षाकर्मियों को बताया कि हमलावर पैदल आए थे और अधूरी सड़क के पहाड़ी किनारे से तीन-चार मिनट तक गोलियों की बौछार करने के बाद भाग निकले। यह सड़क कुकी-बहुल चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों को जोड़ती है और गैर-आदिवासी मैतेई-बहुल इम्फाल घाटी को बाईपास करती है। 3 मई, 2023 को मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कुकी लोग इस घाटी से होकर जाने वाले कहीं छोटे हाईवे का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।
मारे गए लोगों में TBAI के अध्यक्ष रेवरेंड वुमथांग सिटलहोउ, TBAI के वित्त सचिव रेव. काइगौलुन ल्हौवुम और पादरी पाओगौलेन सिटलहोउ शामिल थे। TBAI के अध्यक्ष ने हाल ही में कुकी ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए पड़ोसी राज्य नागालैंड का दौरा किया था, ताकि मणिपुर के अशांत कामजोंग और उखरुल जिलों में कुकी और तांगखुल नागा समुदायों के बीच शांति स्थापित की जा सके।
एक अधिकारी ने ‘द हिंदू’ को बताया कि घायल हुए चार लोगों में से तीन को इलाज के लिए इम्फाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि हमले में बचा पांचवां व्यक्ति, जो किसी तरह भागने में सफल रहा था, उसे बाद में खोज निकाला गया और पहाड़ियों से सुरक्षित बाहर लाया गया।
अधिकारी ने बताया, “ऐसा संदेह है कि करीब 8-10 हथियारबंद लोगों ने दो गाड़ियों पर स्वचालित हथियारों- संभवतः AK-47 राइफलों- से गोलियां चलाईं। वे संभवतः पहाड़ियों में छिपे हुए थे।”
भारतीय सेना द्वारा जारी बयान के अनुसार, सुरक्षा बलों के संयुक्त दस्तों ने घायलों को नजदीकी चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में मदद की। मणिपुर की स्थिति पर नजर रख रहे एक अधिकारी ने बताया, “सुरक्षा बलों के संयुक्त दस्ते इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी और क्षेत्रीय वर्चस्व (area domination) अभियान चला रहे हैं।” कई थाडौ, कुकी और ज़ोमी संगठनों ने इन हत्याओं के विरोध में कांगपोकपी, चुराचांदपुर और अन्य जिलों में तीन दिनों के लिए “पूर्ण बंद” का आह्वान किया है।
इस घटना की निंदा करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो, गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम और अन्य विधायकों के साथ अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें बेहतर इलाज मिले। उन्होंने कहा कि सरकार इलाज का पूरा खर्च उठाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले, जो मणिपुर में हालात सामान्य करने के लोगों के सामूहिक प्रयासों को कमजोर करते हैं, कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, “अपहरण, लोगों को बंधक बनाने और समुदायों के आधार पर डराने-धमकाने की घटनाओं को तुरंत रोका जाए।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों और उनके आकाओं को सजा दिलाने के लिए हर संभव संसाधन का इस्तेमाल करेगी।
यूनाइटेड नागा काउंसिल की सेनापति जिला इकाई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि घात लगाकर किए गए हमले के तुरंत बाद, लेइलोन वाइफेई गांव के कुछ लोगों ने कोंसाखुल गांव के लगभग 20 नागा लोगों को बंधक बना लिया था।
नागा बहुल इसी जिले में, एक कुकी गांव के मुखिया ने सेनापति पुलिस से अपील की कि वे स्थानीय लोगों द्वारा “हिरासत में लिए गए” 23 कुकी मजदूरों को रिहा करवाएं।
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो और उनके मेघालय व मिजोरम के समकक्ष- कॉनराड के. संगमा और लालदुहोमा- ने भी कुकी चर्च नेताओं की हत्या की निंदा की। संगमा ने कहा, “मैं मणिपुर के अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई करें।”
