लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के आह्वान पर हुए विरोध के तहत लेह और कारगिल सहित केंद्र शासित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी बाजार और कारोबार बंद रहे।

Credits: X/ @SajjadKargili_
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के दो प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सामाजिक-राजनीतिक संगठन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर मंगलवार को पूरे लद्दाख में बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के साथ हुई बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) को लेकर असहमति जताते हुए संयुक्त रूप से बंद का आह्वान किया था। यह दस्तावेज 22 मई को मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक का रिकॉर्ड था।
मंगलवार को विरोध दर्ज कराने के लिए लेह और कारगिल कस्बों सहित केंद्र शासित प्रदेश के अन्य इलाकों में भी बाजार और कारोबार बंद रहे। हालांकि लेह प्रशासन ने लद्दाख बौद्ध संघ को लेह में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली ने कहा कि यह विरोध केवल बैठक की कार्यवाही को लेकर नहीं है, बल्कि उपराज्यपाल द्वारा लागू की जा रही नीतियों के प्रति लद्दाख के लोगों की नाराज़गी को भी दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में घोषित नई शराब नीति का उल्लेख किया, जिसके तहत क्षेत्र में हार्ड शराब की खुदरा बिक्री और शराब की दुकानों के विस्तार की अनुमति दी गई है।
करगिली ने कहा, "इस विरोध के माध्यम से लद्दाख के लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि हम पर थोपी जा रही नीतियों का हम समर्थन नहीं करते।" उन्होंने बताया कि उनकी ओर से मांगों का एक मसौदा सरकार को दिया गया था और अब सरकार की ओर से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिस पर आगे चर्चा करने की सहमति बनी है।
इस प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा तथा लद्दाख के लोकतांत्रिक ढांचे का विस्तार करते हुए एक निर्वाचित विधानसभा के गठन का मुद्दा शामिल है।
नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद कार्यवाही का विवरण तैयार कर हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था। लाक्रुक के अनुसार, "इस दस्तावेज में उप-समिति के सदस्यों और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई चर्चा को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं किया गया था।" इसी कारण दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
20 जून को लाक्रुक ने कहा था कि इस तरह की प्रक्रिया "केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है" और ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र समय खींचने की कोशिश कर रहा है। LAB और KDA दोनों ने जोर देकर कहा है कि गृह मंत्रालय को बैठक के दौरान हुए सहमति बिंदुओं और निर्णयों का सम्मान करना चाहिए तथा उनसे पीछे नहीं हटना चाहिए।
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केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के दो प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सामाजिक-राजनीतिक संगठन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर मंगलवार को पूरे लद्दाख में बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के साथ हुई बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) को लेकर असहमति जताते हुए संयुक्त रूप से बंद का आह्वान किया था। यह दस्तावेज 22 मई को मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक का रिकॉर्ड था।
मंगलवार को विरोध दर्ज कराने के लिए लेह और कारगिल कस्बों सहित केंद्र शासित प्रदेश के अन्य इलाकों में भी बाजार और कारोबार बंद रहे। हालांकि लेह प्रशासन ने लद्दाख बौद्ध संघ को लेह में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली ने कहा कि यह विरोध केवल बैठक की कार्यवाही को लेकर नहीं है, बल्कि उपराज्यपाल द्वारा लागू की जा रही नीतियों के प्रति लद्दाख के लोगों की नाराज़गी को भी दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में घोषित नई शराब नीति का उल्लेख किया, जिसके तहत क्षेत्र में हार्ड शराब की खुदरा बिक्री और शराब की दुकानों के विस्तार की अनुमति दी गई है।
करगिली ने कहा, "इस विरोध के माध्यम से लद्दाख के लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि हम पर थोपी जा रही नीतियों का हम समर्थन नहीं करते।" उन्होंने बताया कि उनकी ओर से मांगों का एक मसौदा सरकार को दिया गया था और अब सरकार की ओर से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिस पर आगे चर्चा करने की सहमति बनी है।
इस प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा तथा लद्दाख के लोकतांत्रिक ढांचे का विस्तार करते हुए एक निर्वाचित विधानसभा के गठन का मुद्दा शामिल है।
नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद कार्यवाही का विवरण तैयार कर हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था। लाक्रुक के अनुसार, "इस दस्तावेज में उप-समिति के सदस्यों और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई चर्चा को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं किया गया था।" इसी कारण दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
20 जून को लाक्रुक ने कहा था कि इस तरह की प्रक्रिया "केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है" और ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र समय खींचने की कोशिश कर रहा है। LAB और KDA दोनों ने जोर देकर कहा है कि गृह मंत्रालय को बैठक के दौरान हुए सहमति बिंदुओं और निर्णयों का सम्मान करना चाहिए तथा उनसे पीछे नहीं हटना चाहिए।
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