सांप्रदायिक विचार फैलाने वाले नेटवर्क पर अपनी “नफरत को उजागर करने” वाली जांच के तहत द क्विंट ने संबंधित मंत्रालयों से सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए यह जानकारी मांगी कि क्या इस आयोजन के लिए सरकारी फंड जारी किए गए थे।

केंद्र सरकार ने सनातन संस्था के ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के लिए 63 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। द क्विंट द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस महोत्सव में कुछ वक्ताओं ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग की और 25 प्रतिशत भारतीय मुसलमानों को “हटाने” के साथ-साथ मुसलमानों के “बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन” तथा “देश निकाला” जैसी भड़काऊ मांगें कीं।
सांप्रदायिक विचार फैलाने वाले नेटवर्क पर अपनी “नफरत को उजागर करने” वाली जांच के तहत द क्विंट ने संबंधित मंत्रालयों से सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया कि क्या इस आयोजन के लिए सरकारी फंड दिए गए थे।
जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने सनातन संस्था, सनातन आश्रम, रामनाथी गांव, पोंडा (गोवा) को 13 से 15 दिसंबर, 2025 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित “सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव” के लिए 63 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की थी। मंत्रालय ने बताया कि यह अनुदान राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिया गया था। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा कि खर्च का विस्तृत विवरण उसके पास उपलब्ध नहीं है।
इस फंडिंग को लेकर सवाल तब उठे जब कार्यक्रम में कथित रूप से नफरत भरे भाषण दिए गए और “हिंदू राष्ट्र” बनाने की मांग की गई।
महोत्सव के दौरान कई वक्ताओं ने मुसलमानों को निशाना बनाते हुए बड़े जनसांख्यिकीय और राजनीतिक बदलावों की मांग की।
सुदर्शन टीवी के प्रमुख सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि “भारत में 25% मुसलमान पड़ोसी देशों से आए घुसपैठिए हैं” और उन्हें “भारत से निकालने” के लिए एनआरसी लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि “मुस्लिम आबादी पर एक सीमा तय करने की जरूरत है।”
बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने कथित तौर पर “सरकार के डर से” मुसलमानों के धर्म परिवर्तन का विचार रखा और हिंदुओं से सक्रिय रूप से धर्म परिवर्तन कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि “हर हिंदू एक व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराए” तो बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि व्यवसायी अपने कर्मचारियों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित कर सकते हैं।
हिंदू फंड से जुड़े राहुल दीवान ने “संवैधानिक हिंदू राष्ट्र” बनाने के लिए एक “आक्रामक रणनीति” का उल्लेख किया। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि मिठाइयों में “अमोनियम नाइट्रेट” मिलाया गया, तो “लाखों हिंदू मर सकते हैं,” जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका व्यक्त की गई।
द क्विंट के संपादक आदित्य मेनन ने इस कार्यक्रम को सरकारी फंड दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि 63 लाख रुपये बड़ी या छोटी राशि है, बल्कि यह है कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल ऐसे कार्यक्रम के समर्थन में क्यों किया जा रहा है, जिसमें एक समुदाय को “खत्म” करने जैसी मांगें की गईं। उन्होंने यह भी पूछा कि सार्वजनिक धन से ऐसे कार्यक्रम को क्यों प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो उनके अनुसार “हिंदू राष्ट्र” की मांग कर संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत जाता है।
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सांप्रदायिक विचार फैलाने वाले नेटवर्क पर अपनी “नफरत को उजागर करने” वाली जांच के तहत द क्विंट ने संबंधित मंत्रालयों से सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया कि क्या इस आयोजन के लिए सरकारी फंड दिए गए थे।
जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने सनातन संस्था, सनातन आश्रम, रामनाथी गांव, पोंडा (गोवा) को 13 से 15 दिसंबर, 2025 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित “सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव” के लिए 63 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की थी। मंत्रालय ने बताया कि यह अनुदान राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिया गया था। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा कि खर्च का विस्तृत विवरण उसके पास उपलब्ध नहीं है।
इस फंडिंग को लेकर सवाल तब उठे जब कार्यक्रम में कथित रूप से नफरत भरे भाषण दिए गए और “हिंदू राष्ट्र” बनाने की मांग की गई।
महोत्सव के दौरान कई वक्ताओं ने मुसलमानों को निशाना बनाते हुए बड़े जनसांख्यिकीय और राजनीतिक बदलावों की मांग की।
सुदर्शन टीवी के प्रमुख सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि “भारत में 25% मुसलमान पड़ोसी देशों से आए घुसपैठिए हैं” और उन्हें “भारत से निकालने” के लिए एनआरसी लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि “मुस्लिम आबादी पर एक सीमा तय करने की जरूरत है।”
बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने कथित तौर पर “सरकार के डर से” मुसलमानों के धर्म परिवर्तन का विचार रखा और हिंदुओं से सक्रिय रूप से धर्म परिवर्तन कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि “हर हिंदू एक व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराए” तो बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि व्यवसायी अपने कर्मचारियों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित कर सकते हैं।
हिंदू फंड से जुड़े राहुल दीवान ने “संवैधानिक हिंदू राष्ट्र” बनाने के लिए एक “आक्रामक रणनीति” का उल्लेख किया। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि मिठाइयों में “अमोनियम नाइट्रेट” मिलाया गया, तो “लाखों हिंदू मर सकते हैं,” जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका व्यक्त की गई।
द क्विंट के संपादक आदित्य मेनन ने इस कार्यक्रम को सरकारी फंड दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि 63 लाख रुपये बड़ी या छोटी राशि है, बल्कि यह है कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल ऐसे कार्यक्रम के समर्थन में क्यों किया जा रहा है, जिसमें एक समुदाय को “खत्म” करने जैसी मांगें की गईं। उन्होंने यह भी पूछा कि सार्वजनिक धन से ऐसे कार्यक्रम को क्यों प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो उनके अनुसार “हिंदू राष्ट्र” की मांग कर संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत जाता है।
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