लखनऊ में 12 वर्षीय उनैज़ खान की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर नागरिक समाज के सदस्यों ने विरोध मार्च निकाला

Written by sabrang india | Published on: March 12, 2026
उनैज़ के परिवार ने इस घटना को दुर्घटनावश (एक्सिडेंटल) बताने से इनकार करते हुए त्रिपाठी परिवार पर जानबूझकर हत्या का आरोप लगाया है और दावा किया है कि लड़के को पार्टी में बहला-फुसलाकर बुलाया गया था। उनका कहना है कि माथे के बीचोंबीच बिल्कुल करीब से मारी गई गोली इरादे को दर्शाती है, जिसका संबंध संभवतः स्कूल में हुए किसी पुराने विवाद से हो सकता है। उन्होंने पुलिस द्वारा इस घटना को तुरंत दुर्घटना करार दिए जाने पर निराशा भी व्यक्त की है।



एकजुटता और नाराजगी का प्रदर्शन करते हुए नागरिक समाज के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में सड़कों पर उतरकर 12 वर्षीय उनैज़ खान की दुखद मौत के मामले में जल्द और पारदर्शी न्याय की मांग करते हुए एक मार्च निकाला। खान को 2 मार्च को कृष्णा नगर इलाके में एक दोस्त की जन्मदिन की पार्टी के दौरान बेहद करीब से सिर में गोली मार दी गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने जवाबदेही, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए नारे लगाए। यह सब उस समय हुआ जब घटना में किसी साजिश की आशंका और कानून के असमान इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना तब हुई जब सरोजिनी नगर के बेहसा गांव का रहने वाला कक्षा 7 का छात्र उनैज़ अपने सहपाठी नवनीत का जन्मदिन मनाने के लिए बालाजी कॉम्प्लेक्स या एलडीए कॉलोनी, बारीगांव इलाके में नवनीत के पिता संजीव त्रिपाठी (जो एक ठेकेदार हैं) के घर गया था। उनैज़, जो रमजान के दौरान रोजा रख रहा था, दोपहर करीब 3:30 बजे अपने दोस्तों के साथ घर से निकला। उसके पिता पहले उसे भेजने को तैयार नहीं थे, लेकिन दोस्तों के कहने पर वह चला गया। शाम करीब 7 बजे उसके सिर में गोली मारी गई और उसे तुरंत लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने इस गोलीबारी को “गलती से चली गोली” (एक्सीडेंटल फायरिंग) बताया है। पुलिस के अनुसार, जन्मदिन मनाने वाले लड़के नवनीत समेत कुछ नाबालिग बच्चे एक लाइसेंसी रिवॉल्वर को लापरवाही से संभाल रहे थे (जो कथित तौर पर एक खड़ी कार से ली गई थी), तभी वह चल गई। अधिकारियों ने पार्टी में मौजूद तीन नाबालिगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और उनैज़ के पिता जमीर खान की शिकायत के आधार पर कृष्णा नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। इन धाराओं में हत्या (धारा 103(1)), आपराधिक धमकी और ‘सामान्य इरादा’ (common intention) शामिल हैं। इस FIR में छह लोगों के नाम हैं, जिनमें संजीव त्रिपाठी और तीन नाबालिग शामिल हैं।

हालांकि, उनैज़ के परिवार ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि गोली गलती से चली थी। उन्होंने त्रिपाठी परिवार पर जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगाया है और कहा है कि लड़के को बहला-फुसलाकर पार्टी में बुलाया गया था। उनका दावा है कि माथे के ठीक बीच में बहुत करीब से मारी गई गोली यह साबित करती है कि हत्या का इरादा था; इसका संबंध संभवतः स्कूल में हुए किसी पुराने झगड़े से हो सकता है। परिवार ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि पुलिस ने इतनी जल्दी इस घटना को “दुर्घटना” करार दे दिया।

ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं जिनसे राजनीतिक संबंधों का संकेत मिलता है; कथित तौर पर संजीव त्रिपाठी का संबंध उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि वे उनके रिश्तेदार हैं। इस बात ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच की मांग को और तेज कर दिया है।

पीड़ित के पिता ने अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी और एक वायरल वीडियो में कहा कि अगर स्थिति उल्टी होती, तो बुलडोज़र कार्रवाई और तुरंत गिरफ्तारी जैसे सख्त कदम उठाए गए होते। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बच्चे के साथ जो हुआ, वह उनके बच्चे के साथ हुआ होता, तो वहां पुलिस होती, झंडे लगे होते, बुलडोज़र चलते और मेरा घर गिरा दिया गया होता। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।”

इस दुखद घटना से हर तरफ गहरा सदमा फैला है। पड़ोसी, समुदाय के लोग और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता बच्चों के आसपास हथियारों की आसान उपलब्धता, बच्चों की सुरक्षा और जांच में संभावित पक्षपात को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। फिलहाल फॉरेंसिक जांच जारी है, जब्त किए गए हथियार की बारीकी से जांच की जा रही है और पुलिस की जांच भी जारी है।

नागरिक समाज का यह मार्च इस मामले में सच्चाई और न्याय के लिए बढ़ते जन दबाव को दर्शाता है। साथ ही यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि जांच की स्वतंत्र निगरानी हो और किसी भी तथ्य को छिपाया न जाए। इस घटना ने उत्तर प्रदेश में हथियारों की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। इस बीच उनैज़ का परिवार और पूरा समुदाय गहरे सदमे में है और ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।

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