मणिपुर के नागा विधायक मंच (Naga Legislature Forum), जिसमें नौ विधायक शामिल हैं, ने भी एक संयुक्त बयान जारी किया। बयान में “निहत्थे और शांतिप्रिय धार्मिक नेताओं की निर्मम हत्या” के बाद हिरासत में लिए गए या अगवा किए गए सभी कुकी और नागा नागरिकों की रिहाई और शांति बनाए रखने की अपील की गई।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम, कुकी ज़ो काउंसिल और थाडौ इनपी मणिपुर के अलावा, गुवाहाटी स्थित यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ऑफ नॉर्थ ईस्ट इंडिया (UCFNEI) ने भी चर्च नेताओं की हत्या पर गहरा शोक व्यक्त किया।
UCFNEI के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स ने कहा, “हिंसा की इस क्रूर और अमानवीय घटना ने ईश्वर के उन निर्दोष सेवकों की जान ले ली, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शांति, सेवा और अपने समुदायों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि ये चर्च नेता “न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे, बल्कि ऐसे क्षेत्र में आशा, मेल-मिलाप और नैतिक मार्गदर्शन के स्तंभ भी थे, जो लंबे समय से संघर्ष की आग में झुलस रहा है।”
एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू
लगभग सभी उग्रवादी और कट्टरपंथी समूहों पर- चाहे वे संघर्षविराम की स्थिति में हों या नहीं- चर्च नेताओं पर हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। इन समूहों पर आरोप है कि उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और जटिल बनाने के लिए ऐसा किया, जबकि राज्य अभी भी मई 2023 में भड़के जातीय संघर्ष से उबरने की कोशिश कर रहा है।
इन संगठनों में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम या NSCN (इसाक-मुइवा), ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF), ZUF (कामसन), अराम्बई तेंगगोल और कुकी नेशनल आर्मी शामिल हैं। इन सभी समूहों ने हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) ने आरोप लगाया कि यह घात लगाकर किया गया हमला NSCN (I-M) द्वारा ZUF के साथ “सक्रिय मिलीभगत” में एक “पूर्व-नियोजित आतंकवादी कृत्य” के रूप में अंजाम दिया गया था। ट्रस्ट ने आगे कहा कि पीड़ित नेता नागालैंड क्रिश्चियन फोरम के तत्वावधान में एक शांति परामर्श आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे- “एक नाजुक लेकिन महत्वपूर्ण पहल, जिसका जवाब NSCN-IM ने गोलियों से दिया है।”
KOHUR ने कहा कि मारे गए चर्च नेता सुलह-समझौते के प्रतीक थे, जिन्होंने निजी जोखिम उठाते हुए भी कुकी और तांगखुल नागा समुदायों के बीच संवाद की पैरवी की थी।
इस साल फरवरी से अब तक, मणिपुर के उखरुल और कामजोंग जिलों में कुकी और तांगखुल नागा समुदायों से जुड़े हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन हमलों में कई लोगों की जान गई और कई घर जला दिए गए।
एक नागा संगठन ने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि कुछ कुकी उग्रवादी समूहों ने मणिपुर सरकार की शांति पहलों को विफल करने के लिए चर्च नेताओं की हत्या की हो सकती है। खबरों के अनुसार, मारे गए बैपटिस्ट नेताओं की 15 मई को चुराचांदपुर यात्रा से पहले मुख्यमंत्री से मिलने की योजना थी।
हालांकि, सुरक्षा बलों ने कहा कि यह घात लगाकर किया गया हमला “गलत पहचान” (mistaken identity) का मामला भी हो सकता है। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि हमलावरों को यह जानकारी नहीं थी कि उन दो वाहनों में चर्च नेता यात्रा कर रहे थे। हत्यारों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।”
Related

फोटो साभार : पीटीआई
बुधवार सुबह, 13 मई को मणिपुर के कांगपोकपी जिले में संदिग्ध हथियारबंद चरमपंथियों ने आदिवासी चर्च नेताओं की एक टीम पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और चार घायल हो गए।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित, जो ‘थाडो बैपटिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (TBAI) और ‘यूनाइटेड बैपटिस्ट काउंसिल’ (UBC) के सदस्य थे, चुराचांदपुर में एक बैपटिस्ट सम्मेलन से कांगपोकपी जा रहे थे, तभी दो गाड़ियों में सवार उन पर हमला हुआ। यह घटना सुबह करीब 10 बजे कोटलेन और कोटज़िम गांवों के बीच पहाड़ी ‘टाइगर रोड’ पर हुई।
