लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल से होंगे रिहा, सरकार ने NSA हिरासत रद्द की

Written by sabrang india | Published on: March 14, 2026
वांगचुक ने गुरुवार (12 मार्च, 2026) को अपने एक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए यह संदेश दिया कि उन्होंने सक्रियता (activism) से कदम पीछे नहीं हटाए हैं, लेकिन इसके लिए "स्पष्टता, एकता और सच्ची बातचीत" की आवश्यकता होगी।


फोटो साभार : पीटीआई

गृह मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। सरकार द्वारा आदेश वापस लिए जाने के बाद वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

रतानाडा पुलिस स्टेशन के SHO दिनेश लखावत ने PTI को बताया, “केंद्र सरकार के आदेश के बाद आज दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले मंत्रालय ने कहा था कि “सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके।”

मंत्रालय ने आगे कहा, “इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए और उचित विचार-विमर्श के बाद सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।”

उनकी तत्काल रिहाई की घोषणा करते हुए मंत्रालय ने कहा, “वांगचुक इस कानून के तहत अपनी हिरासत की लगभग आधी अवधि पहले ही पूरी कर चुके हैं।”

सरकार ने कहा कि वह इस क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए लद्दाख में हितधारकों और समुदाय के नेताओं के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है।

बयान में आगे कहा गया, “हालांकि बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय स्वभाव के लिए हानिकारक रहा है और इसने समुदाय के विभिन्न वर्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिनमें छात्र, नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार, व्यवसायी, टूर ऑपरेटर, पर्यटक और कुल मिलाकर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था शामिल हैं।”

सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 17 मार्च तक के लिए टालने के कुछ दिनों बाद आया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने यह साफ कर दिया था कि उस तारीख के बाद कोई और दलील नहीं सुनी जाएगी।

अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा था कि क्या वह कार्यकर्ता की हिरासत पर पुनर्विचार या समीक्षा कर सकता है, यह देखते हुए कि “उनकी मेडिकल हालत बहुत अच्छी नहीं है।”

सुनवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों ने अदालत को बताया कि वांगचुक की टिप्पणियों ने युवाओं को नेपाल और बांग्लादेश में देखे गए आंदोलनों की तरह विरोध प्रदर्शन करने के लिए उकसाया था और उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ जैसे विद्रोह का भी जिक्र किया था।

सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे बयान रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। अधिकारियों ने उन्हें पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा से भी जोड़ा है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 160 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर की गई थी। इससे दो दिन पहले ही शहर में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगों को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे।

उन्हें “सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने” के लिए NSA के तहत एहतियाती हिरासत में लिया गया था और बाद में जोधपुर की एक जेल में भेज दिया गया।

उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने इस हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने पिछले साल 6 अक्टूबर को पहली बार इस याचिका पर सुनवाई की और अधिकारियों को नोटिस जारी किया।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक ने गुरुवार (12 मार्च, 2026) को अपने एक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए यह संदेश दिया कि उन्होंने सक्रियता से कदम पीछे नहीं हटाए हैं, लेकिन इसके लिए “स्पष्टता, एकता और सच्ची बातचीत” की आवश्यकता होगी।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा था कि उन्हें स्वास्थ्य कारणों के आधार पर ज़मानत पर रिहा नहीं किया जा सकता और यह तर्क दिया था कि “स्वास्थ्य का बहाना मनगढ़ंत और बनावटी है।” केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह दलील दी थी कि श्री वांगचुक “पूरी तरह स्वस्थ और तंदुरुस्त” हैं और उन्हें हिरासत में रखे जाने के पांच महीनों के दौरान 24 बार मेडिकल जांच कराई गई थी।

‘द हिंदू’ के लिए किए गए इस विशेष साक्षात्कार में विजेता सिंह ने शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो से (हिंदी में) बातचीत की। इस विस्तृत बातचीत में गीतांजलि आंगमो ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी, उनकी रिहाई से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर चर्चा की।

इस साक्षात्कार में गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई का विवरण भी साझा किया और यह भी बताया कि उनके परिवार और समर्थकों को उस दिन से क्या उम्मीदें हैं।

इस बातचीत में लद्दाख के युवाओं की चिंताओं, क्षेत्र की पारिस्थितिकी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों पर भी चर्चा की गई। गीतांजलि आंगमो ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लद्दाख की पहचान, पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए छेड़ा गया एक व्यापक संघर्ष है।

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