राणिप इलाके में मामूली विवाद के बाद दलित युवक पर हमला, पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में 6 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

अहमदाबाद के राणिप क्षेत्र में शनिवार देर रात एक मामूली विवाद अचानक हिंसा में बदल गया। इस दौरान 25 वर्षीय दलित युवक पर चाकू से गर्दन पर वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पीड़ित ने रविवार को राणिप पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित की पहचान साहिल वाघेला के रूप में हुई है, जो राणिप में पिंक सिटी के सामने पुरुषोत्तमनगर के निवासी हैं और एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। सिविल अस्पताल में पुलिस को दिए गए अपने बयान में साहिल ने बताया कि घटना शनिवार रात करीब 10:30 बजे की है। वे बकरा मंडी के पास एक पान की दुकान पर गए थे, तभी वहां उनका सामना श्रवण ठाकोर, हर्षित ठाकोर और चार अन्य लोगों से हुआ।
बताया जा रहा है कि इन व्यक्तियों ने साहिल की सोसायटी में पहले हुई किसी घटना को लेकर उनसे पूछताछ शुरू की। बात बढ़ते-बढ़ते आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। साहिल का कहना है कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया और मारपीट भी की गई। इसी झड़प के दौरान मुख्य आरोपी श्रवण ने कथित रूप से चाकू निकालकर साहिल पर वार किया, जो उनकी गर्दन के बाईं ओर लगा।
गर्दन से खून बहता देख साहिल ने मदद के लिए शोर मचाया। आवाज सुनकर हमलावर घबरा गए और वहां से भाग निकले। घायल अवस्था में साहिल ने तुरंत अपने दोस्तों और एक रिश्तेदार को फोन कर बुलाया। इसके बाद 108 एंबुलेंस की सहायता से उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राणिप पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान करने जैसे आरोप लगाए हैं। साथ ही, आरोपियों पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लागू की गई हैं।
गौरतलब है कि दलितों के खिलाफ हिंसा और क्रूरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के औराई में एक दलित युवक नहर के पास हुई बहस के दौरान किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 वर्षीय राहुल को गंभीर चोटों के चलते रविवार को जिला अस्पताल से वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के अनुसार, राहुल शौच के लिए नहर के पास गया था। इसी दौरान उसकी आरोपी शंकर बिंद से बहस हो गई, जिसने राहुल के वहां मौजूद होने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि हमलावर ने राहुल पर हमला करने से पहले जातिसूचक गालियां दीं।
एसपी मांगलिक ने कहा, “जब राहुल ने भागने की कोशिश की, तो आरोपी ने कथित तौर पर मोटरसाइकिल की चाबी उसकी बाईं आंख में घुसा दी और उसे जान से मारने की धमकी दी।”
राहुल दर्द से कराहते हुए जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों के मौके पर इकट्ठा होते ही हमलावर फरार हो गया।
सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और राहुल को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया।
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में नए साल की शुरुआत से ठीक पहले एक दलित परिवार पर बेरहमी से हमला किया गया था और उन्हें बलात्कार की धमकी दी गई थी। आरोपियों ने “चमड़ी उतारकर जूते बनाने” जैसी धमकियां भी दी थीं।
हालांकि, एक सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद अंततः एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पीड़ितों का आरोप था कि पुलिस ने उच्च जाति के आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने घर की महिलाओं के साथ बलात्कार की धमकी दी थी।
द मूकनायक से बातचीत में अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले शिकायतकर्ता बीरेंद्र दास ने प्रशासनिक उदासीनता पर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता पुलिस क्या कर रही है। हम बस न्याय चाहते हैं। उन्होंने मेरी बेटी, पत्नी और बेटे को बुरी तरह पीटा है।”
उनके 15 वर्षीय बेटे अयान दास को आरोपियों ने घर से बाहर खींचकर लात-घूंसे मारे, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और काफी खून बहा।
इसी तरह, बीते वर्ष नवंबर में झांसी में भी एक दलित युवक पर कुछ लोगों ने हमला किया था। आरोपियों ने उसे सिगरेट देने के बहाने बुलाया और वहां पहुंचने के बाद चप्पलों, मुक्कों, लातों और डंडों से पीटा। उस पर पिस्तौल तानी गई, कपड़े उतरवाए गए और उसे एक व्यक्ति के पैर छूने के लिए मजबूर किया गया। पूरे हमले का वीडियो भी बनाया गया। यह घटना 22 नवंबर को प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि वह राजगढ़ में गोस्वामी रेस्टोरेंट के पास खड़ा था, तभी निशांत सक्सेना, सुकृत और कनिष्क उसके पास आए। उसने कहा, “उन्होंने मुझसे सिगरेट पीने के लिए साथ चलने को कहा। हम चारों एक ही स्कूटर पर गए।”
ज्ञात हो कि पिछले साल नवंबर में ही तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में कथित जातिगत भेदभाव का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था, जहां 18 वर्षीय दलित छात्र ने जातिसूचक गालियों और मारपीट से अपमानित होने के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 10 दिनों तक आईसीयू में संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस हृदयविदारक घटना में 18 वर्षीय दलित छात्र एस. गजनी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वह वडाकुचिपालयम का निवासी था और गवर्नमेंट अरिग्नार अन्ना आर्ट्स कॉलेज में इतिहास विषय का प्रथम वर्ष का छात्र था।