हमले में बचे लोगों में से एक पीड़ित ने सुरक्षाकर्मियों को बताया कि हमलावर पैदल आए थे और अधूरी सड़क के पहाड़ी किनारे से तीन-चार मिनट तक गोलियों की बौछार करने के बाद भाग निकले। यह सड़क कुकी-बहुल चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों को जोड़ती है और गैर-आदिवासी मैतेई-बहुल इम्फाल घाटी को बाईपास करती है। 3 मई, 2023 को मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कुकी लोग इस घाटी से होकर जाने वाले कहीं छोटे हाईवे का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।
मारे गए लोगों में TBAI के अध्यक्ष रेवरेंड वुमथांग सिटलहोउ, TBAI के वित्त सचिव रेव. काइगौलुन ल्हौवुम और पादरी पाओगौलेन सिटलहोउ शामिल थे। TBAI के अध्यक्ष ने हाल ही में कुकी ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए पड़ोसी राज्य नागालैंड का दौरा किया था, ताकि मणिपुर के अशांत कामजोंग और उखरुल जिलों में कुकी और तांगखुल नागा समुदायों के बीच शांति स्थापित की जा सके।
एक अधिकारी ने ‘द हिंदू’ को बताया कि घायल हुए चार लोगों में से तीन को इलाज के लिए इम्फाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि हमले में बचा पांचवां व्यक्ति, जो किसी तरह भागने में सफल रहा था, उसे बाद में खोज निकाला गया और पहाड़ियों से सुरक्षित बाहर लाया गया।
अधिकारी ने बताया, “ऐसा संदेह है कि करीब 8-10 हथियारबंद लोगों ने दो गाड़ियों पर स्वचालित हथियारों- संभवतः AK-47 राइफलों- से गोलियां चलाईं। वे संभवतः पहाड़ियों में छिपे हुए थे।”
भारतीय सेना द्वारा जारी बयान के अनुसार, सुरक्षा बलों के संयुक्त दस्तों ने घायलों को नजदीकी चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में मदद की। मणिपुर की स्थिति पर नजर रख रहे एक अधिकारी ने बताया, “सुरक्षा बलों के संयुक्त दस्ते इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी और क्षेत्रीय वर्चस्व (area domination) अभियान चला रहे हैं।” कई थाडौ, कुकी और ज़ोमी संगठनों ने इन हत्याओं के विरोध में कांगपोकपी, चुराचांदपुर और अन्य जिलों में तीन दिनों के लिए “पूर्ण बंद” का आह्वान किया है।
इस घटना की निंदा करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो, गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम और अन्य विधायकों के साथ अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें बेहतर इलाज मिले। उन्होंने कहा कि सरकार इलाज का पूरा खर्च उठाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले, जो मणिपुर में हालात सामान्य करने के लोगों के सामूहिक प्रयासों को कमजोर करते हैं, कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, “अपहरण, लोगों को बंधक बनाने और समुदायों के आधार पर डराने-धमकाने की घटनाओं को तुरंत रोका जाए।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों और उनके आकाओं को सजा दिलाने के लिए हर संभव संसाधन का इस्तेमाल करेगी।
यूनाइटेड नागा काउंसिल की सेनापति जिला इकाई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि घात लगाकर किए गए हमले के तुरंत बाद, लेइलोन वाइफेई गांव के कुछ लोगों ने कोंसाखुल गांव के लगभग 20 नागा लोगों को बंधक बना लिया था।
नागा बहुल इसी जिले में, एक कुकी गांव के मुखिया ने सेनापति पुलिस से अपील की कि वे स्थानीय लोगों द्वारा “हिरासत में लिए गए” 23 कुकी मजदूरों को रिहा करवाएं।
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो और उनके मेघालय व मिजोरम के समकक्ष- कॉनराड के. संगमा और लालदुहोमा- ने भी कुकी चर्च नेताओं की हत्या की निंदा की। संगमा ने कहा, “मैं मणिपुर के अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई करें।”
