मणिपुर के उखरुल में फिर हिंसा: 25 घर और सरकारी क्वार्टर जलकर खाक, जान बचाने को लोगों का पलायन

Written by sabrang india | Published on: February 10, 2026
मणिपुर के उखरुल में तनाव व्याप्त है। लिटन में 25 घर जलकर खाक हो गए हैं। स्थिति को देखते हुए कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। जान बचाने के लिए लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।


साभार : द मूकनायक 

मणिपुर के उखरुल ज़िले में शांति भंग होने की एक और गंभीर घटना सामने आई है। ज़िले के दो पड़ोसी गाँवों—लिटन और मंगकोट—में तंगखुल नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। सोमवार को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब हिंसा की आशंका के चलते बड़ी संख्या में लोगों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर भागना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, उपद्रवियों ने 25 घरों और चार सरकारी क्वार्टरों को आग के हवाले कर दिया।

रात में तांडव, ऑटोमेटिक राइफ़लों की गूँजी आवाज़

पुलिस अधिकारियों और लिटन पुलिस स्टेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत रविवार देर रात करीब 11:30 बजे लिटन बाज़ार इलाके में हुई। बड़ी संख्या में पहुँचे उपद्रवियों ने घरों में आगजनी शुरू कर दी। हालात तब और भयावह हो गए, जब ऑटोमेटिक राइफ़लों से फायरिंग की आवाज़ें सुनाई देने लगीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आगजनी में क्षतिग्रस्त ढाँचों में कुकी समुदाय के लोगों के दो घर भी शामिल हैं।

घर छोड़ने को मजबूर लोग

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, हालात बिगड़ते देख कुकी और तंगखुल नागा—दोनों समुदायों के लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे। सोमवार को दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आए, जब लोग ट्रकों, निजी वाहनों और यहाँ तक कि पैदल ही अपने घरों से निकलते दिखाई दिए। वे अपने साथ गद्दे, बर्तन और जो भी कीमती सामान बचा सके, उसे समेटकर ले जा रहे थे।

लिटन बाज़ार में रहने वाली एक स्थानीय तंगखुल महिला ने उस खौफ़नाक रात को याद करते हुए बताया, “शोर-शराबा सुनकर हम बुरी तरह डर गए थे और खुद को घरों के अंदर बंद कर लिया था। बाहर हथियारबंद लोगों की भीड़ थी, जो घरों को तोड़ रही थी और उनमें आग लगा रही थी।”

हिंसा की वजह

पुलिस के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ 7 फ़रवरी की शाम लिटन सरेखोंग में हुई एक घटना से जुड़ी है। वहाँ शराब के नशे में हुआ एक झगड़ा बाद में विकराल रूप ले गया। इस दौरान स्टर्लिंग नामक एक तंगखुल नागा व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए इम्फाल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी घटना के बाद से इलाके में तनाव बढ़ता चला गया।

प्रशासन की सख़्ती और सुरक्षा बलों की तैनाती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उखरुल के ज़िला मजिस्ट्रेट ने रविवार शाम से लिटन गाँव में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से तंगखुल और कुकी समुदायों के बीच शांति भंग होने और जान-माल के नुकसान की आशंका जताई गई है।

शांति बहाली के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और असम राइफ़ल्स ने मोर्चा संभाल लिया है। इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए 8 बिहार रेजिमेंट, चौथी महार रेजिमेंट और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की अतिरिक्त टुकड़ियाँ भी तैनात की गई हैं।

रविवार शाम जब भीड़ ने पथराव शुरू किया, तो उसे तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

इम्फाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित लिटन एक छोटा व्यावसायिक कस्बा है, जो आसपास के गाँवों के लिए व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता है। यहाँ दोनों समुदायों के लोग रहते हैं और रिहायशी इलाक़े तथा बाज़ार आपस में जुड़े हुए हैं, जिसके चलते तनाव तेज़ी से फैल गया।

कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी–क़ानून एवं व्यवस्था) के नेतृत्व में मणिपुर पुलिस की एक टीम ने मौके का दौरा किया। इसके अलावा, कुकी समुदाय से आने वाली सैकुल की विधायक किमनियो हाओकिप और तंगखुल नागा समुदाय के उखरुल विधायक राम मुइवा ने भी प्रभावित इलाक़ों का निरीक्षण किया।

फ़िलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जाँच जारी है। प्रशासन का मुख्य फोकस अब इलाके में शांति और आपसी विश्वास बहाल करने पर है।

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