6 राज्यों में 12 बंगाली प्रवासी मजदूरों की हत्या, अपराध सूची में महाराष्ट्र सबसे ऊपर

Written by sabrang india | Published on: February 18, 2026
हाल ही में केंद्र से लेकर राज्यों तक BJP के चुने हुए नेताओं की अगुवाई में “बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स” के नाम पर भड़काए गए हंगामे के बाद 12 बंगाली प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी अधिकारियों की सिस्टेमैटिक हेट स्पीच कितना नुकसान पहुंचा सकती है। ये आंकड़े पश्चिम बंगाल माइग्रेंट्स वेलफेयर बोर्ड ने संकलित किए हैं। मारे गए 12 लोगों में से 4 “प्रोग्रेसिव” महाराष्ट्र में और 10 भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में हुए हैं।


चुनाव हो या न हो, लेकिन खासकर चुनाव के समय, “बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स/घुसपैठिए” जैसे गलत और भड़काऊ नामों से पैदा हुआ हिंसक उन्माद जानलेवा साबित हुआ है। पश्चिम बंगाल माइग्रेंट्स वेलफेयर बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में BJP शासित छह राज्यों में 12 प्रवासी मजदूरों की हत्या हुई है। इन 12 पीड़ितों में से चार महाराष्ट्र से हैं। असम, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में एक-एक ऐसी हत्या की खबर है, जबकि ओडिशा, जहां भी भगवा पार्टी का शासन है, वहां से भी ऐसी मौत की सूचना मिली है।

इन हत्याओं के अलावा, बंगाली बोलने वाले प्रवासियों के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की 1,143 शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों में पुलिस अधिकारियों द्वारा गैर-कानूनी या अनियमित हिरासत, मजदूरों को धमकाना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना शामिल है। एक बंगाली अखबार ने इन मामलों को विस्तार से रिपोर्ट किया है।



सितंबर 2025 में, सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज़ (NCM) को एक विस्तृत शिकायत सौंपी थी, जिसमें पूरे भारत में “हेट स्पीच में खतरनाक और संगठित बढ़ोतरी” को उजागर किया गया था। शिकायत में बताया गया था कि किस तरह बंगाली मूल के मुसलमानों, जिनमें से कई भारतीय नागरिक हैं, को चुनावी रैलियों, सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और ऑनलाइन अभियानों में व्यवस्थित तरीके से “बांग्लादेशी” और “घुसपैठिए” कहकर बदनाम किया जा रहा है। NCM के चेयरपर्सन को दी गई CJP की शिकायतों का विवरण यहां पढ़ा जा सकता है।

इस शिकायत में हिमंता बिस्वा सरमा के कथित नफरती बयानों के साथ-साथ सिटू बरूआ (जातिय संग्रामी सेना) और मिलन बुरागोहैन (ऑल ताई अहोम स्टूडेंट्स यूनियन) के भाषणों को भी शामिल किया गया था। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने बसों को रोककर मुस्लिम मजदूरों को “ऊपरी असम खाली करने” की धमकी दी। इसके अलावा, बीर लाचित सेना से जुड़े भाषणों का भी उल्लेख किया गया, जिनके अनुयायियों पर कथित रूप से घर-घर जाकर “दस्तावेज जांच” करने और जबरन बेदखली की कार्रवाई करने के आरोप लगाए गए।

इसके अलावा बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी ऐसे ही लक्षित भाषण दिए गए। महाराष्ट्र में चार हत्याएं हुई हैं और अब राज्य तथा स्थानीय निकायों दोनों में BJP मजबूती से सत्ता में है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह ही मुंबई के नए मेयर (जिन्होंने चुनाव परिणामों के लगभग एक महीने बाद शपथ ली) ने “शहर में फेरीवालों पर कार्रवाई” और “शहर में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई” के तहत “जन्म प्रमाणपत्रों की जांच” करने का आदेश दिया था।

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