नई दिल्ली। ईवीएम से छेड़छाड़ मामले की सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय 24 मार्च को इस मामले की सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगाए। सबसे पहले बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। बाद में आम आदमी पार्टी ने भी चुनावों में हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया।
यूपी के चुनाव नतीजे आने के बाद सबसे पहले मायावती ने कहा कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। उसके बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि मायवाती के आरोपों में सच्चाई है, या नहीं, इसे कुछ दिनों के बाद बताएंगे। इसके बाद उनकी पार्टी के नेता ने कहा कि सपा के पास ईवीएम से छेड़छाड़ के सबूत हैं वे इन्हें लेकर कोर्ट जाएंगे। वहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी छेड़छाड़ के आरोप से इंकार नहीं किया था।
हालांकि इन आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से नकार दिया था। चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा था कि ईवीएम में किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ईवीएम और चुनावों में शुचिता रखने के लिए टेक्निकल और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से सावधानी रखी जाती है। जबकि 2009 में ईवीएम पर खुद भाजपा ने सवाल खड़े किए थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ईवीएम के साथ वीवीपीएटी लगाने के भी निर्देश दिये थे जिसके लिए सरकार द्वारा पर्याप्त फंड नहीं दिया गया।
चुनाव आयोग ने कहा था कि जिन राजनितिक दलों या फिर व्यक्तियों के पास ऐसा कोई सबूत हैं, जिससे साबित होता हो कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है, तो वो इनको लेकर के आये। आयोग इन सबूतों को गंभीरतापूर्वक देखने के बाद ही किसी तरह का कोई निर्णय लेगा। आपको बता दें कि इस बार गोवा में वीवीपीएटी से चुनाव हुए थे। वहीं यूपी और उत्तराखंड में सिर्फ कुछ सीटों पर इन मशीनों का इंतजाम किया गया था।

Courtesy: National Dastak

यूपी के चुनाव नतीजे आने के बाद सबसे पहले मायावती ने कहा कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। उसके बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि मायवाती के आरोपों में सच्चाई है, या नहीं, इसे कुछ दिनों के बाद बताएंगे। इसके बाद उनकी पार्टी के नेता ने कहा कि सपा के पास ईवीएम से छेड़छाड़ के सबूत हैं वे इन्हें लेकर कोर्ट जाएंगे। वहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी छेड़छाड़ के आरोप से इंकार नहीं किया था।
हालांकि इन आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से नकार दिया था। चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा था कि ईवीएम में किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ईवीएम और चुनावों में शुचिता रखने के लिए टेक्निकल और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से सावधानी रखी जाती है। जबकि 2009 में ईवीएम पर खुद भाजपा ने सवाल खड़े किए थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ईवीएम के साथ वीवीपीएटी लगाने के भी निर्देश दिये थे जिसके लिए सरकार द्वारा पर्याप्त फंड नहीं दिया गया।
चुनाव आयोग ने कहा था कि जिन राजनितिक दलों या फिर व्यक्तियों के पास ऐसा कोई सबूत हैं, जिससे साबित होता हो कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है, तो वो इनको लेकर के आये। आयोग इन सबूतों को गंभीरतापूर्वक देखने के बाद ही किसी तरह का कोई निर्णय लेगा। आपको बता दें कि इस बार गोवा में वीवीपीएटी से चुनाव हुए थे। वहीं यूपी और उत्तराखंड में सिर्फ कुछ सीटों पर इन मशीनों का इंतजाम किया गया था।

Courtesy: National Dastak