बरेली: मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की साजिश? 12 वर्षीय बच्चे से  कथित  तौर पर  लगवाए गए 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे  

Written by sabrang india | Published on: June 23, 2026
21 जून को गांव में निकाले गए पारंपरिक मुहर्रम ताजिया जुलूस के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक नाबालिग लड़का कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाता दिखाई दे रहा था।



उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कथित साजिश का एक मामला सामने आया है। पुलिस ने दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने हाफिजगंज थाना क्षेत्र के खैखेड़ा गांव में मुहर्रम के ताजिया जुलूस के दौरान एक 12 वर्षीय मुस्लिम बच्चे से जबरन "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे लगवाए। इसके बाद वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, ताकि मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया जा सके और क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, 21 जून को गांव में निकाले गए पारंपरिक मुहर्रम ताजिया जुलूस के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक लड़का कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाता दिखाई दे रहा था। पुलिस जांच में इस घटना के पीछे योगेंद्र पाल और उसके सहयोगी भुवनेश कुमार की पहचान हुई है।

वीडियो को बड़े पैमाने पर साझा किया गया और दावा किया गया कि जुलूस में शामिल लोगों (ताजियादारों) ने भड़काऊ नारे लगाए थे। योगेंद्र पाल समेत कुछ स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि जिन हिंदुओं ने इन नारों का विरोध किया, उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद हाफिजगंज थाने में शिकायतें दर्ज कराई गईं और इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

पुलिस जांच में साजिश का खुलासा

वायरल वीडियो और सोमवार सुबह प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बरेली पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में वीडियो का फॉरेंसिक विश्लेषण, ग्रामीणों के बयान और जुलूस के दौरान हुई घटनाओं का पुनर्निर्माण शामिल था।

जांच में सामने आई मुख्य बातें:

1. मुहर्रम जुलूस में शामिल लोगों ने "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे नहीं लगाए थे।
2. योगेंद्र पाल और भुवनेश कुमार ने कथित तौर पर 12 वर्षीय बच्चे से जबरन नारे लगवाए, उसका वीडियो रिकॉर्ड किया और मुस्लिम समुदाय को फंसाने तथा सांप्रदायिक अशांति फैलाने के उद्देश्य से उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया।

दोनों आरोपी गांव के निवासी हैं और उनकी उम्र लगभग 30 से 40 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वीडियो बनाने और प्रसारित करने में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। नाबालिग बच्चे का बयान भी कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जा रहा है।

एसपी (उत्तर) मुकेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि जांच से स्पष्ट हो गया है कि विवादित नारे ताजियादारों ने नहीं लगाए थे। उन्होंने कहा, "यह एक सुनियोजित साजिश थी। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"

नवाबगंज के क्षेत्राधिकारी (सीओ) नीलेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि आरोपियों ने दूसरे समुदाय के लोगों को फंसाने के इरादे से यह कृत्य किया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि स्थानीय लोगों द्वारा ऐसे कोई नारे नहीं लगाए गए थे और वायरल वीडियो का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव भड़काना था।

ग्रामीणों का दावा है कि योगेंद्र पाल और भुवनेश कुमार पहले भी गांव का माहौल खराब करने की कोशिश कर चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन पर पहले भी बच्चों का इस्तेमाल कर भड़काऊ नारे लगवाने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करने के आरोप लगते रहे हैं। पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है।

इस घटना ने धार्मिक आयोजनों और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुहर्रम के जुलूस एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन होते हैं और ऐसी भ्रामक सामग्री को सोशल मीडिया पर फैलाने से संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। पुलिस की त्वरित और तथ्यों पर आधारित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, क्योंकि इससे संभावित तनाव को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।

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