सामाजिक कार्यकर्ताओं के दल ने मिर्जापुर जेल पहुंच आदिवासी नेता सुकालो गोंड से की मुलाकात

Written by Sabrangindia Staff | Published on: October 30, 2018
आदिवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ऑल इंडियन यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपुल (एआईयूएफडब्लूपी) की सदस्य सोकालो  गोंड को जून 2018 से अवैध तरीके से जेल में कैद किया गया है। चार अक्टूबर 2018 को उन्हें जमानत दी गई थी, इसके बावजूद उन्हें अभी तक रिहा नहीं किया गया है। तकनीकी और प्रक्रियात्मक आधार पर उनकी रिहाई में देरी हुई है। रविवार 28 अक्टूबर को बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक दल ने मिर्जापुर जेल में सुकालो गोंड से मुलाकात की। इस दल का नेतृत्व इतिहासकार प्रो. महेश विक्रम सिंह, डॉ. प्रवल सिंह, डॉ. नीता चौबे, राजेंद्र चौधरी और डॉ. मुनीजा खा ने किया।



सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस ने एआईयूएफडब्लूपी के साथ मिलकर इस दल के गठन की पहल की। 


मिर्जापुर जेल पहुंचने पर जेलर ने दल को सूचित किया कि उनमें से केवल तीन लोग ही उनसे मिल सकते हैं। इसलिए पहला लक्ष्य यही था कि सभी पांचों को अनुमति दी जाए। उन्होने जेलर से पूछा क्या वे सभी उससे मिल सकते हैं। तो जेलर ने डॉ. मुनीजा खान से उनके प्रमाण पत्र के लिए पूछा, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे हमारे साथी मानवाधिकार कार्यकर्ता थी। इसके बाद इस दल ने जेलर के अनुरोध पर एक फॉर्म जमा किया। 

डॉ. खान बताया कि सोकालो को देखने के बाद वह खुश थी। उन्होने कहा, हमने देखा कि सुकालो खुले मैदान में एक शीट पर बैठी हुई थीं जहां अन्य लोग अपने परिचितों से मिल रहे थे। जैसे ही उन्होंने हमें देखा तो दूर से हाथ हिलाना शुरु कर दिया। इसके बाद हमें नजदीक पहुंचते ही हमने एक दूसरे को गले लगाया।

डॉ. मुनीजा खान ने कहा,  यह देखना खुद में एक अनुभव था। यह एक खुला मैदान था जहां बहुत सी महिलाएं थीं, बहुत भीड़ थी। इसलिए हम सभी के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी इसलिए स्थिति जो भी रही हमने बात शुरु कर दी। 



सुकालो ने डॉ. खान को बताया कि शुरुआती दिनों में जेल के स्टाफ की ओर से उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलता था जिसकी वजह से उन्होने प्रोटेस्ट किया। इसके बाद बहुत से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ सीनियर राजनेताओं ने इंट्रेस्ट दिखाया और सुकालो की रिहाई के लिए आग्रह किया फिर जेल कर्मचारी नियमित रुप से एक गिलास दूध और कुछ फल उपलब्ध कराने लगे। इसके बाद स्वास्थ्य में सुधार हुआ।


सुकालो ने मिर्जापुर जेल में अतिसंवेदनशीलता होने की समस्या के बारे में बात की। उन्होने कहा, बैरक में तीस लोगों को रखने की क्षमता है लेकिन इसमें इसकी क्षमता के दोगुने कैदी भरे गए हैं। अक्सर सोनभद्र और मिर्जापुर के कैदियों के बीच लड़ाई होती है। जरुरतमंद लोगों के लिए कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है। कैदियों और दो क्षेत्रों के अंडर ट्रायल चल रहे कैदियों बीच झगड़े के बाद जेल की स्थिति कठोर बन गई है। 

सोकालो ने यह भी बताया कि जेल के भीतर सफाई न होने के कारण मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अपमान का सामना करना पड़ता है। यहां 16-17 साल से 80-85 साल तक की उम्र की महिलाएं हैं। 

सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने अपनी स्टोरियों में मिर्जापुर के कैदियों की अपमानजनक स्थिति के बारे में बताया था। 

सीजेपी के साझेदार संगठन एआईयूएफडब्लूपी के महासचिव रोमा ने कहा, 1989 में सोनभद्र मिर्जापुर जिले से अलग बना था। इस तथ्य के बावजूद दो साल पहले  सोनभद्र जिले के कैदियों को मिर्जापुर जेल ले जाया गया जो कि सोनभद्र से अस्सी किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होने पूछा, अगर सोनभद्र जेल पहले मौजूद है तो लोगों को नियमित रुप से मिर्जापुर जेल में क्यों ले जाया जाता है? मिर्जापुर में जेलें अपनी क्षमता से काफी अधिक भरी हुई हैं। 


इस खुलासे में रोमा ने बुनियादी सुविधाओं की कमी पर प्रकाश डाला। रोमान ने कहा, ''महिलाओं के लिए मिर्जापुर जेल में केवल एक बैरक है। इसकी कुल क्षमता तीस महिलाओं की है लेकिन यहां सौ महिलाओं को रखा गया है।  भोजन पर्याप्त नहीं है। सोने के लिए कोई उचित जगह नहीं है, बिस्तर नहीं है। कर्मचारियों द्वारा जेल की राशन का दुरुपयोग किया जाता है। जब महिलाएं इस स्थिति के खिलाफ आवाज उठाती हैं तो उन्हें पीटा जाता है और यातना दी जाती है।''




डॉ. खान का मानना है कि जेल में इस निराशा जनक माहौल के बावजूद सुकालो दृढ़ता से अपनी जमीन पर खड़ी हैं और अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। वह जल, जंगल, जमीन के संघर्ष को बढ़ावा देने वाले साथी आदिवासियों के संघर्ष को लेकर अच्छी सद्भावना रखती हैं। इस दौरे के बाद जेलर ने मुनीजा को सुकालो के लिए कुछ कपड़े देने की इजाजत दी, जिसका सुकालो ने अनुरोध किया था। 

राजेंद्र चौधरी जेल के अंदर सुकालो की स्थिति के बारे में चिंतित थे और प्रोफेसर महेश विक्रम ने महसूस किया कि कैदियों से मिलने की प्रक्रिया खतरनाक थी। 

डॉ. मुनीजा खान ने हाल ही गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को लेकर कहा, आप जानते हैं कि वे इस तरह से जननेताओं को दूर ले जा रहे हैं। सुकालो ने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी समर्थन दिया जिनको हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। 

डॉ खान ने सुकालो की रिहाई में बाधा डालने वाली प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक चूक को भी समझाया। उन्होने उन लोगों का भी समर्थन किया जिन्होने इन सबकी रिहाई के लिए अभियान चलाया है। उसी समय एक घंटी सुनाई दी और सुकालो तेजी से बैरकों की तरफ चली गईं। 

बाकी ख़बरें