शुक्रवार, 14 मार्च को कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी। बेल मिलने के बाद जैसे ही तीनों जेल से बाहर आए, ‘हिंदू रक्षा दल’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारेबाजी भी की।

दिल्ली–देहरादून हाईवे पर “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है” लिखने के मामले में दो महिलाओं और एक युवक को अदालत से जमानत मिल गई है। जेल से रिहा होने के बाद तीनों का स्वागत हिंदू रक्षा दल के सदस्यों ने किया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले ग्रीन एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड की दीवार पर “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है” लिख दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कार्रवाई करते हुए सुलेखा (निवासी चंद्र नगर, कोतवाली देहरादून), शारदा (निवासी भूपखेड़ी मुजाहिदपुर, थाना रतनपुरी, जिला मुजफ्फरनगर; वर्तमान निवासी सुभाष नगर, थाना क्लेमेंट टाउन, देहरादून) और जितेंद्र राघव (निवासी मानव केंद्र, सुभाष नगर, थाना क्लेमेंट टाउन, देहरादून) के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बाद में अदालत से जमानत मिलने पर तीनों को जेल से रिहा कर दिया गया।
इंडिया टुडे से जुड़े राहुल कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार, 14 मार्च को कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी। बेल मिलने के बाद जैसे ही तीनों जेल से बाहर आए, ‘हिंदू रक्षा दल’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारेबाजी भी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यह घटना सहारनपुर के थाना बिहारीगढ़ इलाके की है। दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दो महिलाओं को दीवार पर कुछ लिखते हुए देखा गया। महिलाओं ने दीवार पर लिखा था कि “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है।” दोनों महिलाओं का संबंध ‘हिंदू रक्षा दल’ से बताया गया।
बाद में संबंधित संगठन की अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने भी पुष्टि की कि इन महिलाओं का संबंध उनके संगठन से है। इस मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के एक कर्मचारी की शिकायत पर थाना बिहारीगढ़ पुलिस ने संज्ञान लिया।
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और सड़क पर लिखे गए आपत्तिजनक शब्दों को तुरंत हटा दिया।
बाद में ‘शांति व्यवस्था भंग करने’ के आरोप में दो युवतियों और एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत दे दी। जमानत आदेश मिलने के बाद उन्हें जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर लोहे के पुल के पास स्थित बैरियर पर दो महिलाओं और एक युवक ने “यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है” जैसे शब्द लिख दिए थे। इस मामले में एनएचएआई की ओर से 27 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
जांच के बाद पुलिस ने जितेंद्र राघव, शारदा और सुलेखा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
वहीं हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष ललित शर्मा ने शनिवार सुबह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि तीन कार्यकर्ताओं को जेल भेजकर जश्न मनाने वालों को यह बता देना चाहिए कि जिस संगठन से हम जुड़े हैं, वह बाजी पलटने में देर नहीं लगाता। मां भगवती के आशीर्वाद से तीनों कार्यकर्ता सकुशल अपने घर लौट आए हैं।
इस मामले में एसपी देहात सागर जैन ने भी पुष्टि की कि तीनों आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई है।
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दिल्ली–देहरादून हाईवे पर “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है” लिखने के मामले में दो महिलाओं और एक युवक को अदालत से जमानत मिल गई है। जेल से रिहा होने के बाद तीनों का स्वागत हिंदू रक्षा दल के सदस्यों ने किया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले ग्रीन एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड की दीवार पर “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है” लिख दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कार्रवाई करते हुए सुलेखा (निवासी चंद्र नगर, कोतवाली देहरादून), शारदा (निवासी भूपखेड़ी मुजाहिदपुर, थाना रतनपुरी, जिला मुजफ्फरनगर; वर्तमान निवासी सुभाष नगर, थाना क्लेमेंट टाउन, देहरादून) और जितेंद्र राघव (निवासी मानव केंद्र, सुभाष नगर, थाना क्लेमेंट टाउन, देहरादून) के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बाद में अदालत से जमानत मिलने पर तीनों को जेल से रिहा कर दिया गया।
इंडिया टुडे से जुड़े राहुल कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार, 14 मार्च को कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी। बेल मिलने के बाद जैसे ही तीनों जेल से बाहर आए, ‘हिंदू रक्षा दल’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारेबाजी भी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यह घटना सहारनपुर के थाना बिहारीगढ़ इलाके की है। दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दो महिलाओं को दीवार पर कुछ लिखते हुए देखा गया। महिलाओं ने दीवार पर लिखा था कि “यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है।” दोनों महिलाओं का संबंध ‘हिंदू रक्षा दल’ से बताया गया।
बाद में संबंधित संगठन की अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने भी पुष्टि की कि इन महिलाओं का संबंध उनके संगठन से है। इस मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के एक कर्मचारी की शिकायत पर थाना बिहारीगढ़ पुलिस ने संज्ञान लिया।
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और सड़क पर लिखे गए आपत्तिजनक शब्दों को तुरंत हटा दिया।
बाद में ‘शांति व्यवस्था भंग करने’ के आरोप में दो युवतियों और एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत दे दी। जमानत आदेश मिलने के बाद उन्हें जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर लोहे के पुल के पास स्थित बैरियर पर दो महिलाओं और एक युवक ने “यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है” जैसे शब्द लिख दिए थे। इस मामले में एनएचएआई की ओर से 27 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
जांच के बाद पुलिस ने जितेंद्र राघव, शारदा और सुलेखा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
वहीं हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष ललित शर्मा ने शनिवार सुबह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि तीन कार्यकर्ताओं को जेल भेजकर जश्न मनाने वालों को यह बता देना चाहिए कि जिस संगठन से हम जुड़े हैं, वह बाजी पलटने में देर नहीं लगाता। मां भगवती के आशीर्वाद से तीनों कार्यकर्ता सकुशल अपने घर लौट आए हैं।
इस मामले में एसपी देहात सागर जैन ने भी पुष्टि की कि तीनों आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई है।
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