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द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित की पहचान साहिल वाघेला के रूप में हुई है, जो राणिप में पिंक सिटी के सामने पुरुषोत्तमनगर के निवासी हैं और एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। सिविल अस्पताल में पुलिस को दिए गए अपने बयान में साहिल ने बताया कि घटना शनिवार रात करीब 10:30 बजे की है। वे बकरा मंडी के पास एक पान की दुकान पर गए थे, तभी वहां उनका सामना श्रवण ठाकोर, हर्षित ठाकोर और चार अन्य लोगों से हुआ।
बताया जा रहा है कि इन व्यक्तियों ने साहिल की सोसायटी में पहले हुई किसी घटना को लेकर उनसे पूछताछ शुरू की। बात बढ़ते-बढ़ते आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। साहिल का कहना है कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया और मारपीट भी की गई। इसी झड़प के दौरान मुख्य आरोपी श्रवण ने कथित रूप से चाकू निकालकर साहिल पर वार किया, जो उनकी गर्दन के बाईं ओर लगा।
गर्दन से खून बहता देख साहिल ने मदद के लिए शोर मचाया। आवाज सुनकर हमलावर घबरा गए और वहां से भाग निकले। घायल अवस्था में साहिल ने तुरंत अपने दोस्तों और एक रिश्तेदार को फोन कर बुलाया। इसके बाद 108 एंबुलेंस की सहायता से उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राणिप पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान करने जैसे आरोप लगाए हैं। साथ ही, आरोपियों पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लागू की गई हैं।
गौरतलब है कि दलितों के खिलाफ हिंसा और क्रूरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के औराई में एक दलित युवक नहर के पास हुई बहस के दौरान किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 वर्षीय राहुल को गंभीर चोटों के चलते रविवार को जिला अस्पताल से वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के अनुसार, राहुल शौच के लिए नहर के पास गया था। इसी दौरान उसकी आरोपी शंकर बिंद से बहस हो गई, जिसने राहुल के वहां मौजूद होने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि हमलावर ने राहुल पर हमला करने से पहले जातिसूचक गालियां दीं।
एसपी मांगलिक ने कहा, “जब राहुल ने भागने की कोशिश की, तो आरोपी ने कथित तौर पर मोटरसाइकिल की चाबी उसकी बाईं आंख में घुसा दी और उसे जान से मारने की धमकी दी।”
राहुल दर्द से कराहते हुए जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों के मौके पर इकट्ठा होते ही हमलावर फरार हो गया।
सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और राहुल को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया।
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में नए साल की शुरुआत से ठीक पहले एक दलित परिवार पर बेरहमी से हमला किया गया था और उन्हें बलात्कार की धमकी दी गई थी। आरोपियों ने “चमड़ी उतारकर जूते बनाने” जैसी धमकियां भी दी थीं।
हालांकि, एक सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद अंततः एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पीड़ितों का आरोप था कि पुलिस ने उच्च जाति के आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने घर की महिलाओं के साथ बलात्कार की धमकी दी थी।
द मूकनायक से बातचीत में अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले शिकायतकर्ता बीरेंद्र दास ने प्रशासनिक उदासीनता पर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता पुलिस क्या कर रही है। हम बस न्याय चाहते हैं। उन्होंने मेरी बेटी, पत्नी और बेटे को बुरी तरह पीटा है।”
उनके 15 वर्षीय बेटे अयान दास को आरोपियों ने घर से बाहर खींचकर लात-घूंसे मारे, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और काफी खून बहा।
इसी तरह, बीते वर्ष नवंबर में झांसी में भी एक दलित युवक पर कुछ लोगों ने हमला किया था। आरोपियों ने उसे सिगरेट देने के बहाने बुलाया और वहां पहुंचने के बाद चप्पलों, मुक्कों, लातों और डंडों से पीटा। उस पर पिस्तौल तानी गई, कपड़े उतरवाए गए और उसे एक व्यक्ति के पैर छूने के लिए मजबूर किया गया। पूरे हमले का वीडियो भी बनाया गया। यह घटना 22 नवंबर को प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि वह राजगढ़ में गोस्वामी रेस्टोरेंट के पास खड़ा था, तभी निशांत सक्सेना, सुकृत और कनिष्क उसके पास आए। उसने कहा, “उन्होंने मुझसे सिगरेट पीने के लिए साथ चलने को कहा। हम चारों एक ही स्कूटर पर गए।”
ज्ञात हो कि पिछले साल नवंबर में ही तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में कथित जातिगत भेदभाव का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था, जहां 18 वर्षीय दलित छात्र ने जातिसूचक गालियों और मारपीट से अपमानित होने के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 10 दिनों तक आईसीयू में संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस हृदयविदारक घटना में 18 वर्षीय दलित छात्र एस. गजनी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वह वडाकुचिपालयम का निवासी था और गवर्नमेंट अरिग्नार अन्ना आर्ट्स कॉलेज में इतिहास विषय का प्रथम वर्ष का छात्र था।
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