उमर खालिद ने दिल्ली दंगा मामले में जमानत न मिलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की

Written by sabrang india | Published on: April 14, 2026
इससे पहले, कोर्ट ने खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई थी।


फोटो साभार : पीटीआई (फाइल फोटो)

उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्यू पिटीशन दायर की है, जिसमें उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार करने वाले शीर्ष अदालत के आदेश को चुनौती दी है।

इस मामले का जिक्र सुबह जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने किया, जिन्होंने इस पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग की। जज ने कोई निर्देश तो नहीं दिया, लेकिन कहा कि वे इस पर विचार करेंगे।

खालिद की यह पिटीशन एडवोकेट एन. साई विनोद के जरिए दायर की गई थी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली दंगे फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर हुई झड़पों के बाद हुए थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

यह मौजूदा मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि खालिद और अन्य लोगों ने कई दंगे भड़काने की साजिश रची थी।

खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और उन पर आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने, गैर-कानूनी जमावड़ा करने के साथ-साथ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कई अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए थे। वे गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में हैं।

इस साल जनवरी में, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि पांच अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान—को जमानत दे दी थी।

कोर्ट ने यह तर्क दिया था कि खालिद और इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों की तुलना में अलग है। कोर्ट ने आगे कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से खालिद और इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

कोर्ट ने उस समय यह निष्कर्ष निकाला था, “यह कोर्ट इस बात से संतुष्ट है कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से अपीलकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप सामने आते हैं। इन अपीलकर्ताओं के संबंध में वैधानिक सीमा लागू होती है। कार्यवाही के इस चरण पर उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।”

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि खालिद और इमाम संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने पर, या इस आदेश के एक वर्ष पूरा होने पर, फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

जहां तक अन्य पांच आरोपियों का सवाल है, कोर्ट ने उन्हें कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल में होने वाली देरी, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आने वाले मामलों में भी—जैसा कि यह मौजूदा मामला है—न्यायिक जांच का आधार बन सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने साजिश के मामले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 11 को अब तक जमानत मिल चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश में कहा गया था कि ट्रायल में देरी “ट्रम्प कार्ड” की तरह काम नहीं करती, जो अपने आप कानूनी सुरक्षा उपायों को हटा दे।

कोर्ट ने कहा था, “सभी अपीलकर्ता एक समान स्थिति में नहीं हैं। अभियोजन पक्ष के मामले से उभरने वाली भागीदारी के पदानुक्रम के आधार पर प्रत्येक आवेदन की अलग-अलग जांच आवश्यक है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था, “यह कोर्ट इस बात से संतुष्ट है कि अभियोजन सामग्री से अपीलकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप सामने आते हैं… इस चरण पर उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।” अदालत ने UAPA की धारा 43D(5) का हवाला देते हुए कहा था कि यदि केस डायरी या चार्जशीट के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, तो जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को एंटी-CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के लिए गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें अगस्त 2020 में बड़ी साजिश के मामले में भी गिरफ्तार किया गया।

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