गुजरात में दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को आवंटित 20,000 एकड़ जमीन अब तक नहीं सौंपी गई: जिग्नेश मेवाणी

Written by sabrang india | Published on: February 19, 2026
सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स (गुजरात संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान मेवाणी ने कहा कि सुरेंद्रनगर जिले में दलित खेतिहर मजदूरों ने 15 वर्षों तक अपनी 7,500 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत अधिकारियों से की, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।


साभार : पीटीआई (फाइल फोटो)

गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को आवंटित 20,000 एकड़ जमीन अब तक उनके वास्तविक कब्जे में नहीं सौंपी गई है।

सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स (गुजरात संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान मेवाणी ने बताया कि सुरेंद्रनगर जिले में दलित खेतिहर मजदूरों ने 15 वर्षों तक अधिकारियों को अपनी 7,500 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे के संबंध में पत्र लिखे, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने कहा, “मैंने पिछले आठ वर्षों में विधानसभा में कई बार यह मुद्दा उठाया है। सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। अगर हम बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को जमीन दे सकते हैं, तो राज्य खेती के लिए पात्र लोगों को जमीन क्यों नहीं दे रहा? राज्य के राजस्व विभाग को अवैध कब्जे हटाकर वंचित समुदायों को न्याय दिलाना चाहिए।”

पिछले विधानसभा सत्र के दौरान भी मेवाणी ने सरकार से मांग की थी कि जिन मामलों में दलितों को गुजरात एग्रीकल्चर लैंड सीलिंग एक्ट के तहत जमीन आवंटित की गई है, लेकिन उन पर गैर-दलितों ने अवैध कब्जा कर रखा है, उनमें आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को ऐसे लाभार्थियों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए, ताकि वे अपनी आवंटित जमीन का कब्जा लेने जाएं तो उन्हें जान-माल का नुकसान न हो।

गौरतलब है कि गुजरात में गुजरात एग्रीकल्चर लैंड सीलिंग एक्ट, 1960 के तहत दलितों को जमीन आवंटित की जाती है। इस कानून के अनुसार, एक किसान या परिवार कितनी कृषि भूमि का स्वामित्व रख सकता है, इसकी एक सीमा निर्धारित है।

सीमा से अधिक भूमि सरकार अपने अधीन लेकर उसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा पूर्व सैनिकों जैसे वंचित वर्गों में वितरित करती है। भूमि असमानता कम करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकारी बंजर भूमि भी समय-समय पर इन समुदायों को दी जाती है।

मीडिया से बातचीत में मेवाणी ने कहा था, “संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी गणराज्य के रूप में परिभाषित किया गया है। वर्ष 2009 में मुझे पता चला कि देश भर में दलितों को लैंड सीलिंग एक्ट के तहत आवंटित जमीन से वंचित रखा गया था। अधिकांश मामलों में जमीन पर अवैध कब्जा था या ममलतदार (राजस्व प्रशासन के अधिकारी) ने जमीन की सही नाप-जोख सुनिश्चित नहीं की थी। यह एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध है, लेकिन स्थानीय पुलिस या प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई कार्रवाई की।”

उन्होंने बताया कि इस खुलासे के बाद उन्होंने वर्ष 2012 में गुजरात हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।

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