जोधपुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी नेता ने लगाया जातिसूचक अपमान का आरोप

Written by sabrang india | Published on: May 16, 2026
पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2018 से गैर-वाल्मिकी समाज के लोग सफाई कार्य में सक्रिय रूप से योगदान नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण अतिरिक्त बोझ वाल्मिकी समाज की महिलाओं पर पड़ रहा है। इसलिए मांग की गई है कि उन्हें तत्काल वार्डों में सफाई कार्य में नियुक्त किया जाए।



आजादी के लंबे समय बाद भी वाल्मिकी (मेहत्तर) समाज को सामाजिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जोधपुर नगर निगम से सामने आया है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने केंद्रीय रक्षा मंत्री को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि नगर निगम के डीसी स्वरूप सिंह ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया तथा राजकार्य में बाधा पहुंचाने के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।

पत्र के अनुसार, लंबे समय से सफाई कर्मचारियों की दस सूत्री मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष के दौरान 12 मई को नेता भूख हड़ताल पर थे। तेज धूप और अधिकारियों की लापरवाही के कारण पहले से बाईपास सर्जरी करा चुके सरदार प्रकाश सिंह की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन इसके बावजूद निगम प्रशासन गंभीर नहीं हुआ।

विद्रोही के हवाले से द मूकनायक ने लिखा कि जब हालात बिगड़ते गए, तब डीसी स्वरूप सिंह ने कमरे में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और संगठन के सदस्यों को बाहर निकलवा दिया। इसके बाद उन्होंने उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए कहा, “तुम्हारे भंगियों की औकात नहीं है कि हमारे सामने संघर्ष कर सको।” इसी दौरान विद्रोही की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले वे कुर्सी पर बैठे रहे, फिर हालत ज्यादा खराब होने पर उपायुक्त के कमरे में ही लेट गए।

आयुक्त के नाम पर उन्हें राजकार्य में बाधा डालने के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई। सरदार प्रकाश सिंह ने इस सोच को मानवता पर कलंक करार देते हुए कहा कि एक ओर दुनिया चांद पर बसने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर आज भी कुछ शिक्षित अधिकारी संकीर्ण और पुरानी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

सरदार प्रकाश सिंह ने कहा, “पुलिस एवं संगठन के सदस्यों के साथ वार्ता के दौरान मैं सुबह साढ़े दस बजे से शाम साढ़े चार बजे तक कड़ी धूप में भूख हड़ताल पर बैठा रहा, लेकिन किसी निगम अधिकारी ने सुध नहीं ली, जिसके चलते वार्ता के दौरान मेरी तबीयत बिगड़ गई। मेरी पहले बाईपास सर्जरी हो चुकी है। इसके बावजूद निगम डीसी और अन्य अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। साथियों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर मुझे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने पूर्ण आराम की सलाह दी है।”

अपने पत्र में सरदार प्रकाश सिंह ने केंद्रीय रक्षा मंत्री के समक्ष कई मांगें रखीं। उन्होंने जोधपुर नगर निगम के वर्तमान सफाई ठेके को निरस्त कर स्थायी कर्मचारियों की भर्ती, डीपीसी तथा अनुकंपा नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की। इसके साथ ही वाल्मिकी समाज के लोगों को वरीयता देते हुए योग्यता और डिप्लोमा के आधार पर सफाई प्रभारी नियुक्त करने की भी मांग की गई।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 से गैर-वाल्मिकी समाज के लोग सफाई कार्य में सक्रिय रूप से योगदान नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण अतिरिक्त कार्यभार वाल्मिकी समाज की महिलाओं पर पड़ रहा है। इसलिए उन्हें तत्काल वार्डों में सफाई कार्य में लगाया जाए।

इसके अलावा, पत्र में डीसी स्वरूप सिंह का तत्काल स्थानांतरण करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग भी की गई है। सरदार प्रकाश सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे और डीसी के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाएंगे।

इस पत्र की प्रतियां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान के मुख्यमंत्री और जोधपुर के विधायक अतुल भंसाली को भी भेजी गई हैं। फिलहाल, नगर निगम प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सरदार प्रकाश सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों से वाल्मिकी समाज में भारी नाराजगी है।

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