मणिपुर के नागा विधायक मंच (Naga Legislature Forum), जिसमें नौ विधायक शामिल हैं, ने भी एक संयुक्त बयान जारी किया। बयान में “निहत्थे और शांतिप्रिय धार्मिक नेताओं की निर्मम हत्या” के बाद हिरासत में लिए गए या अगवा किए गए सभी कुकी और नागा नागरिकों की रिहाई और शांति बनाए रखने की अपील की गई।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम, कुकी ज़ो काउंसिल और थाडौ इनपी मणिपुर के अलावा, गुवाहाटी स्थित यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम ऑफ नॉर्थ ईस्ट इंडिया (UCFNEI) ने भी चर्च नेताओं की हत्या पर गहरा शोक व्यक्त किया।
UCFNEI के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स ने कहा, “हिंसा की इस क्रूर और अमानवीय घटना ने ईश्वर के उन निर्दोष सेवकों की जान ले ली, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शांति, सेवा और अपने समुदायों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि ये चर्च नेता “न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे, बल्कि ऐसे क्षेत्र में आशा, मेल-मिलाप और नैतिक मार्गदर्शन के स्तंभ भी थे, जो लंबे समय से संघर्ष की आग में झुलस रहा है।”
एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू
लगभग सभी उग्रवादी और कट्टरपंथी समूहों पर- चाहे वे संघर्षविराम की स्थिति में हों या नहीं- चर्च नेताओं पर हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। इन समूहों पर आरोप है कि उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और जटिल बनाने के लिए ऐसा किया, जबकि राज्य अभी भी मई 2023 में भड़के जातीय संघर्ष से उबरने की कोशिश कर रहा है।
इन संगठनों में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम या NSCN (इसाक-मुइवा), ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF), ZUF (कामसन), अराम्बई तेंगगोल और कुकी नेशनल आर्मी शामिल हैं। इन सभी समूहों ने हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) ने आरोप लगाया कि यह घात लगाकर किया गया हमला NSCN (I-M) द्वारा ZUF के साथ “सक्रिय मिलीभगत” में एक “पूर्व-नियोजित आतंकवादी कृत्य” के रूप में अंजाम दिया गया था। ट्रस्ट ने आगे कहा कि पीड़ित नेता नागालैंड क्रिश्चियन फोरम के तत्वावधान में एक शांति परामर्श आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे- “एक नाजुक लेकिन महत्वपूर्ण पहल, जिसका जवाब NSCN-IM ने गोलियों से दिया है।”
KOHUR ने कहा कि मारे गए चर्च नेता सुलह-समझौते के प्रतीक थे, जिन्होंने निजी जोखिम उठाते हुए भी कुकी और तांगखुल नागा समुदायों के बीच संवाद की पैरवी की थी।
इस साल फरवरी से अब तक, मणिपुर के उखरुल और कामजोंग जिलों में कुकी और तांगखुल नागा समुदायों से जुड़े हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन हमलों में कई लोगों की जान गई और कई घर जला दिए गए।
एक नागा संगठन ने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि कुछ कुकी उग्रवादी समूहों ने मणिपुर सरकार की शांति पहलों को विफल करने के लिए चर्च नेताओं की हत्या की हो सकती है। खबरों के अनुसार, मारे गए बैपटिस्ट नेताओं की 15 मई को चुराचांदपुर यात्रा से पहले मुख्यमंत्री से मिलने की योजना थी।
हालांकि, सुरक्षा बलों ने कहा कि यह घात लगाकर किया गया हमला “गलत पहचान” (mistaken identity) का मामला भी हो सकता है। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि हमलावरों को यह जानकारी नहीं थी कि उन दो वाहनों में चर्च नेता यात्रा कर रहे थे। हत्यारों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।”
Related
यूपी : सहारनपुर में जमीन को लेकर ठाकुर और दलित गुटों के बीच झड़प, कई लोग घायल
जोधपुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी नेता ने लगाया जातिसूचक अपमान का आरोप